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दो लाख का नुकसान, मुआवजा मिला पांच हजार: बाढ़ प्रभावित बोले- सबकुछ बर्बाद हो गया, घर में राशन नहीं; हाई कोर्ट में PIL लगाई – Guna News

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दो लाख का नुकसान, मुआवजा मिला पांच हजार:  बाढ़ प्रभावित बोले- सबकुछ बर्बाद हो गया, घर में राशन नहीं; हाई कोर्ट में PIL लगाई – Guna News

दो लाख का नुकसान, मुआवजा मिला पांच हजार: बाढ़ प्रभावित बोले- सबकुछ बर्बाद हो गया, घर में राशन नहीं; हाई कोर्ट में PIL लगाई – Guna News

बाढ़ में लोगों का काफी नुकसान हुआ था।

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ये दर्द है गुना की न्यू सिटी कॉलोनी के रहने वाले कमल सिंह रजक का। 29 जुलाई को आई बाढ़ में उनके घर में सात फीट तक पानी भर गया था। उनका लाखों का नुकसान हुआ और शासन ने मुआवजा दिया सिर्फ पांच हजार रुपए। उनके जैसे ही और भी सैकड़ों लोग हैं, जिनका लाखों का नुकसान हुआ और मुआवजा मिला पांच हजार। दैनिक भास्कर ने अतिवृष्टि से प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों से बातचीत की।

पहले तीन तस्वीरों में देखिए गुना में आई बाढ़…

29 जुलाई को बारिश होने से शहर में बाढ़ के हालात थे। घरों में पानी भरा गया था।

सड़कों और घरों में पानी भर जाने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

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पानी का बहाव इतना तेज था कि घरों का सामान भी सड़कों पर बह गया।

गुना बाढ़: एक नजर में

  • अतिवृष्टि और बाढ़: 29 जुलाई को गुना जिले में 12 घंटों में 9 इंच से ज्यादा बारिश हुई।
  • तालाब टूटना: गोपालपुरा तालाब की पार टूटने से कई कॉलोनियों में बाढ़ का पानी भरा गया।
  • नुकसान: घरों में पानी भरने से लाखों रुपए का नुकसान हुआ। सामान के साथ राशन बर्बाद हो गया।
  • मुआवजा: 6028 को मुआवजा दिया गया। शहरी इलाकों में 5 हजार और ग्रामीण इलाकों में 3 हजार रुपए दिए।
  • विरोध-प्रदर्शन: मुआवजा कम होने पर लोगों ने नाराजगी जताते हुए चक्काजाम किया।
  • PIL (जनहित याचिका) : हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। मुआवजा बढ़ाने की मांग रखी।

29 जुलाई को गुना में अतिवृष्टि और बाढ़ 29 जुलाई को जिलेभर में अतिवृष्टि हुई, जिसमें 12 घंटों में 9 इंच से ज्यादा पानी भर गया। शहर में हालात सबसे ज्यादा खराब थे। गोपालपुरा तालाब की पार के ऊपर से पानी निकलने वाला था, जिससे तालाब टूट सकता था। इसी आशंका को देखते हुए सिंचाई विभाग ने तालाब की पार तोड़ दी। इससे तालाब का पानी एकदम से निकला और नानाखेड़ी, न्यू सिटी कॉलोनी, पीतांबरा कॉलोनी, भगत सिंह कॉलोनी को अपनी चपेट में ले लिया।

न्यू सिटी कॉलोनी में सबसे भयावह हालात बने। यहां घरों की एक मंजिल पानी में डूब गई। लोगों ने छतों और दूसरी ऊंची मंजिलों पर पहुंचकर रात गुजारी। घरों में घुसे पानी में लोगों का सामान डूब गया। राशन पानी समेत गृहस्थी का सारा सामान पानी में मिल गया। लगभग 12 घंटे बाद पानी का स्तर कम हुआ, जिसके बाद ही लोग घरों की निचली मंजिल पर आ पाए।

बाढ़ के पानी में बर्बाद हुए सामान को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

सीएम और केंद्रीय मंत्री का दौरा और मुआवजा वितरण बाढ़ के हालात के 3 दिन बाद सीएम डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुना का दौरा किया। उन्होंने पटेल नगर पहुंचकर बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की, लेकिन न्यू सिटी कॉलोनी नहीं पहुंचे, जो सबसे अधिक प्रभावित था। इससे न्यू सिटी कॉलोनी के लोगों में नाराजगी दिखी और उन्होंने 3 जगह चक्काजाम कर विरोध जताया।

प्रशासन ने 5 दिनों तक अतिवृष्टि से प्रभावित इलाकों का सर्वे कराया। इसके बाद 8 अगस्त को राहत राशि बांटी गई। सीएम डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअली जुड़कर सिंगल क्लिक के जरिए राहत राशि को प्रभावितों के खातों में भेजा। जिले के 6028 लोगों को 3.58 करोड़ की मुआवजा राशि दी गई। शहरी इलाकों में प्रत्येक प्रभावित को 5 हजार और ग्रामीण इलाके में 3 हजार की राशि दी गई।

घर में रखा सामान खराब हुआ पीतांबरा कॉलोनी में रहने वाली द्रौपदी बाई दूसरों के घरों में झाड़ू-बर्तन का काम करती हैं। वे बताती हैं कि वे 4 बच्चों को पाल रही हैं और उनके पति 10 साल पहले गुजर चुके हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ के दिन उनके घर में गले तक पानी भर गया था। छत पर जाने के लिए सीढ़ियां नहीं होने के कारण, वे और उनके चारों बच्चे बड़ी मुश्किल से ऊपर चढ़कर बैठे।

उनका फ्रिज, कूलर, पंखा, खाने का सामान, मोटर और टीवी सब खराब हो गया। ई-रिक्शा में पानी भरने से वह भी खराब हो गया। द्रौपदी बाई का कहना है कि उनका 2 लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है और 5 हजार के मुआवजे से उनका गुजारा नहीं हो पाएगा। वे सरकार से इतना मुआवजा देने की गुहार लगा रही हैं, जिससे उनका सामान सुधर जाए और उनका गुजारा हो सके।

पिता को मिला, बेटे को नहीं मिला मुआवजा पीतांबरा कॉलोनी में ही रहने वाली राधा रजक ने बताया कि उनके ससुर अलग रहते हैं और वो लोग दूसरे घर में रहते हैं। उनके पति का नाम अभी भी समग्र आईडी में ससुर के साथ ही जुड़ा हुआ है। ऐसे में उनके ससुर को तो मुआवजा मिल गया, लेकिन उन्हें मुआवजा नहीं मिला। घर में आठ फीट पानी भर गया था। पूरा राशन बह गया। ओढ़ने-बिछाने के गद्दे, रजाई सब खराब हो गए।

पानी में सारे डॉक्यूमेंट्स भीग गए न्यू सिटी कॉलोनी में रहने वाली राजकुमारी ने बताया कि घर में छह-सात फीट तक पानी भर गया था। जब तक पानी नहीं उतरा, हम लोग ऊपर ही बैठे रहे। रात में जब पानी उतरा तो दूसरे के घर में जाकर रुके। पानी से बहुत नुकसान हुआ है। किताबें, डॉक्यूमेंट्स सब भीग गए। अब ये सब फिर से बनवाने पड़ेंगे। सरकार ने पांच हजार रुपए डाले हैं, उससे क्या होता है। राशन तक नहीं हो पाता है।

बाढ़ के निशान आज भी मौजूद लोगों के घरों की दीवारों पर पानी से बने निशान आज भी बाढ़ की गवाही दे रहे हैं। कई घरों में आठ फीट तक पानी के निशान बने हुए हैं, जबकि कुछ घरों में चार फीट और कुछ में छह फीट ऊंचे निशान हैं। पानी से खराब हुए गद्दे, रजाई, गेहूं, प्लाई सहित अन्य सामान आज भी नालों में मौजूद हैं।

बाढ़ का पानी घरों में भरा गया था, उसके निशान अभी बने हुए हैं।

हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर जिलेभर में बाढ़ प्रभावितों को मुआवजा तो मिला, लेकिन यह लोगों को हुए नुकसान के मुकाबले बहुत कम है। इस मामले को लेकर शहर के समाजसेवी विक्रम तोमर ने हाईकोर्ट में PIL (जनहित याचिका) दाखिल की है। याचिका में यह पूछा गया है कि किस आदेश के तहत गोपालपुरा तालाब की पार तोड़ी गई और जिस अधिकारी ने इसे तुड़वाया, उस पर कार्रवाई की जाए। PIL में यह भी मांग की गई है कि लोगों को हुए लाखों के नुकसान के मुकाबले जो 5-5 हजार का मुआवजा दिया गया है, उसे बढ़ाया जाए। हाईकोर्ट ने PIL स्वीकार कर नोटिस जारी कर दिया है।

जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री रमेश चौहान ने कहा-

तालाब पूरा भर गया था। उसके ऊपर से पानी निकालने वाला था। अगर पार नहीं तोड़ते तो तालाब फूट जाता और पूरा पानी एकदम से निकलता, तो और ज्यादा स्थित खराब होती। तालाब की पार तोड़ने से पानी कम मात्र में धीरे-धीरे निकला।

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कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने कहा-

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राजस्व पुस्तक परिपत्र की धारा 6/4 के अनुसार पांच-पांच हजार का मुआवजा दिया गया है। जिनका अनाज खराब हुआ है, उन्हें भी मुआवजा दिया जा रहा है। इसके अलावा पशु हानि पर भी मुआवजा दिया जाता है। वो प्रक्रिया भी चल रही है।

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