करंट से मां-बेटे,भतीजे की मौत, एक साथ उठी 3 अर्थियां: लोग बोले- 10 मिनट तक तड़पे रहे; मृतक के 5 बच्चे, 3 महीने का जुड़वां भी – Samastipur News h3>
समस्तीपुर में रविवार को एक ही परिवार के 3 लोगों की करंट से मौत हो गई। पहले करंट बेटे अरुण (40) को लगा, उसे बचाने में मां शांति देवी (60) और भतीजा अजीत राम (16) ने भी दम तोड़ दिया। सोमवार को तीनों का अंतिम संस्कार हुआ।
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एक घर से एक साथ तीन अर्थियां उठीं तो चीत्कार मच गई। गांव में हर किसी की आंख नम दिखी। अरुण के 5 बच्चे हैं, जिनमें 3-4 महीने का जुड़वां भी है, लोग यही कह रहे हैं कि इन बच्चों का क्या होगा। कौन इनका पालन-पोषण करेगा।
घटना विभूतिपुर थाना क्षेत्र के नरहन गांव की है। घटना के पीछे की कहानी जानने के लिए NEWS4SOCIALकी टीम नरहन गांव पहुंची। यहां लोगों में प्रशासन और बिजली विभाग को लेकर नाराजगी है।
इतनी बड़ी घटना के बाद भी न तो बिजली विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और न ही कोई प्रशासनिक पदाधिकारी। इस वजह से परिवार और ग्रामीणों में गुस्सा है। पढ़िए नरहन गांव से ग्राउंड रिपोर्ट…
पहले अंतिम संस्कार की कुछ तस्वीरें
घर के आगे रखी परिवार के तीन सदस्यों की लाशें।
लाशों के लिए अर्थी बनाते ग्रामीण।
तीनों मौत के बाद गांव में मातम है, परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
25 बार बिजली ऑफिस कॉल किया, फोन नहीं उठा
गांव वालों ने बताया, अरुण के घर के पास बिजली का पोल नहीं है। तीन साल से बिजली का पोल लाकर रखा है, पर आजतक उसे लगाया नहीं गया। इस कारण अरुण ने मेन रोड के बिजली पोल से सर्विस वायर को बांस के सहारे घर तक लाया था।
बारिश और तेज हवा के कारण बिजली का तार बांस से गिर गया था। जिसे अरुण लकड़ी से उठा रहे थे, इसी दौरान उन्हें करंट लग गया। अरुण को बचाने में मां और भतीजे की भी जान चली गई।
लाइन कटवाने के लिए ग्रामीणों ने 25 बार बिजली विभाग में फोन किया, पर किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। इस दौरान 10 मिनट तक तीनों तड़पते रहे।
मां ने बेटे को पकड़ रखा था, पास दूधमुंहे को गोद में लिए पत्नी खड़ी थी
ग्रामीण रोहन ने कहा, ‘करंट लगने की सूचना पर हमलोग मौके पर पहुंचे तो देखा शांति देवी ने अपने बेटे अरुण राम को पकड़ रखा है। बगल में अजीत राम पड़ा हुआ है।’
‘दूसरी तरफ अरुण की पत्नी रिंकू देवी भी खड़ी है। उनकी गोद में 3 महीने का बेटा अंशु है। रिंकू को समझ नहीं आ रहा था कि तीनों को तार से कैसे अलग करे। वो काफी कोशिश कर रही थी। इसी दौरान वो अपने बच्चे के साथ झुलसकर घायल हो गई थी।’
5 बच्चों के भविष्य की चिंता
NEWS4SOCIALकी टीम मृतकों के घर पहुंची तो एकसाथ तीन-तीन अर्थी सज रही थी। आसपास के घर और गांव की महिलाएं शोक में डूबी दिखीं। वहीं, मृतक की पत्नी रिंकू एक कोने में बैठी थी। उनसे बात करने की कोशिश की, पर वे सदमे में थी।
मृतक अरुण के 5 बच्चे हैं। उसकी बड़ी बेटी शिवानी 7 साल की है, सत्यम (5), निधि (3) और अंशु-अंशिका (दोनों जुड़वां) हैं।
ग्रामीण और परिवार ये ही चर्चा कर रहे थे कि पिता की मौत के बाद इन बच्चों का अब क्या होगा। इनका पोषण कैसे होगा। ये चिंता करते-करते कुछ लोग सरकार को भी कोष रहे थे।
मां-बेटे और भतीजे की मौत हो गई। अजीत की मां की भी करंट लगने से मौत हुई थी। (फाइल फोटो)
कार्रवाई नहीं हुई तो बिजली विभाग पर केस करेंगे
मृतकों के रिश्तेदार बोरम राम ने कहा, ‘मरने वाले मेरी बहन, भगना और पोता है। सरकारी फ्री में बिजली दे रही है, लेकिन विभाग के लोग सुनते नहीं हैं। सरकार का जो हिसाब है 4-4 लाख वो मुआवजा देना चाहिए। अरुण घर का इकलौता कमाने वाला था।’
‘अरुण के 5 बच्चे हैं। इस महंगाई में इनका लालन-पोषण कैसे होगा। सरकार जानलेवा काम करती है। स्टाफ सुनता नहीं है। सिर्फ सैलरी उठाते हैं। कार्रवाई होनी चाहिए। नहीं हुई तो हम लोग बिजली विभाग पर केस करेंगे।’
इसी जगह पर हुआ था हादसा। इसी बांस के टुकड़े से तार को हटाने की कोशिश की गई थी।
20 घरों में बिजली नहीं
ग्रामीण रोहन ने बताया कि शाम में कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर पूजा हो रही थी। इसी दौरान हल्ला हुआ लाला जी के परिवार को करंट लगा है। हमलोग मौके पर पहुंचे। लाइन कटवाने के लिए बिजली विभाग को फोन किया, पर किसी ने फोन नहीं उठाया।
जिसके बाद कुछ ग्रामीण तेजी से जूता पहनकर आए और प्लास से बिजली के तार के काटा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सोमवार को 20 घरों में लाइन नहीं है। तार की मरम्मत करने के लिए बिजली विभाग से कोई नहीं आया है।
पंचायत के पूर्व मुखिया विपिन कुमार सहनी ने कहा, ‘घटना के बारे में बिजली विभाग के सभी आला अधिकारी को जानकारी दी गई है। मैं भी अपने स्तर से सरकारी प्रावधानों के अनुरूप पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने का प्रयास करूंगा। घटना के बाद से मैं लगातार विभागीय अधिकारी के संपर्क में हूं।’
अजीत की मां की भी करंट से हुई थी मौत
मृतक अजीत की मां की भी दो साल पहले पटना में करंट से मौत हुई थी। अजीत अपने पिता अनिल राम और मां के साथ पटना में ही रहते थे। दो साल के अंतराल में अनिल राम का बेटा और पत्नी दोनों नहीं रहे। अजीत के भाई अभिषेक कुमार ने बताया कि हमें देखना के लिए अभी तक कोई नहीं आया है और न ही किसी तरह की सहायता मिली है।
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