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झांसी से गांव लौटे अधेड़ ने सल्फास खाकर दी जान: बेटा बोला-शहर में काम नहीं मिलने से परेशान थे तो पिता को घर बुला लिया था – Jhansi News

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झांसी से गांव लौटे अधेड़ ने सल्फास खाकर दी जान:  बेटा बोला-शहर में काम नहीं मिलने से परेशान थे तो पिता को घर बुला लिया था – Jhansi News

झांसी से गांव लौटे अधेड़ ने सल्फास खाकर दी जान: बेटा बोला-शहर में काम नहीं मिलने से परेशान थे तो पिता को घर बुला लिया था – Jhansi News

पिता के शव का पोस्टमॉर्टम कराने आया बेटा राम गोपाल (बीच में)

झांसी की टहरौली तहसील के रहने वाले अधेड़ ने सल्फास निगल कर जान दे दी। वह झांसी में रहकर मजदूरी करता था। लेकिन यहां जब काम नहीं मिला तो बेटे ने गांव वापस बुला लिया। इसके बाद वह गांव में ही दूसरे के खेत पर काम करने चला गया। वहां से लौटा तो हालत बिगड़ने ल

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टहरौली थाना क्षेत्र के गांव मड़ा डिलौली का रहने वाला 55 साल का सतानन्द अहिरवार पुत्र झुण्डु झांसी शहर में रहकर बेलदारी (मजदूरी) करता था। जबकि, उसकी पत्नी और बेटा गांव में ही थे। बेटे राम गोपाल ने बताया कि पिता को लंबे समय से झांसी में काम नहीं मिल रहा था तो ऐसे में उसने सोचा कि पिता वहां रहकर क्या करेंगे। उसने पिता को फोन कर घर आने को कहा तो सतानन्द अहिरवार सोमवार को सुबह टहरौली अपने गांव लौट गए। बेटे ने बताया कि घर में खाना खाने के बाद पिता घर में कहकर गए कि वह काम करने दूसरे की हार (खेत) में जा रहे हैं। वहां से वह शाम को घर लौटे तो उन्हें उल्टी होने लगी। इस पर बेटे तबियत के बारे में पूछा, जिस पर सतानन्द ने कहा कि कुछ नहीं हुआ है। बेटे ने दूसरी बार पूछा तो पिता ने बताया कि उन्होंने सल्फास की गोली खा ली है। इसके बाद बेटा उन्हें लेकर झांसी मेडिकल कॉलेज आया, जहां देर रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

बेटा बोला-अच्छे खासे थे, आत्महत्या क्यों कि पता नहीं

मृतक सतानन्द के बेटे रामगोपाल ने बताया कि जब वह झांसी से घर आए तो सामान्य ही लग रहे थे, उनके चेहरे पर भी कोई तनाव नहीं दिख रहा था। सभी ने साथ बैठकर खाना खाया और वह दोपहर में सोने के लिए दूसरे कमरे में चले गए। बेटे ने बताया कि पिता को किसी भी तरह का टेंशन नहीं था। हालांकि, थोड़ा काम नहीं मिलने को लेकर जरूर परेशान थे।

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एम्बुलेंस आने में हुई देर तो निजी गाड़ी से लाए

रम गोपाल अहिरवार ने बताया कि जैसे ही उसे पिता के सल्फास खाने की जानकारी हुई तो उसने मदद के लिए डायल 108 से एम्बुलेंस की सहायता मांगी। लेकिन वह समय से नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद वह निजी वाहन से ही उन्हें झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज लाया। यहां रात 12 बजे तक उनका इलाज चला लेकिन वह बच नहीं सके। बेटे ने बताया कि रास्ते में पिता ने ये भी बताया कि वह झांसी से सल्फास की एक गोली लाए थे। यहां पुलिस ने शव को लेकर पोस्टमॉर्टम कराया है।

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