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पंजाब भाजपा विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में: 17 जिलों के प्रधान नियुक्त, पूर्व विधायकों व दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को भी कमान – Punjab News

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पंजाब भाजपा विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में:  17 जिलों के प्रधान नियुक्त, पूर्व विधायकों व दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को भी कमान – Punjab News

पंजाब भाजपा विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में: 17 जिलों के प्रधान नियुक्त, पूर्व विधायकों व दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को भी कमान – Punjab News

पंजाब भाजपा प्रधान सुनील जाखड़ व वर्किंग प्रेसिडेंट अश्वनी शर्मा। (फाइल फोटो)

पंजाब भाजपा ने भी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में संगठन का विस्तार किया गया है। नए सिरे से जिला प्रधानों को चुना गया है। कई जिलों में तो पुराने प्रधान ही चुने गए हैं। कई पूर्व विधायकों व अन्य दलों से आए नेताओं को प्रधान

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अब तक चुने गए 17 प्रधान

डॉ. भूपिंदर सिंह चीमा प्रधान खन्ना, विजय कुमार कूका प्रधान पटियाला, हीरा वालिया बटाला, हरजोत कम मोगा, सरूप चंद सिंगला जिला प्रधान शहरी बठिंडा, अमरपाल सिंह बोनी जिला प्रधान अमृतसर देहाती, राजिंदर पाल शर्मा जिला प्रधान जगराओं, दमन बाजवा जिला प्रधान संगरूर-2, हरदीप सिंह गिल जिला प्रधान अमृतसर देहाती-2,

राजविंदर सिंह लक्की जिला प्रधान नवांशहर, बघेल सिंह बारिया जिला प्रधान गुरदासपुर, दीदार सिंह भट्टी जिला प्रधान फतेहगढ़ साहिब, गुरप्रीत सिंह मलूका जिला प्रधान बठिंडा देहाती, जसपाल सिंह जिला प्रधान पटियाला उत्तरी, सुरेश शर्मा जिला प्रधान पठानकोट व संजीव वशिष्ट जिला प्रधान मोहाली बने हैं।

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पार्टी का वर्किंग प्रधान नियुक्त होने के बाद अश्वनी शर्मा वर्करों से मिलते हुए। फाइल फोटो

पहले स्टेट वर्किंग प्रेसिडेंट का हुआ चयल

बीजेपी में सभी जिलों में नए सिरे से संगठन का विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में यह प्रक्रिया चल रही है। कुछ समय पहले पार्टी ने पठानकोट के विधायक अश्विनी शर्मा को पार्टी का राज्य वर्किंग प्रधान बनाया था। वहीं, उन्होंने अपने पहले ही भाषण में इरादे साफ कर दिए थे।

सीएम भगवंत मान की भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर वह सड़कछाप भाषा बोलेंगे, तो जवाब भी उसी में मिलेगा। इसके बाद उन्होंने सभी जिलों का दौरा किया था। इसके उपरांत यह जिला प्रधान नियुक्त किए गए हैं।

गठबंधन टूटने से दोनों को हुआ नुकसान

पंजाब में भाजपा और अकाली दल पहले मिलकर चुनाव लड़ते थे। दिल्ली में पारित तीन कृषि कानूनों के विरोध में चले किसान आंदोलन के दौरान भाजपा और अकाली दल का गठबंधन टूट गया। 2007 से 2017 तक दोनों पार्टियां लगातार दस वर्षों तक सत्ता में रहीं। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों को भारी नुकसान हुआ। भाजपा को केवल दो और शिरोमणि अकाली दल को तीन सीटें मिलीं।

इसके बाद 2024 में लोकसभा चुनाव हुए। इसमें अकाली दल को बठिंडा से एकमात्र सीट मिली। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल की बहू और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल ने जीती। वहीं भाजपा एक भी सीट नहीं जीत पाई।

हालांकि, इस चुनाव में भाजपा वोट प्रतिशत के मामले में तीसरे स्थान पर रही। पहले स्थान पर आम आदमी पार्टी, दूसरे पर कांग्रेस, तीसरे पर भाजपा और चौथे स्थान पर शिरोमणि अकाली दल रहा

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