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राजगढ़ के स्कूल की छत गिरने का खतरा: शिक्षक डरकर बोले- बच्चों को कमरे में नहीं बैठाऊंगा; पानी रोकने प्लास्टिक की पन्नी डाली – rajgarh (MP) News

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राजगढ़ के स्कूल की छत गिरने का खतरा:  शिक्षक डरकर बोले- बच्चों को कमरे में नहीं बैठाऊंगा; पानी रोकने प्लास्टिक की पन्नी डाली – rajgarh (MP) News

राजगढ़ के स्कूल की छत गिरने का खतरा: शिक्षक डरकर बोले- बच्चों को कमरे में नहीं बैठाऊंगा; पानी रोकने प्लास्टिक की पन्नी डाली – rajgarh (MP) News

राजगढ़ के स्कूल की छत गिरने का डर बना हुआ है।

राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्कूल की छत गिरने से 8 बच्चों की मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया। लेकिन यह केवल एक राज्य की त्रासदी नहीं है। राजस्थान सीमा से सटे मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के केलघटा गांव के स्कूल का नजारा भी डरावना है। यहां हादसा ह

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यहां एक सरकारी स्कूल मौत को दावत दे रहा है और यह सब शासन-प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है।

स्कूल के गाटर-पत्थर फरसी जर्जर केलघटा गांव का प्राथमिक विद्यालय करीब 20 साल पुराना है। छत गाटर-पत्थर और फारसी से बनी है, जो अब पूरी तरह से जर्जर हालत में है। कक्षा 1 से 5 तक के केवल 10 बच्चे रोज़ इसी जर्जर छत के नीचे बैठकर पढ़ाई करते हैं। बारिश होती है तो पानी ऊपर से टपकता है और दिल नीचे से कांपता है।

स्कूल में पदस्थ शिक्षक भगवान सिंह बासोदिया खुद छत की मरम्मत में जुटे हैं सरकार की लापरवाही को ढकने के लिए उन्होंने छत पर प्लास्टिक की पन्नी बिछा दी है, उस पर पत्थर रखे हैं, ताकि बारिश का पानी बच्चों पर न गिरे।

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स्कूल की बिल्डिंग की हालत काफी खराब हैं। कभी भी गिरने का डर रहता है।

​​​​​अब बच्चों को कमरे में नहीं बैठाऊंगा शिक्षक भगवान सिंह ने राजस्थान के हादसे की खबर सुनी तो उन्होंने कहा स्कूल की जर्जर स्थिति की जानकारी पहले ही वरिष्ठ अधिकारियों को मेरे द्वारा दे दी गई है । आज जब उन्होंने राजस्थान में हुए हादसे की खबर सुनी तो उनके मन में भी डर बैठ गया है। उन्होंने कहा कि अब वे बच्चों को स्कूल भवन के अंदर नहीं बैठाएंगे।

छत की हालत ऐसी कि तस्वीरें भी डर जाएं छत से पानी टपकता है, दीवारें कुछ जगह से उखड़ी हैं, और बारिश के मौसम में क्लासरूम का फर्श पूरा गीला रहता है। गांव वालों का कहना है कि स्कूल की यह बिडिंग 20 साल पुरानी है, बिल्डिंग बिल्कुल खत्म हो चुकी है अंदर पानी जाता है, राजस्थान में जिस जगह हादसा हुआ है, वहां यहां से 15 से 20 किलोमीटर दूर है, वहां हादसा होने के बाद हम सबके मन में डर बना हुआ है।

हमारे गांव मे अब स्कूल का नया भवन बनना चाहिए, तब तक हमने बोल दिया कि बच्चों को हमारे घर के बाहर दालान में पढ़ाओ। इसी स्कूल की तीसरी क्लास में पढ़ने वाली निशा ने बताया कि हमारे स्कूल का भवन जर्जर हो चुका है, इसलिए हमें स्कूल में डर लगता है।​​​

क्लास में बैठकर शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हुए।

प्रशासन का जवाब: 239 स्कूल जर्जर, प्रस्ताव भोपाल भेजा है इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी करण सिंह भिलाला ने कहा कहा राजगढ़ जिले में 239 स्कूल जर्जर स्थिति में हैं। मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कर आज ही भोपाल भेजा गया है। हमने शिक्षकों से कहा है कि जर्जर भवनों में स्कूल न लगाएं और वैकल्पिक इंतजाम व्यवस्था करें। यदि कहीं ऐसे भवन में पढ़ाई हो रही है तो मैं तत्काल जानकारी लेकर कार्रवाई करूंगा।

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