गोरखपुर के वैज्ञानिक की खोज: घर होगा ठंडा, बिजली का बिल आएगा कम; MMUT के प्रोफेसर का रिसर्च – Gorakhpur News h3>
गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय टेक्निकल यूनिवर्सिटी के डॉ. एस. पी. सिंह और उनकी टीम ने दो अहम वैज्ञानिक शोध किए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय पत्रिका Scientific Reports – Nature में प्रकाशित हुए हैं।
.
पहला शोध – मैग्नीशियम ऑक्साइड नैनो-कणों पर नया खुलासा
डॉ. सिंह ने खास “क्वांटम डॉट्स” (10 नैनोमीटर से भी छोटे कण) को प्लास्टिक जैसी फिल्म (PMMA) में मिलाया। उच्च तापमान (130 डिग्री सेल्सियस) पर भी ये छोटे कण आपस में जुड़ गए – यह पहले नहीं देखा गया था। इस प्रक्रिया में “वांडर वॉल्स बल” जैसे कमजोर समझे जाने वाले बलों की बड़ी भूमिका सामने आई।
इससे यह साबित हुआ कि इन कमजोर बलों से भी ठोस और टिकाऊ नैनो-स्ट्रक्चर बनाए जा सकते हैं।
दूसरा शोध – नीम और गुलमेहंदी (रोजमेरी) के अर्क से कार्बन के क्वांटम डॉट्स बनाए
डॉ. सिंह की टीम ने एक दूसरा शोध भी किया जिसमें उन्होंने नीम और गुलमेहंदी (रोजमेरी) के अर्क से कार्बन के क्वांटम डॉट्स बनाए और उनसे एंटीफंगल नैनो कोटिंग्स तैयार कीं।
नीम और गुलमेहंदी (रोजमेरी) के अर्क से कार्बन के क्वांटम डॉट्स बनाए गया
डॉ. एस. पी. सिंह और उनकी टीम
इनका परीक्षण गोरखपुर एम्स की टीम ने किया और पाया कि ये कृत्रिम नैनो संरचनाओं (जैसे जिंक ऑक्साइड) से भी अधिक प्रभावशाली हैं। यह खोज आयुर्वेद और जैव-प्रौद्योगिकी के मेल का बेहतरीन उदाहरण है। नीम और रोजमेरी (गुलमेहंदी) के रस से कार्बन क्वांटम डॉट्स बनाए गए। इनसे बनी सतहों ने कृत्रिम रसायनों से भी बेहतर एंटीफंगल असर दिखाया।
यह काम आयुर्वेद और विज्ञान का मेल है, जिससे बिना हानिकारक केमिकल के असरदार दवाएं या लेप बनाए जा सकते हैं।
जनता और पर्यावरण को क्या लाभ मिलेगा?
पर्यावरण-सुरक्षित तकनीक
नीम व गुलमेहंदी से बने नैनो-कण रासायनिक कीटनाशकों का विकल्प बन सकते हैं।
इससे पर्यावरण में केमिकल की मात्रा घटेगी और प्रकृति को नुकसान कम होगा
पर्यावरण को मिलेगा फायदा
टिकाऊ और सस्ते UV-प्रूफ कांच
इन तकनीकों से बने पारदर्शी कांच न केवल हल्के और मजबूत होंगे, बल्कि UV किरणों से भी बचाव करेंगे। इन्हें घरों, गाड़ियों की खिड़कियों, किचन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगाया जा सकेगा।
इससे गर्मी में घर ठंडा रहेगा और बिजली की खपत घटेगी – ऊर्जा की बचत होगी।
संक्रमण-रोधी कपड़े और मास्क
बनाए गए एंटीफंगल नैनो-कण संक्रमण से लड़ने में मदद करेंगे। अस्पतालों, स्कूलों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण से सुरक्षा बढ़ेगी।
ये नैनो-कोटिंग्स कम साइड इफेक्ट वाले, असरदार और प्राकृतिक होंगे।
नई दवाएं – कम साइड इफेक्ट, तेज असर
नैनो तकनीक से आयुर्वेद और एलोपैथिक दवाओं की सही डोज तय करने में मदद मिलेगी।
इससे मरीजों को तेज और सटीक इलाज मिल सकेगा।
क्यों है यह शोध खास?
यह शोध भौतिकी के क्षेत्र में नया वैज्ञानिक ज्ञान जोड़ता है। यह भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद) को वैज्ञानिक मान्यता देता है।
यह एक हरित और टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ने का संकेत है।



