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संसद की सुरक्षा में चूक, कहां कमजोर पड़ा केस: 18 महीने बाद दो आरोपियों को जमानत, वकील बोले- राजद्रोह साबित नहीं कर पाई पुलिस

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संसद की सुरक्षा में चूक, कहां कमजोर पड़ा केस:  18 महीने बाद दो आरोपियों को जमानत, वकील बोले- राजद्रोह साबित नहीं कर पाई पुलिस

संसद की सुरक्षा में चूक, कहां कमजोर पड़ा केस: 18 महीने बाद दो आरोपियों को जमानत, वकील बोले- राजद्रोह साबित नहीं कर पाई पुलिस

‘पीला धुआं निकालने वाले कैनिस्टर (स्मोक कैन) बाजार में खुलेआम बिकते हैं। ये होली, शादी और बाकी सेलिब्रेशन में इस्तेमाल किए जाते हैं। फिर इसका इस्तेमाल करना UAPA (राजद्रोह) लगाने का आधार कैसे हो सकता है। पहली नजर में इन पर जो भी आरोप लगाए गए हैं, वो र

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13 दिसंबर 2023 को संसद की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया। कोर्ट के ऑर्डर की ये लाइनें मामले के दो आरोपी हरियाणा की नीलम आजाद और राजस्थान के महेश कुमावत की जमानत का आधार बनीं। दोनों आरोपी करीब 18 महीने बाद 8 जुलाई, 2025 को जेल से बाहर आए। हालांकि, दोनों की जमानत पर कोर्ट ने कुछ शर्तें भी जोड़ी हैं।

नीलम के वकील बलराज मलिक और महेश कुमावत के वकील सोमार्जुन भी इस मामले में राजद्रोह लगने का कोई आधार नहीं मानते। बलराज कहते हैं, ‘कोर्ट ने हमारा तर्क माना। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणी से हमें उम्मीद है कि बाकी बंद 4 आरोपियों को भी जल्द जमानत मिलेगी। सभी के ऊपर से UAPA भी हटेगा।’

सोमार्जुन इस घटना के मास्टरमाइंड कहे जा रहे मनोरंजन डी के भी वकील हैं। वे कहते हैं, ‘मनोरंजन कोई मास्टरमाइंड नहीं, बल्कि सामान्य युवक है। ये सभी किसी साजिश की नीयत से नहीं बल्कि अपने मुद्दे उठाने के लिए बस प्रोटेस्ट करना चाहते थे।’

कोर्ट का डॉक्यूमेंट जिसमें कहा गया कि सिर्फ पीले धुएं वाले कैनिस्टर्स के इस्तेमाल से पहली नजर में कोई आपराधिक केस नहीं बनता है।

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संसद की सुरक्षा में सेंध के मामले में UAPA का आधार क्यों कमजोर पड़ा और पुलिस राजद्रोह के आरोप क्यों साबित नहीं कर पाई, हमने इसे दोनों आरोपियों के वकीलों से बात कर समझा। साथ ही नीलम के भाई से भी बात की।

भाई बोले- नीलम को देखते ही रो पड़े नीलम के भाई रमेश ने बताया, ’हमें पता चला था कि नीलम तिहाड़ के गेट नंबर 4 से बाहर आएगी, लेकिन वो 6 नंबर गेट से निकली। हमारे आधे घंटे तो इस गेट से उस गेट तक भागकर पहुंचने में ही निकल गए। उसे जैसे ही देखा हम सब रो पड़े। नीलम भी रो रही थी।’

वे आगे कहते हैं, ’हमें पहले ही कह दिया गया था कि रिहाई के वक्त न तो नीलम की फोटो लें न वीडियो बनाएं। उसके बारे में किसी से बात करने पर पूरी तरह रोक है।’

दिल्ली में नीलम के लिए किराए पर फ्लैट लिया कोर्ट के आदेश के कारण नीलम घर नहीं जा सकती है। इसलिए दिल्ली में ही किराए के फ्लैट में रहेंगीं। उनके साथ उनकी मां और बड़ा भाई भी दिल्ली में ही रहेगा। भाई ने बताया, ’दिल्ली में रहना हमारे लिए बहुत महंगा है। फ्लैट का किराया 9,500 रुपए है। तीन लोगों के रहने और खाने का खर्च कम से कम 3-4 हजार होगा। पुलिस स्टेशन में हफ्ते में 3 बार हाजिरी का मतलब आने-जाने का किराया भी 1 से 2 हजार होगा ही।’

वे आगे कहते हैं, ’अभी तो फिलहाल जरूरी ये था कि नीलम बाहर आए। अब हम अपने वकील से बात करके इस पर भी एक पिटीशन डालेंगे कि नीलम को जल्द से जल्द घर जाने की परमिशन मिले।’

अब कोर्ट के ऑर्डर की 4 मुख्य बातें… 1. स्मोक कैनिस्टर से आरोपी अपराधी साबित नहीं होते कोर्ट ने स्मोक कैनिस्टर की FSL रिपोर्ट देखी और कहा- ‘अभी कोर्ट इस रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं करती। रिपोर्ट में कहा गया कि कैनिस्टर विस्फोटक का काम कर सकते थे। मौजूदा घटना में संसद से ली गई जानकारी में किसी नुकसान की बात सामने नहीं आई है।’

‘सिर्फ रंगीन धुएं वाले कैनिस्टर्स के इस्तेमाल से पहली नजर में कोई आपराधिक केस नहीं बनता है। हालांकि, कैनिस्टर विस्फोटक के तौर पर काम कर सकते थे या नहीं, ये कोर्ट ट्रायल का विषय है। कोर्ट ने ये भी कहा कि कैनिस्टर्स में खतरनाक रसायन होने की आशंका ये सवाल खड़े करती है कि फिर ये बाजारों में खुलेआम कैसे बिक रहे हैं।’

स्मोक कैन के इस्तेमाल को लेकर कोर्ट ने कहा कि अगर ये इतना खतरनाक है तो खुलेआम बाजारों में कैसे बिक रहा है।

2. नीलम संसद से और कुमावत दिल्ली से बाहर था 13 दिसंबर 2023 को घटना के वक्त आरोपी नीलम संसद के अंदर नहीं थी। उसने कैनिस्टर से पीला धुआं छोड़ा, लेकिन संसद के बाहर। दूसरा आरोपी महेश कुमावत घटना के वक्त संसद के आसपास भी नहीं था। इसलिए दोनों अभी जमानत के हकदार हैं। पुलिस की जांच में भी सामने आया है कि नीलम ने खुद संसद में जाने से मना किया था। वहीं महेश इस ग्रुप की आखिरी की दो मीटिंग में भी मौजूद नहीं था।

3. जांच रिपोर्ट में ऐसा तथ्य नहीं जो दोनों आरोपियों को UAPA के दायरे में लाए आरोपियों से जब्त पर्चे या कोर्ट में मौजूद इनके बाकी रिकॉर्ड में भी कुछ ऐसा नहीं मिला है, जिससे साबित होता हो कि आरोपी देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को खतरे में डालने का इरादा रखते थे। न ही ये साबित होता है कि आरोपियों ने आतंक फैलाने के इरादे से ये काम किया।

UAPA की धारा-15 या 18 को साबित करने वाला रिकॉर्ड में कोई भी तर्क नहीं है। साथ ही ये भी साबित नहीं होता है कि इस घटना का प्रभाव देश या देश के बाहर किसी वर्ग के मन में आतंक पैदा करना है।

4. संसद पर हमले और प्रोटेस्ट की तारीख एक होना UAPA का आधार नहीं ये मामला विरोध और राजनीतिक असहमति का लगता है। भले ही विरोध करने का तरीका और जगह गलत है। वकीलों और पुलिस की चार्जशीट में प्रोटेस्ट की तारीख को लेकर काफी तर्क दिए गए हैं। 2001 में 13 दिसंबर को ही संसद पर आतंकी हमला हुआ था। 2023 में 13 दिसंबर को ही ये घटना भी हुई।

इस पर कोर्ट ने कहा कि संसद पर हमले और इस घटना की तारीख का एक होना ट्रायल का विषय है। इससे ये तय नहीं होता कि आरोपियों पर UAPA लगना चाहिए और उन्हें बेल नहीं दी जा सकती।

अब जानिए आरोपियों के वकील क्या कह रहे… नीलम के वकील बोले- पुलिस UAPA का आधार साबित नहीं कर पाई सबसे पहले हम नीलम आजाद के वकील बलराज मलिक से मिले। वे कहते हैं, ‘जिला कोर्ट से बेल रिजेक्ट हो गई। फिर हाईकोर्ट में भी हमें ये समझाने में महीनों लग गए कि केस UAPA का नहीं है। आप ही सोचिए जो कैनिस्टर AMAZON पर खुलेआम बिकता है। जिसका इस्तेमाल फिल्म इंडस्ट्री में रोमांस दिखाने के लिए होता है, भला वो जहरीला कैसे हो सकता है। वो राजद्रोह जैसे अपराध का आधार कैसे बन सकता है।’

वे आगे कहते हैं, ‘आखिरकार कोर्ट ने पुलिस से वही सवाल पूछे जो हम जिला कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक पूछते आ रहे हैं।’

एडवोकेट मलिक पुलिस के लगाए गए आरोपों पर कहते हैं, ‘इस देश का दुर्भाग्य है कि पुलिस का इतना अमानवीय रूप सामने आ रहा है। पहली जरूरत है कि पुलिस मानवीयता न खोए और संविधान के दायरे में रहकर काम करे।’

उन्होंने कोर्ट के ऑर्डर को सराहते हुए कहा, ‘जज बार-बार पुलिस के IO और सरकारी वकीलों से पूछ रहे थे कि इस केस में UAPA का आधार क्या है। सरकारी वकीलों के पास संसद की सर्वोच्चता के बखान के अलावा कोई तर्क नहीं था। वे बार-बार यही जवाब दे रहे थे कि माननीय ये मामला देश की संसद की सुरक्षा में सेंध का है। ये लॉ एंड ऑर्डर के खिलाफ है।’

‘मैंने कोर्ट में पुलिस और सरकारी वकीलों के इस तर्क पर जवाब दिया। मैंने कहा कि ये संसद इस देश के लोगों की है। ये बच्चे देश की संसद के अंदर अपराध करने नहीं गए थे बल्कि संसद को उसका काम याद दिलाने गए थे। ये रोजगार मांगने गए थे। देश के खिलाफ साजिश रचने नहीं गए थे।’

संसद की सुरक्षा में सेंध के आरोपियों ने इस जगह को अपने हक की आवाज उठाने के लिए चुना, न कि कोई साजिश रचने के लिए।

महेश के वकील बोले- ‘संसद’ के कोर्ट में दिए जवाब से मिली बेल महेश कुमावत के वकील सोमार्जुन कहते हैं, ‘कोर्ट ने संसद से पूछा था कि क्या कैनिस्टर से लोकसभा या राज्यसभा के किसी सदस्य को नुकसान पहुंचा। या फिर किसी तरह का दूसरा कोई नुकसान हुआ? संसद ने लिखित में जवाब दिया कि सारे सदस्य सुरक्षित हैं। किसी को कोई इंजरी नहीं हुई है। न ही संसद में किसी प्रॉपर्टी को कोई नुकसान पहुंचा है।’

वे आगे कहते हैं, ‘महेश को तो बिना किसी आधार के आरोपी बनाया गया। उसे बहुत पहले ही बेल मिल जानी चाहिए थी। वो मौके पर भी नहीं था। जब महेश की लोकेशन ट्रेस की गई तो वो राजस्थान की मिली। वो इस घटना से पहले हुई आखिरी की दो मीटिंग में भी शामिल नहीं हुआ था।’

आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा-15 या 18 को साबित करने वाला रिकॉर्ड में कोई तर्क नहीं है।

21 जुलाई को इस केस की सबसे अहम सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में 21 जुलाई को इस केस के मास्टरमाइंड कहे जाने वाले मनोरंजन और सागर शर्मा की याचिका पर सुनवाई है। ये दोनों आरोपी इस केस में सबसे अहम हैं। ये दोनों संसद के भीतर थे और प्लानिंग में शुरू से इन्वॉल्व थे। जांच रिपोर्ट के मुताबिक मनोरंजन डी ने प्लान बनाया था तो पूरी टीम का रिक्रूटर्स सागर शर्मा था।

घटना के वक्त कौन-कहां था, किस आरोपी को क्या जिम्मेदारी मिली थी? 1. कर्नाटक के रहने वाले मनोरंजन डी को केस का मास्टरमाइंड बताया गया है। घटना के वक्त वो संसद के अंदर लोकसभा वेल के बिल्कुल करीब था। उसने कैनिस्टर से पीले रंग का धुआं किया था।

2. सागर शर्मा भी संसद के अंदर वेल के बिल्कुल करीब था। उसने भी कैनिस्टर का इस्तेमाल किया।

3. नीलम आजाद और अमोल शिंदे संसद के अंदर नहीं गए थे, वे बाहर ही गेट नंबर 2-3 पर मौजूद थे। इन्होंने भी कैनिस्टर से धुआं किया और पैम्फलेट फेंके।

4. इन चारों ने घटना के पहले अपना फोन फॉर्मेट कर दिया था। सभी ने सिम कार्ड तोड़ने के बाद ललित झा नाम के पांचवें आरोपी को अपने फोन सौंपे थे ताकि वो इन्हें जला दे।

5. महेश कुमावत नाम का युवक इन पांचों के साथ शुरुआती प्लानिंग का हिस्सा था, लेकिन आखिरी दो मीटिंग में शामिल नहीं हुआ। घटना के वक्त वो राजस्थान में था।

UAPA जैसे एक्ट के लिए पुलिस के पास आधार 1. पुलिस ने मनोरंजन डी और सागर शर्मा को इस साजिश का मेन पिलर माना। पुलिस की रिपोर्ट में मनोरंजन को मास्टरमाइंड बताया गया है। उसका ईमेल फार्मेट करना भी शक के घेरे में है। बचे हुए मेल से मनोरंजन की कंबोडिया यात्रा और फिर चेन्नई से लद्दाख तक बाइक यात्रा की डिटेल मिली है, इसे भी साजिश से जोड़ा गया है।

मनोरंजन के मेल से मिले बाइक यात्रा के मेमोयर (संस्मरण) को मार्क्सवादी क्रांतिकारी ‘चे ग्वेरा’ की मोटरसाइकिल डायरी से जोड़कर देखा गया। इसे भी साजिश का हिस्सा बताया गया।

2. मनोरंजन के मेमोयर में एक चाइनीज नागरिक ली रॉन्ग का भी जिक्र है। रिपोर्ट में इसे मनोरंजन के विदेशी कनेक्शन से जोड़ा गया है।

3. सागर शर्मा 2015 में भगत सिंह क्लब में मनोरंजन के संपर्क में आया। तभी मनोरंजन ने उससे संसद में कुछ करने की बात कही थी।

4. सागर और मनोरंजन ने बाकी लोगों की तलाश शुरू की। फरवरी 2022 में मनोरंजन और सागर ने सिग्नल एप पर एक ऑनलाइन मीटिंग की।

5. मनोरंजन ने ये घटना कोसोवो देश में 2018 में संसद पर हुए ऐसे ही एक घटनाक्रम का वीडियो देखकर अंजाम दी।

6. मनोरंजन ने संसद में एंटी फायर जेल लगाकर आत्मदाह करने का भी आइडिया दिया था, जो कैंसल हो गया।

7. मनोरंजन ने ही पार्लियामेंट का स्केच बनाया था।

8. पहले इस ग्रुप में दो और लोग पार्थ गोहिल और मनदीप शामिल थे। बाद में दोनों ने ग्रुप छोड़ दिया था।

9. सागर ने कैनिस्टर खरीदे।

10. मोबाइल में खालिस्तानी आतंकवादी पन्नू की स्पीच का लिंक पाया गया।

चार्जशीट में कहां कमजोर पड़ी पुलिस? UAPA का मकसद गैरकानूनी गतिविधियों और आतंकवादी गतिविधियों को रोकना है। हालांकि इस मामले की जांच रिपोर्ट में पुलिस राजद्रोह जैसे अपराध के लिए मजबूत आधार पेश नहीं कर पाई।

कोर्ट में पेश संसद के डॉक्यूमेंट ने जांच रिपोर्ट को कमजोर किया 1. संसद ने कोर्ट में पेश लिखित डॉक्यूमेंट में साफ कहा है कि संसद के किसी मेंबर या प्रॉपर्टी को नुकसान नहीं पहुंचा है। इस रिपोर्ट ने पुलिस के इस तर्क को धराशायी कर दिया कि आरोपियों ने कोई बड़ी साजिश की थी क्योंकि अगर ये बड़ी साजिश होती तो आरोपी वो कैनिस्टर लेकर अंदर नहीं जाते, जो बाजार में आसानी से मिल जाता है।

2. कोर्ट ने भी कहा कि पूरे मामले को देखने के बाद यही लगता है कि ये लोग प्रोटेस्ट के मकसद से संसद में गए थे न कि किसी साजिश के लिए। हां प्रोटेस्ट का तरीका और जगह दोनों गलत थे।

3. FSL रिपोर्ट कहती है कि कैनिस्टर में मौजूद रसायन से विस्फोट हो सकता था। कोर्ट ने इस आशंका को भी बेरोकटोक कैनिस्टर की उपलब्धता के तर्क से खारिज कर दिया।

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