वैशाली में एक लड़की का कंकाल मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। गोरौल थाना क्षेत्र के पिड़ापुर मथुरा निवासी विरचंदर सिंह ने कंकाल की पहचान अपनी लापता बेटी साजन कुमारी (20) के रूप में की। इस संबंध में परिजनों ने न सिर्फ थाना की पुलिस पर लापरवाही करने का आरोप लगाया है, बल्कि पुलिसिया तंत्र की सड़े गले सिस्टम को भी उजागर किया है।
वह दिन ही था मनहूस
आईये अब NEWS4SOCIALआपको पुलिस की लापरवाही और संवेदनहीनता की कहानी बताता है। साजन कुमारी भगवानपुर स्थित एलएन कॉलेज की स्नातक (तृतीय खंड) की छात्रा थी। वह 27 मई का मनहूस दिन था, जब वह अपना एडमिट कार्ड लाने घर से निकली थी। बात दिन से दोपहर और दोपहर से शाम और फिर शाम से रात हो गई, लेकिन साजन कुमारी अपने घर वापस नहीं लौटी। देर रात तक परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पूरी रात घर के सभी सदस्य पूरे गांव का चप्पा चप्पा छान लिया लेकिन बेटी का कोई सुराग नहीं मिला। अब बस सहारा बचा था पुलिस का।
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थाना से थाना और एसपी कार्यालय से कोर्ट की चौखट तक किया मैराथन दौड़
अगले दिन परिजन बेटी के लापता होने की रिपोर्ट देने गोरौल थाना पहुंचे, लेकिन उस बेशर्म पुलिस वालों ने उन्हें यह कहकर भगवानपुर थाना भेज दिया कि घटनास्थल यहां नहीं वहां है। परिजन फिर भगवानपुर थाना पहुंचे, वहां यह कहकर लौटा दिया गया कि उसका घर गोरौल थाना क्षेत्र में पड़ता है। चूंकि घर से निकलने के बाद लड़की लापता हुई है, इसलिए कायदे से घटनास्थल भगवानपुर नहीं, बल्कि गोरौल होगा। इसलिए गुमशुदगी का मामला भगवानपुर नहीं, बल्कि गोरौल में दर्ज होगा। क्षेत्र का ज्ञान देते हुए दोनों थाना में से किसी भी थाना में मामला दर्ज नहीं हो पाया। तब परिजन थक-हारकर 14 दिनों ने बाद 11 जून को एसपी कार्यालय पहुंचा, लेकिन आश्चर्य मत कीजिये, यहां भी परिणाम शून्य ही रहा। तब पीड़ित पक्ष ने कोर्ट का सहारा लिया और फिर कोर्ट ने भगवानपुर थाना के नाम एक नोटिस जारी किया, लेकिन ताज्जुब अभी भी मत कीजिये। थाना ने फिर भी नहीं सुना।
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पुलिस ने नहीं, प्रकृति ने बताया कहां दबा है शव
एक यथार्थ यह भी है कि जब कोई कुछ नहीं सुनता है तो प्रकृति जरुर सुनती है। तेज हवा से शव का दुर्गंध आसपास गुजरने वाले लोगों को मिला। अब लड़की के लाप्त्य होने की खबर के साथ-साथ खेतों में हो रहे दुर्गंध की भी चर्चा होने लगी। फिर क्या था, परिजन दुर्गंध का पीछा करते करते एक मकई के खेत में पहुँच गये और वहां जमीन खोदना शुरू कर दिया। कुछ ही जमीन खोदा था, कुछ ही देर में बेटी भी मिल गई, लेकिन जिंदा नहीं, शव भी नहीं बल्कि कंकाल के रूप में। ग्रामीणों ने पुलिस को खूब भला-बुरा कहा। अब बेशर्म पुलिस ने मामला दर्ज किया। पुलिस अब परिजन को जांच करने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन क्या फायदा बेटी तो जिन्दा वापस होगी नहीं।
अब पुलिस की दलील भी जान लीजिये
महुआ डीएसपी कुमारी दुर्गा शक्ति का कहना है कि शव का अवशेष देखने से ऐसा लगता है कि 20-25 दिन पहले की यह घटना है। पूरे मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। वहीं सदर अनुमंडल के डीएसपी 2 गोपाल मंडल यह दलील दे रहे हैं कि हमारे संज्ञान में यह मामला अभी आया है। पूरे मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।