कब्रिस्तान में रह रहे लोग, 8 दिन से भूखे: रोज बच्चों को मरते देख रहे, बोले- गाजा में पैदा हुए, क्या ये गलती है h3>
एक मैदान में सफेद कपड़े से बने छोटे-छोटे कई टेंट हैं। टेंट में भूख से बिलखते बच्चे हैं और पानी तक के लिए तरसते लोग। आसपास ऊंची-ऊंची बिल्डिंग हैं, लेकिन सब तबाह हो चुकी हैं। ये जगह 20 महीने से इजराइल की बमबारी झेल रही गाजा पट्टी के साउथ में है।
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यहीं बना एक टेंट अब घालया अबू जाराद का घर है। इजराइल के हमले से पहले घालया नॉर्थ गाजा के बेत लाहया में रहती थीं। अच्छी जिंदगी चल रही थी, तभी हमास के अटैक के बाद इजराइल ने गाजा पर बमबारी शुरू कर दी।
घालया परिवार के साथ जान बचाकर साउथ गाजा आ गईं। जान तो बच गई, लेकिन जिंदगी जहन्नुम से भी बदतर हो गई। घालया के 4 बच्चे हैं। सबसे छोटा सिर्फ 2 महीने का है। घालया कहती हैं, ‘8 दिन हो गए, कुछ नहीं खाया। फल तो आखिरी बार कब देखे थे, याद ही नहीं है। बच्चे भूख से मर रहे हैं।’
घालया की तरह गाजा के 4.7 लाख लोग भुखमरी झेल रहे हैं। ये कुल आबादी का 20% है। फिलिस्तीन हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 से चल रही इस जंग में 57,575 लोग मारे गए। 1.37 लाख घायल हैं।
यूनाइटेड नेशंस ने आशंका जताई है कि गाजा में मरने वालों की तादाद ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई लाशें मलबे में दबी हैं। 90% आबादी घर छोड़कर रिलीफ कैंप में रह रही है। ऐसे भी लोग हैं जो कैंप में जगह न मिलने से सड़कों पर या कब्रिस्तान में रह रहे हैं।
इजराइली ऑपरेशन की वजह से गाजा में बाहरी मीडिया को जाने की परमिशन नहीं है। ईरान से जंग के दौरान इजराइल में कवरेज करते हुए हम गाजा में दाखिल नहीं हो पाए। हमने गाजा के जर्नलिस्ट आमरे अल सुल्तान से बात की। उनके जरिए हम आपको गाजा का हाल बता रहे हैं।
ये गाजा के जर्नलिस्ट आमरे अल सुल्तान हैं। इन्हीं के जरिए हम गाजा के लोगों की कहानियां जान पाए।
गाजा में न बिजली, न मोबाइल नेटवर्क गाजा में बिजली सप्लाई बंद होने से फोन और कैमरा चार्ज करने में दिक्कत आ रही है। मोबाइल नेटवर्क भी बीच-बीच में काम करना बंद कर देता है। ऐसे में वहां जर्नलिस्ट से कॉन्टैक्ट कर पाना भी मुश्किल है।
11 अक्टूबर, 2023 को इजराइल ने नॉर्थ गाजा में रहने वाले 11 लाख लोगों को 24 घंटे में साउथ गाजा की तरफ जाने के लिए कह दिया था। नॉर्थ गाजा अब खाली हो चुका है। यहां के लोग अपने देश में ही शरणार्थी हो गए। वे रिफ्यूजी कैंप में रहते हैं। इसे भी बार-बार छोड़ना पड़ता है।
फोटो 9 जुलाई की है। गाजा के ओल्ड मार्केट में इजराइल ने एयर स्ट्राइक की। इससे मार्केट में आग लग गई।
नॉर्थ गाजा के बाद साउथ गाजा के खान यूनिस और राफाह को भी असुरक्षित बता दिया गया। लोगों को गाजा के समुद्री छोर पर बसे अल-मवासी में शिफ्ट होने के लिए कह दिया गया।
गाजा में हमारे सहयोगी आमरे अल सुल्तान ने साउथ गाजा के रिफ्यूजी कैंप में और रिलीफ सेंटर के आसपास रहने वाले लोगों से बात की। पढ़िए ऐसे चार लोगों की कहानियां, जो जंग के 20 महीनों के गवाह हैं।
हिशाम खालिद अल-मुगराबी की आपबीती इजराइल ने गाजा पर हमला किया, तब मैं परिवार के साथ गाजा सिटी में रहता था। घर में पत्नी थी, बच्चे थे। सब ठीक चल रहा था। तभी इजराइल ने युद्ध शुरू कर दिया। इजराइली बमों ने आसपास के घरों को मलबे में बदल दिया। उनसे लाशें निकल रही थीं। इजराइल की सेना बुलडोजर लेकर आई और उसी जगह लाशों को दबा दिया।
शुरुआत में तो हमने घर नहीं छोड़ा, लेकिन बमबारी तेज होने लगी, तो आखिर घर छोड़ना पड़ा। हम पैदल साउथ गाजा के डेर-अल-बलाह आ गए। कोई गाड़ी नहीं चल रही थी। सिर्फ खच्चर गाड़ी मिल रही थी। वो भी सिर्फ कुछ लोगों को ही नसीब हुई।
घर छोड़ने के बाद जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई। पिछले साल 28 अगस्त को मेरे बच्चे की मौत हो गई। हम बचने के लिए घर से भागे थे, लेकिन इजराइल की बमबारी ने मेरे बेटे को छीन लिया। हमारे पास रहने के लिए जगह नहीं है। मैं परिवार के साथ कब्रिस्तान में रह रहा हूं। यहां आसपास कुत्ते घूमते हैं। सांप निकलते हैं। जहन्नुम से भी खराब हालात हैं।
घालया अबू जाराद की आपबीती मैं 4 बच्चों की मां हूं। छोटा बच्चा सिर्फ 2 महीने का है। 8 दिन से हमने कुछ नहीं खाया है। हमारे पास पहनने के लिए कपड़े नहीं हैं। एक जोड़ी कपड़े लेकर घर छोड़ा था। वे भी फट गए। कपड़े धोने के लिए पानी नहीं है। पानी इतना महंगा है कि एक घूंट पीने के लिए भी सोचना पड़ रहा है।
पहले दिन में एक बार खाना मिल जाता था। अब वो भी नहीं मिल रहा। जिंदा रहने के लिए हमें खाना, रहने की जगह और पानी तो चाहिए ही होगा।
मैंने कोई फल आखिरी बार कब देखा था, याद भी नहीं है। इजिप्ट बॉर्डर पर चेक पॉइंट बंद हैं। हर कोई झूठ बोल रहा है। सच ये है कि हम तक खाना या मदद नहीं पहुंच रही है। कभी-कभार ही ऐसा होता है कि दिन में एक बार खाना मिल पाता है।
आला अबू खादेर की आपबीती आला अबू खादेर खाना मिलने वाली जगह पर खड़ी थीं। कई घंटे हो गए, लेकिन कोई खाना देने नहीं आया। वे बताती हैं-
मैं यहां अपने लिए नहीं, बच्चों के लिए खाना लेने आई हूं। मैं तो भूख बर्दाश्त कर लेती हूं, बच्चे कैसे करेंगे। हमारे पास खाना खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। घर पर खाना बनाने के लिए आटा नहीं है। कम से कम मुस्लिम देशों को तो हमारी मदद करनी चाहिए। हमारी परेशानी दूर करने के लिए कोशिश करनी चाहिए। 20 महीने हो गए ये सब झेलते-झेलते। इससे तो मौत अच्छी है।
गर्मी का मौसम है, टेंट भट्टी की तरह तप रहा है। हर तरफ भुखमरी है। लोग खाने के लिए लड़ते हैं। हमारी क्या गलती है। क्या हम गाजा में पैदा हो गए, ये गलती है। हम भी जीना चाहते हैं। हमारे बच्चों ने क्या गुनाह किया है। उन्हें क्यों सजा मिल रही है। मैं दुनिया से कहना चाहती हूं कि नेतन्याहू को रोको।
अब्द अलबासेत रेहान की आपबीती मैं हर रोज इस आस में रिलीफ कैंप आता हूं कि खाना मिल जाएगा। आज भी यही सोचकर आया था। बहुत देर से खड़ा हूं, खाना नहीं मिला। गाजा पट्टी में कहीं से सामान लाने के लिए एंट्री नहीं है। खाना तो छोड़िए, पीने का पानी तक नहीं है। पानी साफ करने वाली मशीन चलाने के लिए बिजली नहीं है। मार्केट बंद हैं। बंद क्या हैं, ज्यादातर तबाह हो गए हैं।
इजराइल के हमलों में ज्यादातर रिहायशी बिल्डिंग और मार्केट तबाह हो गए हैं। ये फोटो गाजा शहर के एक मार्केट की है।
एक आदमी को जिंदा रखने के लिए जितने खाने की जरूरत है, हमें उतना भी नहीं मिल रहा है। मैं खाने की तलाश में आता हूं कि कम से कम बच्चों का पेट भर जाए। वे रात में न रोएं। मेरे पास उन्हें खिलाने के लिए कुछ तो हो।
उम्मीद है कि अरब और यूरोप के देश गाजा में एंट्री पॉइंट खुलवाएंगे। हम तक मदद पहुंचेगी। फिलिस्तीन के लोगों, बच्चों, महिलाओं की जिंदगी की कद्र होनी चाहिए। हमारे बच्चे आंखों के सामने भूख से मर रहे हैं। हॉस्पिटल में डॉक्टर तो हैं, लेकिन दवा नहीं है। डॉक्टर भी कैसे इलाज करेंगे। दुनिया को हमारी तरफ देखना चाहिए।
गाजा का बॉर्डर सील, एंट्री के लिए इजराइल की परमिशन जरूरी अमेरिका के दखल के बाद इजराइल और ईरान की जंग तो थम गई, लेकिन गाजा में हमास और इजराइल के बीच युद्ध जारी है। इजराइल लगातार बमबारी और ग्राउंड ऑपरेशन कर रहा है। इसके बावजूद हमास अपने टनल नेटवर्क की मदद से बचा हुआ है और हमले कर रहा है। इन हमलों में पिछले एक महीने में इजराइल के 15 सैनिक मारे गए हैं।
फोटो 8 जुलाई की है।यरुशलम में लोग सार्जेंट मोशे निसिम फ्रेच की कब्र पर शोक मनाने आए थे। मोशे इजराइल और हमास के बीच गाजा में चल रही जंग के दौरान मारे गए थे।
7 अक्टूबर, 2023 के बाद से ही गाजा चारों तरफ से सील है। न कोई बाहर आ सकता है, न ही कोई अंदर जा सकता है। पानी, बिजली, खाना, मेडिकल सप्लाई और जरूरत की बाकी चीजें इजराइल की इजाजत से ही गाजा में जा सकती हैं।
ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक, इजराइल भूख को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। भूख से गाजा में बड़े पैमाने पर मौतें हो रही हैं। UN और दूसरे संगठनों को गाजा में काम करने नहीं दिया जा रहा।
इजराइल और अमेरिका की तरफ से चलाए जा रहे न्यू एड डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के जरिए लोगों को मदद पहुंचाई जा रही है। लोग राहत की चीजें लेने आते हैं, तो उन पर भी फायरिंग की घटनाएं सामने आ रही हैं। इनमें अब तक 400 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
अब इजराइल-गाजा बॉर्डर का हाल बॉर्डर से दिख रही गाजा की तबाही इजराइल पत्रकारों को गाजा में एंट्री नहीं करने दे रहा है। फिर भी इजराइल की कवरेज के दौरान हमने तय किया कि गाजा में दाखिल होने की कोशिश करेंगे। हम तेल अवीव से साउथ की ओर गाजा बॉर्डर की तरफ निकले। तेल अवीव से अशदोद, अश्कलोन होते हुए 70 किमी का सफर कर स्देरोत पहुंचे।
गाजा बॉर्डर पर चल रहे युद्ध की वजह से अशदोद के आगे ट्रेनें बंद रखी गई हैं। गाजा की तरफ से ट्रेनों पर बमबारी या रॉकेट फायर होने का डर है।
स्देरोत में हम जिस सड़क पर बढ़ रहे थे, उसके दाईं तरफ फेंसिंग है। फेंसिंग के पार दूसरी तरफ गाजा है। यहीं हमें इजराइली फोर्स के जवानों ने रोक लिया। कहा- ‘आप यहां से आगे नहीं जा सकते। ऑपरेशन चल रहा है, हम आपको जाने की परमिशन नहीं दे सकते।’
इसके बाद हम स्देरोत शहर में ऊंचाई पर बने पॉइंट पर पहुंचे, जहां से सामने गाजा दिखता है।
इजराइली बॉर्डर के पार गाजा में करीब 3-4 किमी का मैदानी इलाका है। उसके बाद गाजा शहर शुरू होता है।
हम बॉर्डर पर थे, तब भी रुक-रुक कर फायरिंग और धमाकों की आवाजें आ रही थीं। एक दिन पहले ही गाजा में इजराइली आर्मी के 7 जवानों की मौत हुई थी। इसके बाद इजराइली आर्मी ने ऑपरेशन और तेज कर दिया था।
इजराइल के बॉर्डर से गाजा की बिल्डिंग्स से उठता काला धुआं साफ नजर आ रहा है।
इस पॉइंट पर एक दूरबीन लगी है। इससे गाजा पट्टी का ज्यादातर हिस्सा देखा जा सकता है। इजराइली आर्मी ने ये जगह आम लोगों के लिए खोली हुई है, ताकि कोई भी गाजा को देख सके।
इजराइल बॉर्डर पर लगी दूरबीन की मदद से गाजा के ज्यादातर हिस्से को देखा जा सकता है।
आर्मी ने यहां फायरिंग पोस्ट भी बनाई हुई हैं। हमने दूरबीन की मदद से गाजा की फोटो ले लीं। दूरबीन से देखने पर जहां भी नजर गई, सिर्फ टूटी इमारतें नजर आईं। बड़ी-बड़ी इमारतें मलबे में बदल चुकी हैं। नॉर्थ गाजा की ओर कोई नहीं दिख रहा।
ये विजुअल दूरबीन के जरिए रिकॉर्ड किए गए हैं। इससे दिखा कि गाजा में कई किमी तक सिर्फ खंडहर ही बचे हैं।
इजराइल-हमास में सीजफायर पर सहमति नहीं इजराइल और हमास के बीच कतर की राजधानी दोहा में सीजफायर पर बात चल रही है। 6 जुलाई को दोनों पक्षों ने पहली बार बात की, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। हमास इस बात की गारंटी चाहता है कि बातचीत के बाद युद्ध खत्म हो और इजराइली सैनिक गाजा के ज्यादातर हिस्सों से हट जाएं। सीजफायर होने पर हमास इजराइली बंधकों को छोड़ देगा, बदले में इजराइल फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल और हमास पर समझौते के लिए दबाव बढ़ाया है। उनका मानना है कि यह समझौता इसी हफ्ते हो जाएगा। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अभी अमेरिका दौरे पर हैं। डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद नेतन्याहू तीसरी बार वॉशिंगटन पहुंचे हैं।
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हमास ने भूखा रखा, भाग न पाएं इसलिए बम लगाए
इजराइल के निरओज में रहने वाले लाइर और इटान अपने घर में बैठे थे। ये शहर हमास के कंट्रोल में रही गाजा पट्टी के करीब है। सुबह 6:29 बजे अचानक गाजा की ओर रॉकेट फायर होने लगे। पूरे साउथ इजराइल में सायरन की आवाज आने लगीं। लाइर और इटान भी अलर्ट हो गए। तभी उनके घर में हथियार लिए कुछ लोग घुस आए। उन्होंने लाइर और इटान को पकड़ा, बांधा और गाजा ले गए। पढ़िए पूरी खबर..




