पैर लटकाकर करा रहे सफर, ऑटो में बैठा रहे क्षमता से ज्यादा बच्चे, नाबालिग दौड़ा रहे वाहन – Ashoknagar News h3>
.
स्कूल खुलने के साथ ही जुलाई का पहला सप्ताह बीत चुका है, लेकिन ट्रैफिक विभाग ने अब तक जिला मुख्यालय के स्कूली वाहनों पर कार्रवाई नहीं की। ऑटो में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाया जा रहा है। वहीं नाबालिग बच्चे दो पहिया वाहन भी सड़कों पर दौड़ा रहे हैं, लेकिन न तो विभाग और न ही स्कूल संचालक और पेरेंट्स ध्यान दे रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए वाहनों की सुविधा देने के फेर में स्कूली बच्चों को उनके जीवन को खतरे में डाल देते हैं।
नगर में भी कुछ ऐसा ही दृश्य रोज देखने को मिलता है, जहां पर ऑटो सहित अन्य वाहनों में स्कूली बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है, इनमें अधिकतर निजी वाहन हैं। ओवरलोडिंग यातायात पुलिस की नाक के नीचे हो रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। खास बात यह है कि अभिभावकों को भी यह जानकारी है कि उनका बेटा वाहन पर लटककर जाता है, इसके बाद भी वे ध्यान नहीं देते हैं।
अभिभावकों की मानें तो उन्होंने इसे लेकर कई बार ऑटो चालकों से बात की, लेकिन वे इस स्थिति में किराया बढ़ाने की बात करते हैं। अब ऐसे में उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है। उनका कहना है कि एक बच्चे को स्कूल छोड़ने और घर तक लाने के लिए 700 से हजार रुपए तक उनके द्वारा दिए जाते हैं। ऑटो में कभी 14 तो की 16 बच्चों को बैठाया जाता है। जब बच्चे की सुविधा के लिए भीड़ कम करने को कहते हैं तो वे ज्यादा किराए की मांग करते हैं।
कुछ दिन बाद फिर कार्रवाई ^समय-समय पर हमारे द्वारा कार्रवाई की जाती है। कुछ दिन बाद फिर से कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान ऑटो में क्षमता से ज्यादा सवारी मिलती हैं तो कार्रवाई की जाएगी। दो पहिया वाहन चलाने वाले स्कूली बच्चों के पालकों को बुलाकर उनपर कार्रवाई करेंगे। -स्नेहा ठाकुर, ट्रैफिक प्रभारी, अशोकनगर।
शहर की सड़कों पर नाबालिग वाहन चालक दो पहिया वाहन दौड़ा रहे हैं। स्कूल खुलने के साथ ही स्कूली बच्चे भी इन वाहनों को खुद चलाते हुए स्कूल जा रहे हैं। जिससे हादसे होने का खतरा बना रहता है। हालांकि बात नियमों की करें तो उम्र यदि 16 से 18 साल के बीच है तो सिर्फ बिना गियर वाले 50 सीसी क्षमता के वाहन ही चला सकते हैं। 18 साल से कम उम्र की आयु में गियर वाली बाइक चलाने का लाइसेंस जारी नहीं किया जाता। बिना लाइसेंस के यदि कोई नाबालिग वाहन चला रहा है। इस दौरान कोई हादसा हो जाता है और इसमें किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो वाहन का बीमा होने के बाद भी कंपनी थर्ड पार्टी क्लेम देने से इनकार कर सकती है।
Advertising
मध्यप्रदेश की और खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे – Madhya Pradesh News
.
स्कूल खुलने के साथ ही जुलाई का पहला सप्ताह बीत चुका है, लेकिन ट्रैफिक विभाग ने अब तक जिला मुख्यालय के स्कूली वाहनों पर कार्रवाई नहीं की। ऑटो में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाया जा रहा है। वहीं नाबालिग बच्चे दो पहिया वाहन भी सड़कों पर दौड़ा रहे हैं, लेकिन न तो विभाग और न ही स्कूल संचालक और पेरेंट्स ध्यान दे रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए वाहनों की सुविधा देने के फेर में स्कूली बच्चों को उनके जीवन को खतरे में डाल देते हैं।
नगर में भी कुछ ऐसा ही दृश्य रोज देखने को मिलता है, जहां पर ऑटो सहित अन्य वाहनों में स्कूली बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है, इनमें अधिकतर निजी वाहन हैं। ओवरलोडिंग यातायात पुलिस की नाक के नीचे हो रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। खास बात यह है कि अभिभावकों को भी यह जानकारी है कि उनका बेटा वाहन पर लटककर जाता है, इसके बाद भी वे ध्यान नहीं देते हैं।
अभिभावकों की मानें तो उन्होंने इसे लेकर कई बार ऑटो चालकों से बात की, लेकिन वे इस स्थिति में किराया बढ़ाने की बात करते हैं। अब ऐसे में उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है। उनका कहना है कि एक बच्चे को स्कूल छोड़ने और घर तक लाने के लिए 700 से हजार रुपए तक उनके द्वारा दिए जाते हैं। ऑटो में कभी 14 तो की 16 बच्चों को बैठाया जाता है। जब बच्चे की सुविधा के लिए भीड़ कम करने को कहते हैं तो वे ज्यादा किराए की मांग करते हैं।
कुछ दिन बाद फिर कार्रवाई ^समय-समय पर हमारे द्वारा कार्रवाई की जाती है। कुछ दिन बाद फिर से कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान ऑटो में क्षमता से ज्यादा सवारी मिलती हैं तो कार्रवाई की जाएगी। दो पहिया वाहन चलाने वाले स्कूली बच्चों के पालकों को बुलाकर उनपर कार्रवाई करेंगे। -स्नेहा ठाकुर, ट्रैफिक प्रभारी, अशोकनगर।
शहर की सड़कों पर नाबालिग वाहन चालक दो पहिया वाहन दौड़ा रहे हैं। स्कूल खुलने के साथ ही स्कूली बच्चे भी इन वाहनों को खुद चलाते हुए स्कूल जा रहे हैं। जिससे हादसे होने का खतरा बना रहता है। हालांकि बात नियमों की करें तो उम्र यदि 16 से 18 साल के बीच है तो सिर्फ बिना गियर वाले 50 सीसी क्षमता के वाहन ही चला सकते हैं। 18 साल से कम उम्र की आयु में गियर वाली बाइक चलाने का लाइसेंस जारी नहीं किया जाता। बिना लाइसेंस के यदि कोई नाबालिग वाहन चला रहा है। इस दौरान कोई हादसा हो जाता है और इसमें किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो वाहन का बीमा होने के बाद भी कंपनी थर्ड पार्टी क्लेम देने से इनकार कर सकती है।




