Advertising
Home Top stories झुकना हार नहीं है…: सुलह से मुकदमे सुलझाने में भोपाल सबसे...
Advertising
<

झुकना हार नहीं है…: सुलह से मुकदमे सुलझाने में भोपाल सबसे आगे, 66% केस इसी तरह निपटाए, इंदौर में सिर्फ 9%… बाकी में फैसला आने तक लड़ते रहते हैं – Raisen News

0
झुकना हार नहीं है…:  सुलह से मुकदमे सुलझाने में भोपाल सबसे आगे, 66% केस इसी तरह निपटाए, इंदौर में सिर्फ 9%… बाकी में फैसला आने तक लड़ते रहते हैं – Raisen News

झुकना हार नहीं है…: सुलह से मुकदमे सुलझाने में भोपाल सबसे आगे, 66% केस इसी तरह निपटाए, इंदौर में सिर्फ 9%… बाकी में फैसला आने तक लड़ते रहते हैं – Raisen News

अगर काेई विवाद कोर्ट की चौखट तक पहुंच भी जाए तो अदालत का फैसला आने से पहले इसे बातचीत से सुलझाने में भोपाल के लोग प्रदेश में सबसे आगे हैं। यहां 66 फीसदी मामलों में समझौता हुआ। आलीराजपुर, बुरहानपुर, देवास जैसे छोटे जिले भी इस मामले में पहले पांच में श

.

इसके उलट, इंदौर, आगर मालवा, खंडवा, डिंडोरी, टीकमगढ़, नीमच, रतलाम, दमोह, गुना, सिंगरौली और उमरिया में लोगों के बीच अदालत के अंतिम फैसले तक ठनी रहती है। इन जिलों में 90% मामलों में सुलह नहीं हो रही है। मप्र के 51 जिलों में ढाई साल में लगी 459 नेशनल लोक अदालतों के आंकड़ों की NEWS4SOCIALने स्टडी की तो ये तथ्य सामने आए। साल 2023 से 2025 तक लगी नेशनल लोक अदालतों में 11.94 लाख से ज्यादा केस निपटे।

एक पहलू यह भी… पैसे से ज्यादा परिवार को अहमियत

परिवार : 3 में से 1 विवाद बातों से सुलझा नेशनल लोक अदालतों में तलाक, मेंटेनेंस और पारिवारिक विवादों से जुड़े 39,202 केस रखे गए। इनमें से 11,444 में पक्षकार आपसी सहमति से विवाद खत्म करने को तैयार हुए। यानी, हर 3 में से लगभग 1 मामले में लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय बातचीत को रास्ता चुना।

कुछ मामलों में रिश्ते बनाए रखने की कोशिश हुई तो कई बार रिश्ते खत्म होने की शर्तों पर समझौता हुआ। सबसे ज्यादा भोपाल में 1549 में से 906 पारिवारिक विवादों का निपटारा हुआ। इसके बाद बुरहानपुर (796), आलीराजपुर (728), भिंड (700), देवास (700), अशोक नगर (687) का नंबर रहा।

Advertising

पैसा : 40 में से 1 ही मामले में समझौता बीते डेढ़ साल की चार नेशनल लोक अदालतों में 10.95 लाख मुकदमे पैसे की वसूली के रहे। सिर्फ 24,574 में समझौता हो पाया। यानी, हर 40 में से एक मामला सुलझा। मनी रिकवरी के मामलों में भोपाल में 1,946 और बुरहानपुर में 1,710 से ज्यादा वसूली केस निपटे।

वहीं, सबसे कम आगर मालवा में औसतन सिर्फ 177 प्रकरणों में समझौता हुआ। इसके उलट स्थिति बिजली, पानी के विवादों की रही। 8 मार्च 2025 की लोक अदालत में बिजली कंपनी के 1 लाख से ज्यादा केस आए। करीब 32 हजार में सहमति बन गई। पानी के बिल से जुड़े 65 हजार से अधिक मामलों में 31 हजार समझौते हुए।

मध्यप्रदेश की और खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे – Madhya Pradesh News

Advertising