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आगरा में दिखेगा रियल मानव भेड़िया दीना सनीचर: नगर निगम ने कबाड़ से तैयार की असल मोगली की मूर्ति, सिकंदरा स्थित अनाथाश्रम में रह रहा था भेड़िया मानव दीना – Agra News

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आगरा में दिखेगा रियल मानव भेड़िया दीना सनीचर:  नगर निगम ने कबाड़ से तैयार की असल मोगली की मूर्ति, सिकंदरा स्थित अनाथाश्रम में रह रहा था भेड़िया मानव दीना – Agra News

आगरा में दिखेगा रियल मानव भेड़िया दीना सनीचर: नगर निगम ने कबाड़ से तैयार की असल मोगली की मूर्ति, सिकंदरा स्थित अनाथाश्रम में रह रहा था भेड़िया मानव दीना – Agra News

मानव भेड़िया दीना सनीचर की कबाड़ से बनी आकृति।

1990 के दशक में हर संडे को दूरदर्शन पर मोगली का इंतजार रहता था। क्या छोटे और क्या बड़े…हर कोई द जंगल बुक के एनिमेटेड किरदार मोगली की कहानी सुनने और देखने के लिए बेताब रहता था। मगर, आगरा नगर निगम ने रियल मानव भेड़िया दीना सनीचर को प्रदर्शित किया है। आ

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पहले जानते हैं दीना सनीचर के बारे में… जंगल की गहराइयों में छुपी तमाम कहानियों में से एक कहानी दीना सनीचर की भी है। इंडियन वुल्फ बॉय के नाम से मशहूर दीना सनीचर की कहानी गुमनामी में जन्मी और रहस्य में डूबी है। दीना सनीचर की किंवदंती इतिहास के सबसे दिलचस्प और रहस्यमयी किस्सों में से एक है।

इंटरनेट पर उपलब्ध दीना सनीचर की तस्वीर।

इतिहासकार राजकिशार राजे के अनुसार, वर्ष 1867 में बुलंदशहर के जंगलों में अंग्रेज शिकारियों को भेड़ियों के साथ झाड़ियों में एक अजीब बालक दिखा। यह भेड़िया मानव दीना सनीचर था, जो भेड़ियों के बीच ही पला-बढ़ा। सनीचर भेड़ियों की तरह से चलता था और कच्चा मांस खाता था। मानव विज्ञान वेलेंटाइन बाल ने वर्ष 1880 में प्रकाशित जंगल लाइफ इन इंडिया में उसका जिक्र किया है।

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आगरा के अनाथाश्रम में रहा 6 साल के उस बच्चे को अंग्रेज अधिकारी आगरा में 4 फरवरी 1867 को शनिवार के दिन सिकंदरा के सेंट जोंस चर्च इन वाइल्डरनेस के अनाथाश्रम लेकर आए, जहां फादर एरहाडर्ट ने उसे अपनी देखरेख में रखा।

सिकंदरा स्थित अनाथाश्रम की दीवार पर दीना सनीचर की पेटिंग की गई है।

सिकंदरा में उसकी परवरिश आयरलैंड की नर्सों ने की। अंग्रेज लेखक रूडयार्ड किपलिंग ने वर्ष 1894 में जंगल बुक लिखी, जिसका नायक मोगली भी भेड़ियों ने पाला था। दीना सनीचर असल किरदार है। 29 साल की उम्र में उसकी टीबी से मौत हो गई।

बोलना नहीं जानता था सनीचर अनाथाश्रम उसे सनीचर नाम दिया गया था, क्योंकि उसे शनिवार के दिन आगरा लाया गया था। यह बताया गया था कि वह शुरू में चारों पैरों पर चलता था और कच्चा मांस खाता था। वह बोल नहीं सकता था, तो वह भेड़िये जैसी आवाज़ें निकालता था। वह 20 साल से अधिक समय तक अन्य मनुष्यों के बीच रहा, लेकिन कभी बोलना नहीं सीखा और अपने पूरे जीवन में गंभीर रूप से विकलांग रहा।

कबाड़ से बनाई दीना की आकृति आगरा में अब मोगली के असल किरदार यानि मानव भेड़िया दीना सनीचर की कहानी फिर से जीवंत हो रही है। 1867 से सिकंदरा स्थित अनाथ आश्रम में रहे दीना की यादों को आगरा नगर निगम सहेजा है। कबाड़ से उसकी मूर्ति तैयार की गई है। साथ ही भेड़िए भी बनाए गए हैं। सिकंदरा स्थित सेंट जोंस चर्च के अनाथाश्रम में जहां वह अपनी मौत होने तक 23 साल तक रहा, वहां की दीवारों पर पेटिंग कराई गई है। यहां दीना सनीचर का चित्र उकेरा गया है। इसके साथ ही जंगल में रहने वाले विभिन्न किरादार भी प्रदर्शित किए गए हैं। आगरा नगर निगम ने भेड़िया के बीच खेलते-कूदते दीना सनीचर और जंगल को पेंटिंग में उकेरा है।

मॉल रोड स्थित वेस्ट टू वंडर पार्क में लगाई गई दीना सनीचर की आकृति।

12 फीट ऊंची आकृति अब कबाड़ से कमाल दिखाते हुए आगरा नगर निगम के वर्कशॉप में कलाकारों ने दीना सनीचर की प्रतिमा तैयार की है। यह हूबहू वैसी ही बनाई गई है, जैसी किताबों में सनीचर की फोटो दर्शाई गई है। सनीचर की 12 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ ही 10 फीट ऊंचाई के भेड़ियों की कलाकृतियां भी कबाड़ से ही तैयार की गई है। साइनेज के जरिये सनीचर की कहानी भी बयां की जाएगी ताकि पर्यटकों को मोगली का असल किरदार और आगरा कनेक्शन पता चल सके।

3 आकृतियां तैयार की गई हैं दीना सनीचर से जुड़ी 3 आकृतियां बनाई गई हैं। इनमें पहली आकृति तो हूबहू दीना सनीचर जैसी है, जोकि 12 फीट ऊंची है। इसके अलावा दूसरी आकृति में हाथ में भाला लिए उसे शिकारी के रूप में दिखाया गया है। एक अन्य आकृति में उसे उसके साथी भेड़िया के साथ दिखाया गया है। इनमें से फिलहाल 2 आकृतियों (हाथ में भाला लिए और भेड़िया) को फतेहाबाद रोड स्थित वेस्ट टू वंडर पार्क में रखा गया है।

मॉल रोड स्थित वेस्ट टू वंडर पार्क में कबाड़ से बनी भेड़िये की आकृति।

नहीं मिल पा रही उपयुक्त जगह सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम का कहना है कि नगर निगम की योजना थी कि दीना सनीचर से जुड़ी कबाड़ से बनी आकृतियों को उसी जगह पर रखा जाए, जिस जगह पहले अनाथाश्रम था। मगर, अब ये जगह मिशनरी के पास है। उन्होंने यहां इन आकृतियों को लगाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद इन आकृतियों के लिए हाईवे स्थित गुरूद्वारा गुरू का ताल के सामने खाली जगह पर रखने का निर्णय लिया गया, जिससे कि अधिक से अधिक लोगों की नजर में आ सके। यहां ASI ने आपत्ति लगा दी। जिसके बाद अभी अंतिमन निर्णय नहीं हो सका है।

अब जंगल बुक के बारे में जानिये

जंगल बुक अंग्रेजी लेखक रुडयार्ड किपलिंग द्वारा 1894 में प्रकाशित कहानियों का संग्रह है । अधिकांश पात्र शेर खान बाघ और बालू भालू जैसे जानवर हैं। हालांकि एक प्रमुख पात्र लड़का या “मानव-शावक” मोगली है, जिसे भेड़ियों द्वारा जंगल में पाला जाता है। अधिकांश कहानियाँ भारत के एक जंगल में सेट की गई हैं। एक जगह का बार-बार उल्लेख किया गया है “सिवनी” (सिवनी ), मध्य प्रदेश में स्थित है।

सिकंदरा स्थित अनाथाश्रम की बाउंड्री पर की गई पेटिंग।

एममी में मनता है मोगली महोत्सव मोगली महोत्सव, जिसे मोगली बाल उत्सव भी कहा जाता है, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित एक वार्षिक कार्यक्रम है जो बच्चों को जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक करने के लिए आयोजित किया जाता है। इस उत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताएं, खेल, ट्रेकिंग, सफारी, क्विज, और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बच्चों को प्रकृति के करीब आने का मौका मिलता है।

मानव भेड़िया दीना सनीचर को आगरा, सिकंदरा स्थित अनाथाश्रम में रखा गया था। यहां काफी साल तक रहा था। हालांकि वह ज्यादा साल तक सर्वाइव नहीं कर सका था। राजकिशोर राजे, इतिहासकार

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मानव भेड़िया दीना सनीचर और उससे जुड़ी सभी आकृतियों को भविष्य में एक ही जगह पर रखा जाएगा। इसके लिए उपयुक्त स्थान ढूंढा जा रहा है। हमारा प्रयास है कि शहर से जुड़े इतिहास को लोगों के सामने लाएं। जिसे मोगली की कहानी सुनकर बच्चे बढ़े हुए, वे असल मानव भेड़िया को देख सकें। अशोक प्रिय गौतम, सहायक नगर आयुक्त

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