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बंजर जमीन से होगी 20 लाख की कमाई: साढ़े 7 हेक्टेयर में 3 लाख पौधों का बगीचा, अतिक्रमण की जमीन से निकाला रास्ता – Jhunjhunu News

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बंजर जमीन से होगी 20 लाख की कमाई:  साढ़े 7 हेक्टेयर में 3 लाख पौधों का बगीचा, अतिक्रमण की जमीन से निकाला रास्ता – Jhunjhunu News

बंजर जमीन से होगी 20 लाख की कमाई: साढ़े 7 हेक्टेयर में 3 लाख पौधों का बगीचा, अतिक्रमण की जमीन से निकाला रास्ता – Jhunjhunu News

एक समय जो जमीन बेकार समझी जाती थी, वहां अब हरियाली लहरा रही है। जहां पहले झाड़ियों और अतिक्रमण ने जगह घेर रखी थी, वहां अब फलदार पेड़ों की कतारें हैं। झुंझुनूं जिले के बुहाना ब्लॉक के बड़बर गांव की गोचर भूमि पर जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वार

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जलग्रहण विकास विभाग ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (2020) के तहत इसे 7.5 हेक्टेयर के फलदार बगीचे में तब्दील कर दिया है। यह प्रोजेक्ट अब पूरे जिले में नजीर बन गया है।

इस इलाके में कभी एक पौधा नहीं उगा करता था। अब यहां हरियाली है।

मिसाल बना बगीचा

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान जब दैनिक NEWS4SOCIALटीम झुंझुनूं से 60 किलोमीटर दूर बड़बर गांव पहुंची तो देखा कि यह बगीचा केवल पेड़-पौधों का ढांचा नहीं, बल्कि एक समाज, सरकार और पर्यावरण की साझेदारी का अनूठा उदाहरण है। बच्चे, बुजुर्ग और किसान इस क्षेत्र को देखने आते हैं। वहां मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि पहले यह जमीन वीरान थी, अब यहां हरियाली के साथ-साथ उम्मीदें भी उग आई हैं।

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झुंझुनूं जिले में प्रधानमंत्री योजना के तहत चल रहे 17 अन्य प्रोजेक्ट्स में बड़बर सबसे सफल माना जा रहा है। इसकी कामयाबी को देखते हुए अन्य पंचायतें भी ऐसे हरित मॉडल को अपनाने को तैयार हैं।

साढ़े सात हैक्टेयर में फैले बगीचे में 3 हजार पौधे

करीब साढ़े सात हैक्टेयर भूमि पर फैले इस हरित प्रोजेक्ट में कुल 3 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से 1900 पौधे फलदार हैं और 1100 छायादार पौधे हैं। इस परियोजना पर कुल 42 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। बगीचे में बिल्व, अनार, मौसमी और करौंदा जैसे फलदार पौधे प्रमुखता से लगाए गए हैं। इनमें बिल्व के अकेले 1000 पौधे हैं, जबकि अन्य फलदार पौधों की संख्या 300-300 है।

इस इलाके में पूरा एक बगीचा तैयार हो चुका है।

ड्रिप इरिगेशन सिस्टम से सिंचाई, सोलर पंप से कुंड भराई

बगीचे में सिंचाई ड्रिप सिस्टम से की जा रही है, जिससे पानी की बचत भी होती है और पौधों को आवश्यकतानुसार जल भी मिलता है। सिंचाई के लिए यहां 50-50 हजार लीटर क्षमता के दो बड़े कुंड बनाए गए हैं। इन कुंडों को भरने के लिए सोलर पैनल आधारित ट्यूबवेल लगाया गया है।

भूमिगत जल में फ्लोराइड की अधिकता को देखते हुए इसमें वर्षा जल को मिलाकर उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी दो स्थानों पर बनाया गया है। इसके अलावा ढाई लाख लीटर क्षमता का एक तालाब भी वर्षा जल संचयन के लिए तैयार किया गया है।

साढ़े सात हैक्टेयर में फैला बगीचा, 3 हजार पौधे, 42 लाख की लागत

अतिक्रमण और रास्तों की चुनौती को बनाया अवसर

वाटरशेड विभाग बुहाना के अधिशासी अभियंता मनोज गौड़ बताते हैं कि इस परियोजना को तैयार करने में सबसे बड़ी चुनौती थी अतिक्रमण। उन्होंने बताया- यह चारागाह भूमि पहले कुछ लोगों के कब्जे में थी और यहां चार अलग-अलग रास्ते गुजरते थे। स्थानीय लोगों को समझाकर, बातचीत कर समाधान निकाला गया। उन्हें ऑप्शनल रास्ते दिए गए और फिर शेष जमीन को फेंसिंग कर संरक्षित किया गया।

सोलर लाइटों से रोशन बगीचा, भविष्य में ओपन जिम की योजना

बगीचे की सुंदरता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 25 सोलर पावर्ड स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं, जो रात के समय बगीचे को जगमगाए रखती हैं। इससे ग्रामीण शाम के समय भी बगीचे का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा, आने वाले समय में बचे हुए आधा हैक्टेयर भू-भाग पर ओपन जिम विकसित करने की योजना है, जिससे यह क्षेत्र न केवल रोजगार और आमदनी का साधन होगा, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य सुधार का भी केंद्र बन सकेगा।

ड्रिप इरिगेशन सिस्टम से सिंचाई, सोलर पंप से कुंड भराई

रोजगार और आय का नया जरिया

अब तक इस बगीचे के संचालन और विकास से 100 से ज्यादा ग्रामीणों को रोजगार मिला है। इस प्रकार यह प्रोजेक्ट न केवल हरियाली को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों की जीविका का माध्यम भी बन रहा है।

विभागीय अधिकारियों का दावा है कि अगले दो वर्षों में यह बगीचा पंचायत को सालाना 20 से 25 लाख रुपये तक की आय देगा। इसके पीछे तर्क है कि जब पौधे फल देना शुरू करेंगे तो उनकी बिक्री से आय सुनिश्चित होगी।

जिले में ऐसे 17 प्रोजेक्ट, बड़बर बना लीड मॉडल

झुंझुनूं जिले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ऐसे कुल 17 प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं, लेकिन बड़बर गांव का प्रोजेक्ट सबसे सफल और सुचारु रूप से संचालित होने वाला प्रोजेक्ट बन चुका है। इसकी सफलता को देखते हुए अब अन्य पंचायतों में भी इस तरह के बगीचों को विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

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