लखनऊ में निकला मुस्लिम बिन अकील का जुलूस: मातम करते हुए अकीदत मंद हुए शामिल, नम आंखों से किया याद – Lucknow News h3>
लखनऊ में हुसैनाबाद स्थित रईस मंजिल से जुलूस निकाला गया। हजरत मुस्लिम बिन अकील की याद में निकाले गए जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। इस मौके पर आज हजारों लोगों ने मिलकर उनके गम को मनाया। मजलिस में मौलाना सैय्यद मोहम्मद अली हैदर ने जनाबे मु
.
शहादत नामा सुनकर लोगो की आंखों से आंसू जारी हो गया। मजलिस के बाद नम आंखों से ताबूत की जियारत के लिए लोग उमड़ पड़े। जुलूस में सबसे आगे अलम, ताबूत और जुलजनाह (सवारी इमाम हुसैन ) था।
मुख्य वक्ता सलीम अब्बास ने कर्बला की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 150 वर्षों से निकाले जाने वाले जुलूस को हसन जाफर मरहूम ने शुरू किया था। ये जुलूस परम्परागत तरीके से निकाला जाता है जो लखनऊ परंपरा का हिस्सा बन गया है। जुलूस का आयोजन हुसैनाबाद क्षेत्र में रईस मंजिल स्थित रौजा-ए-हजरत मुस्लिम में अजुमन गुन्चे-ए-मेहदिया के द्वारा किया गया।
जुलूस में शामिल लोगों ने मातम किया।
इस्लाम के संदेश को किया आम
मजलिस को संबोधित करते हुए मौला सय्यद मोहम्मद अली हैदर ने इस्लामिक इतिहास पर बात किया। मौलाना ने कहा कि पैगम्बर मोहम्मद साहब के चाचा हजरत अबु तालिब के बेटे हजरत मुस्लिम बेहद विद्वान और बहादुर थे।उन्हें उबैद उल्लाह बिन जियाद ने बेरहमी से कत्ल कर दिया था।
इमाम हुसैन आम लोगों को इस्लाम की सही तस्वीर दिखाना चाहते थे। उन्हें रोकने के लिए हजरत मुस्लिम की लाश को घोड़ों में बांधकर शहर में घसीटा गया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इमाम हुसैन विचलित नहीं हुए और इस्लाम धर्म को बचाने और ईश्वर के संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए अपने बच्चों की शहादत दिया।
औरत, मर्द और बच्चे हुए शामिल
तीन दिन से चल रहे मजलिस में गुलरेज मेहंदी, गृह मौलाना सैयद मोहम्मद अली हैदर के अलावा विभिन्न शायरों नोहाख्वानी किया। अन्जुमनों ( संगठनों ) ने नौहाख्वानी व सीनाजनी का सिलसिला जारी रखा । देर शाम अलविदाई मजलिस के बाद अंजुमन गुन्चे-ए-मेहदिया ने रईस मंजिल परिसर से जुलूस निकाला और नौहाख्वानी की। इस अवसर पर औरत मर्द और बच्चे गम में बिलख-बिलखकर रो रहे थे जिनकी तादाद हजारों में थी।




