डॉ अनुष्का की 6 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर: कल सुबह 9 बजे जेल से लेकर आएगी पुलिस, हेयर ट्रांसप्लांट उपकरण बरामद कराए जाने हैं – Kanpur News h3>
डाॅ अनुष्का को कोर्ट से जेल लेकर जाती पुलिस
हेयर ट्रांसप्लांट के दौरान इंजीनियर की मौत के मामले में आरोपी डॉक्टर अनुष्का तिवारी की पुलिस कस्टडी रिमांड पर आज स्पेशल सीजेएम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने आरोपी डॉक्टर की 6 घंटे की रिमांड याचिका मंजूर कर ली है। कल सुबह 9 बजे पुलिस हेयर ट्रांसप्लां
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15 मई को इंजीनियर की हुई थी मौत
मूलरूप से गोरखपुर निवासी पनकी पावर प्लांट के सहायक अभियंता विनीत दुबे 13 मार्च को केशवपुरम स्थित इंपायर क्लीनिक में हेयर ट्रांसप्लांट कराया था, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ी और 15 मई को सर्वोदय नगर स्थित रीजेंसी अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी।
विनीत की पत्नी जय त्रिपाठी ने क्लीनिक की डा. अनुष्का तिवारी के खिलाफ 9 मई को रावतपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। 26 मई को डा. अनुष्का तिवारी ने सीजेएम सूरज मिश्र की कोर्ट में सरेंडर किया था। कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया था।
पुलिस 27 मई को जेल में दर्ज किए थे बयान
मामले में साक्ष्यों के संकलन के लिए थाना रावतपुर के दरोगा व विवेचक पुष्पराज सिंह ने बीते शनिवार को कोर्ट में पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी थी। प्रार्थन पत्र देकर कहा था कि 27 मई को जेल में डा. अनुष्का के बयान लिए थे। मामले से जुड़े डॉक्यूमेंट व डॉक्टर के सर्टिफिकेट के साक्ष्य संकलन के लिए उसका 15 घंटे का पुलिस कस्टडी रिमांड दिया जाए।
अनुमोदन न होने पर याचिका खारिज करने की मांग
जिसके बाद आज स्पेशल सीजेएम कुमदलता त्रिपाठी की कोर्ट में रिमांड पर सुनवाई हुई। सुबह करीब 10:30 बजे आरोपी डॉक्टर को कोर्ट में पेश किया गया। जिसके बाद रिमांड याचिका पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने रिमांड का विरोध करते हुए कहा कि प्रार्थना पत्र में पुलिस के राजपत्रित अधिकारी का अनुमोदन नहीं है, जिस पर याचिका खारिज की जाए।
जिसके बाद एसीपी कल्याणपुर अभिषेक पांडेय ने अपनी संस्तुति प्रदान की। अभियोजन की ओर से कहा गया कि आरोपी डॉक्टर से पुलिस को ट्रांसप्लांट संबंधी उपकरण व अन्य दस्तावेज बरामद करने हैं। जो उनके केशवपुरम स्थित क्लीनिक में रखे है, जिसको सिर्फ आरोपी ही बरामद करा सकती हैं।
सुबह 9 बजे जेल पहुंचेगी पुलिस
कोर्ट ने कल सुबह 9 बजे से 3 बजे तक की रिमांड याचिका मंजूर की। कोर्ट ने कहा कि रिमांड पर लेते समय व दाखिल करते समय आरोपी का मेडिकल कराया जाए। जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि वह रिमांड से लौटने के बाद पुष्टि करें कि आरोपी को कोई मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना तो नहीं मिली।
जेल में दाखिल होने के बाद अविलंब इसकी आख्या कोर्ट में प्रस्तुत की जाए। इसके साथ ही अगर आरोपी के अधिवक्ता रिमांड के दौरान मौजूद रहना चाहते हैं, तो उचित दूरी बना कर उपस्थित रह सकते हैं।



