बिहारशरीफ में खुलेगा प्रदेश का दूसरा दीदी सिलाई केंद्र: 40 से अधिक महिलाओं को मिलेगा रोजगार, 10 दिन की ट्रेनिंग भी दी जाएगी – Nalanda News h3>
नालंदा जिले के बिहारशरीफ के दीपनगर क्षेत्र में इस महीने के अंत तक बिहार का दूसरा “दीदी सिलाई केंद्र” शुरू होने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल से न केवल 40 से अधिक जीविका दीदियों को एक छत के नीचे रोजगार मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती
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इस केंद्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जीविका से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है। यहां सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं की यूनिफॉर्म सिलाई के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी कपड़े सिलने की सुविधा उपलब्ध होगी। पहले चरण में केंद्र में 30 से 35 सिलाई मशीनें लगाई जाएंगी, जिन्हें भविष्य में आवश्यकतानुसार बढ़ाया जा सकता है। कोइलवर में पहले से ही एक सफल केंद्र एक वर्ष से संचालित है, जहां 900 से अधिक जीविका दीदियां रोजगार प्राप्त कर रही हैं।
इस परियोजना के तहत चयनित महिलाओं को नूरसराय स्थित आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) में 10 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में सिलाई कौशल के साथ-साथ केंद्र संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का अभिनव प्रयास, 40 से अधिक महिलाओं को मिलेगा रोजगार।
पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन करेगा
जीविका के डीपीएम संजय कुमार पासवान ने कहा कि केंद्र के सुचारू संचालन के लिए एक ‘उत्पादक समूह’ (प्रोड्यूसर ग्रुप) का गठन किया गया है। यह समूह कच्चे माल की खरीदारी से लेकर तैयार वस्त्रों की आपूर्ति तक की पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन करेगा। समूह में कम से कम 20 और अधिकतम 40 सदस्य शामिल होंगी, जिनमें अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पदाधिकारी भी होंगे। इन पदों पर नियुक्ति का निर्णय स्वयं केंद्र में कार्यरत दीदियां करेंगी।
दो और जगह केंद्र खोलने की योजना
दीपनगर केंद्र के सफल संचालन के बाद जिले के दो अन्य प्रखंडों – नूरसराय और एकंगरसराय में भी ऐसे ही केंद्र खोलने की योजना है। इससे और अधिक महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
डीपीएम ने कहा कि जीविका के माध्यम से समाज में मौन क्रांति आई है। इससे जुड़ी महिलाएं न केवल अपने जीवन स्तर में सुधार ला रही हैं, बल्कि अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बना रही हैं। यह महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा मॉडल है, जिसका दूरगामी प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा।
सिलाई की दरें निर्धारित नहीं
अभी तक सिलाई की दरें निर्धारित नहीं की गई हैं, लेकिन शीघ्र ही इसकी घोषणा की जाएगी। प्रत्येक दीदी को उनके द्वारा तैयार किए गए वस्त्रों की संख्या के अनुसार भुगतान किया जाएगा, जिसे सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाएगा।
इस तरह के सिलाई केंद्रों का निर्माण सतत जीविकोपार्जन योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करके उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।



