टीएमयू में दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस ‘NCPRI-2025’ का शुभारंभ: एआई की मदद से खोजी गईं 3000 से अधिक ड्रग्स, कोविड के बाद और उभरी फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री – Moradabad News h3>
कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन मां सरस्वती के सामने दीप जलाकर कर किया गया।
मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू), मुरादाबाद के फार्मेसी कॉलेज एवं इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन काउंसिल (IIC) के संयुक्त तत्वावधान में ‘फार्मास्युटिकल रिसर्च एंड इनोवेशनः स्ट्रेंथनिंग इंडस्ट्री-अकैडमिया कोलैबोरेशन’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय
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मुख्य अतिथि एवं नेशनल बायोफार्मा मिशन के निदेशक डॉ. राज के. शिरुमल्ला ने उद्घाटन सत्र में कहा कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। हेल्थकेयर सेक्टर में यह कहावत आज के समय में पूरी तरह सटीक बैठती है। भारत अब केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि हेल्थ इनोवेशन का वैश्विक अग्रदूत बन चुका है। कोविड-19 महामारी ने यह सिद्ध किया कि संकट के समय कैसे नवाचार की नयी राहें खुलती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में सीमित संसाधनों के बावजूद मोबाइल क्लिनिक, टेलीमेडिसिन, कम लागत वाले डायग्नोस्टिक उपकरणों जैसे समाधान विकसित किए गए हैं। फार्मेसी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि अब तक एआई की मदद से 3000 से अधिक नई दवाओं की खोज हो चुकी है। उन्होंने कहा कि एआई से समय, श्रम और धन की बचत होती है। विशेषकर कैंसर के निदान और जीन थेरेपी में यह तकनीक वरदान साबित हो रही है।
अतिथियों को औषधीय पौधे और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ
कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन डॉ. शिरुमल्ला, पीसीआई फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन डॉ. विभु साहनी और टीएमयू के कुलपति प्रो. वी.के. जैन ने माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर कॉन्फ्रेंस चेयर एवं फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनुराग वर्मा, कन्वीनर प्रो. फूलचंद, को-कन्वीनर प्रो. मयूर पोरवाल व प्रो. कृष्ण कुमार शर्मा तथा सेक्रेटरी श्री आदित्य विक्रम जैन सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। अतिथियों को औषधीय पौधे और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सोवनियर का विमोचन भी इसी अवसर पर हुआ।
इस अवसर पर अनेक मेडिकल के छात्र उपस्थित रहे।
रिसर्च को सरकार का सहयोग
विशिष्ट अतिथि डॉ. विभु साहनी ने कहा कि केंद्र सरकार ने फार्मेसी रिसर्च के लिए 3000 करोड़ रुपए की सौगात दी है। उन्होंने बताया कि GPAT उत्तीर्ण छात्रों के लिए ₹1080 करोड़ की छात्रवृत्ति योजना भी शुरू की गई है। साथ ही अब डिप्लोमा धारक स्टूडेंट्स भी फार्मास्युटिकल पैकेजिंग इंडस्ट्री में करियर बना सकेंगे।
उन्होंने ‘हील बाय इंडिया’ योजना के तहत फार्मेसी छात्रों की बड़ी भागीदारी का उल्लेख किया और कहा कि अब फार्मासिस्टों को एक केंद्रीय आईडी मिलेगी। वे देशभर में कहीं भी कार्य कर सकेंगे। अटेंडेंस को आधार से ऑथेंटिकेट करने की व्यवस्था भी लागू की जाएगी।
एआई और बायोटेक को करें पाठ्यक्रम में शामिल- डॉ. शिरुमल्ला डॉ. शिरुमल्ला ने विश्वविद्यालय के कुलपति को सुझाव दिया कि वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए टीएमयू को अपने पाठ्यक्रम में एआई और बायोटेक्नोलॉजी को शामिल करना चाहिए। उन्होंने सेल-जीन थैरेपी, आरएनए थैरेपी, बायोसिमिलर ड्रग्स और बायो इनोवेशन जैसे आधुनिक उपचार विधियों पर भी विस्तार से चर्चा की और छात्रों को अपनी स्किल्स विकसित करने का आह्वान किया।
अतिथियों ने सोवनियर का विमोचन भी इसी अवसर पर किया।
उद्योग-अकादमिक समन्वय पर पैनल डिस्कशन कॉन्फ्रेंस के पहले दिन उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार स्किल डेवलपमेंट, इंटर्नशिप, इंडस्ट्री स्पॉन्सर्ड प्रोजेक्ट्स, पर्सनलाइज्ड मेडिसिन, बायोटेक्नोलॉजी और प्रोसेस ऑटोमेशन जैसे विषयों पर पैनल डिस्कशन हुआ। संचालन डॉ. आशीष सिंघई ने किया।
प्रमुख वक्ताओं की सहभागिता सम्मेलन में बीआईटीएस पिलानी के डॉ. हेमंत जाधव, सीडीआरआई लखनऊ के डॉ. नसीम अहमद सिद्दीकी, ल्यूपिन के कॉर्पोरेट अफेयर्स डायरेक्टर श्री अभिनव श्रीवास्तव, डीपीएसआरयू दिल्ली की डॉ. प्रीति जैन, प्रो. आर.के. द्विवेदी, डॉ. ज्योति पुरी, डॉ. अमित कंसल, डॉ. वैभव रस्तोगी, डॉ. पीयूष मित्तल, डॉ. शिवानी वार्ष्णेय, डॉ. शिप्रा कार्तिक, डॉ. कोमल मानवानी समेत अनेक विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।


