टमाटर की फसल को जोतने पर एक्शन में प्रशासन: इटावा में किसानों से मिले अधिकारी, प्रोसेसिंग प्लांट का सुझाव; अखिलेश ने साधा सरकार पर निशाना – Etawah News h3>
उवैस चौधरी | इटावा6 मिनट पहले
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इटावा में भरथना ब्लॉक के रमायन, नगला हरलाल, सरैया, भोली, मोढी और कुनेठी जैसे गांवों में खेतों की हरियाली पर ट्रैक्टर के पहिए ऐसे चले, जैसे किसान खुद अपने सपनों को रौंद रहे हों। टमाटर की लहलहाती फसल, जिसने कभी मुनाफे की उम्मीद जगाई थी, आज मिट्टी मोल बिक रही है। गुस्से, पीड़ा और बेबसी में डूबे किसान खुद ही अपनी फसल नष्ट कर रहे हैं।
दिल्ली, आगरा, कानपुर और मध्यप्रदेश तक टमाटर भेजने वाले भरथना क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें इस बार मंडी की कीमतों ने तोड़ दीं। टमाटर का रेट इतना गिर गया कि तुड़ाई, ट्रांसपोर्ट और लेबर का खर्च निकालना भी नामुमकिन हो गया। मजबूरन कई किसानों ने ट्रैक्टर से खेत जोत डाला।
मुफ्त में देने की अपील की थी पूर्व प्रधान और रिटायर्ड फौजी इंद्रेश बाबू शाक्य कहते हैं कि 9 बीघा में टमाटर लगाया था। एक बीघा की लागत 10-15 हजार आती है। अब दाम इतने गिर गए कि अगर मंडी ले भी जाएं तो उल्टा घाटा हो।” किसान राजवीर, रमेश, अजय, टिल्लू सक्सेना जैसे दर्जनों लोगों ने बताया कि जब खरीदार नहीं मिले तो लोगों से मुफ्त में टमाटर उठाने तक की अपील की गई, पर कोई नहीं आया।
टमाटर की तैयार फसल रेट गिरने से बर्बाद हो गई।
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80 हजार रुपए किए थे खर्च राजेश ने अपने आठ बीघा खेत में टमाटर की फसल की थी। एक बीघा में 8 से 10 हजार तक लागत आई। आठ बीघा खेत में लगभग 80 हजार रुपये खर्च किये थे। फसल बहुत अच्छी हुई, लेकिन भाव उम्मीद से कहीं ज्यादा नीचे चले गए। बाजार में 10 रुपए के तीन किलो टमाटर माइक लगाकर फुटकर में बेचे गए। थोक में कीमत दो रुपए भी मिलना मुश्किल हो गया।
टमाटर की तैयार फसल पर किसानों ने ट्रैक्टर चला दिया।
कभी एक लाख रुपए मिल जाते थे उन्होंने बताया कि कभी एक बीघा खेत के टमाटर एक लाख रुपए तक में बिक जाते थे, लेकिन इस बार एक बीघा फसल पांच हजार रुपए में भी नहीं बिक पाई है। क्षेत्र में राजेश के अलावा भी कई किसान हैं जिन्होंने कीमतों से परेशान होकर अपनी ही उगाई फसल को नष्ट कर दिया। इसमें नगला हरलाल के इंद्रेश शाक्य ने 10 बीघा, अरविंद कुमार ने छह बीघा, धर्मेंद्र सिंह शाक्य ने पांच बीघा, ओमप्रकाश ने पांच बीघा और रमायन के सुभाष चंद ने चार बीघा खेत में उगाई टमाटर की फसल खुद ही उजाड़ दी है।
तैयार फसल पर किसानों ने ट्रैक्टर चलाया।
अखिलेश ने उठाई आवाज दैनिक NEWS4SOCIALमें खबर प्रकाशित होते ही मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बिचौलियों और पूंजीपतियों को बढ़ावा दे रही है। किसान तबाह है।” इसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
प्रशासनिक टीम पहुंची, आश्वासन मिला, समाधान नहीं अपर जिलाधिकारी अभिनव रंजन के निर्देश पर जिला उद्यान अधिकारी श्याम सिंह, सांख्यिकी अधिकारी बी.एस. चौहान समेत कई अफसरों की टीम गांव पहुंची। किसानों से बातचीत हुई, कागज़ों में नोट लिखा गया, लेकिन समाधान कोई नहीं मिला। किसानों की आंखों में अब भी वही सवाल हैं— क्या अगली फसल भी इसी तरह तबाह होगी?
32 किसानों के खेत का टमाटर बर्बाद हो गया।
भूखे पेट कैसे चलाएं प्रोसेसिंग यूनिट जिला उद्यान अधिकारी ने पीएमएफई योजना बताई कि टमाटर से सॉस बनाइए, प्लांट लगाइए, सरकार अनुदान देगी। लेकिन किसान ओमप्रकाश का सवाल था, “जब जेब में पैसा नहीं, बैंक की किस्त और बिजली बिल सिर पर है, तो ये योजना सिर्फ किताबों में ही अच्छी लगती है।”
किसानों से सही दाम न मिलने पर फ्री में देने के लिए बुलाया जब कोई नहीं आया तो ट्रैक्टर से खेत जोत दिया।
फूलगोभी के बाद अब टमाटर कुछ महीने पहले भरथना क्षेत्र के किसानों को गोभी की फसल भी इसी तरह खेत में जोतनी पड़ी थी। अब वही हाल टमाटर का है। किसान मानसिक और आर्थिक दोनों तरह के संकट में हैं। राजवीर कुशवाह ने कहा कि हर सीजन में मेहनत करते हैं, लेकिन सिस्टम हमें हमेशा खेत में ही गिरा हुआ छोड़ देता है।
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उवैस चौधरी | इटावा6 मिनट पहले
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इटावा में भरथना ब्लॉक के रमायन, नगला हरलाल, सरैया, भोली, मोढी और कुनेठी जैसे गांवों में खेतों की हरियाली पर ट्रैक्टर के पहिए ऐसे चले, जैसे किसान खुद अपने सपनों को रौंद रहे हों। टमाटर की लहलहाती फसल, जिसने कभी मुनाफे की उम्मीद जगाई थी, आज मिट्टी मोल बिक रही है। गुस्से, पीड़ा और बेबसी में डूबे किसान खुद ही अपनी फसल नष्ट कर रहे हैं।
दिल्ली, आगरा, कानपुर और मध्यप्रदेश तक टमाटर भेजने वाले भरथना क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें इस बार मंडी की कीमतों ने तोड़ दीं। टमाटर का रेट इतना गिर गया कि तुड़ाई, ट्रांसपोर्ट और लेबर का खर्च निकालना भी नामुमकिन हो गया। मजबूरन कई किसानों ने ट्रैक्टर से खेत जोत डाला।
मुफ्त में देने की अपील की थी पूर्व प्रधान और रिटायर्ड फौजी इंद्रेश बाबू शाक्य कहते हैं कि 9 बीघा में टमाटर लगाया था। एक बीघा की लागत 10-15 हजार आती है। अब दाम इतने गिर गए कि अगर मंडी ले भी जाएं तो उल्टा घाटा हो।” किसान राजवीर, रमेश, अजय, टिल्लू सक्सेना जैसे दर्जनों लोगों ने बताया कि जब खरीदार नहीं मिले तो लोगों से मुफ्त में टमाटर उठाने तक की अपील की गई, पर कोई नहीं आया।
टमाटर की तैयार फसल रेट गिरने से बर्बाद हो गई।
80 हजार रुपए किए थे खर्च राजेश ने अपने आठ बीघा खेत में टमाटर की फसल की थी। एक बीघा में 8 से 10 हजार तक लागत आई। आठ बीघा खेत में लगभग 80 हजार रुपये खर्च किये थे। फसल बहुत अच्छी हुई, लेकिन भाव उम्मीद से कहीं ज्यादा नीचे चले गए। बाजार में 10 रुपए के तीन किलो टमाटर माइक लगाकर फुटकर में बेचे गए। थोक में कीमत दो रुपए भी मिलना मुश्किल हो गया।
टमाटर की तैयार फसल पर किसानों ने ट्रैक्टर चला दिया।
कभी एक लाख रुपए मिल जाते थे उन्होंने बताया कि कभी एक बीघा खेत के टमाटर एक लाख रुपए तक में बिक जाते थे, लेकिन इस बार एक बीघा फसल पांच हजार रुपए में भी नहीं बिक पाई है। क्षेत्र में राजेश के अलावा भी कई किसान हैं जिन्होंने कीमतों से परेशान होकर अपनी ही उगाई फसल को नष्ट कर दिया। इसमें नगला हरलाल के इंद्रेश शाक्य ने 10 बीघा, अरविंद कुमार ने छह बीघा, धर्मेंद्र सिंह शाक्य ने पांच बीघा, ओमप्रकाश ने पांच बीघा और रमायन के सुभाष चंद ने चार बीघा खेत में उगाई टमाटर की फसल खुद ही उजाड़ दी है।
तैयार फसल पर किसानों ने ट्रैक्टर चलाया।
अखिलेश ने उठाई आवाज दैनिक NEWS4SOCIALमें खबर प्रकाशित होते ही मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बिचौलियों और पूंजीपतियों को बढ़ावा दे रही है। किसान तबाह है।” इसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
प्रशासनिक टीम पहुंची, आश्वासन मिला, समाधान नहीं अपर जिलाधिकारी अभिनव रंजन के निर्देश पर जिला उद्यान अधिकारी श्याम सिंह, सांख्यिकी अधिकारी बी.एस. चौहान समेत कई अफसरों की टीम गांव पहुंची। किसानों से बातचीत हुई, कागज़ों में नोट लिखा गया, लेकिन समाधान कोई नहीं मिला। किसानों की आंखों में अब भी वही सवाल हैं— क्या अगली फसल भी इसी तरह तबाह होगी?
32 किसानों के खेत का टमाटर बर्बाद हो गया।
भूखे पेट कैसे चलाएं प्रोसेसिंग यूनिट जिला उद्यान अधिकारी ने पीएमएफई योजना बताई कि टमाटर से सॉस बनाइए, प्लांट लगाइए, सरकार अनुदान देगी। लेकिन किसान ओमप्रकाश का सवाल था, “जब जेब में पैसा नहीं, बैंक की किस्त और बिजली बिल सिर पर है, तो ये योजना सिर्फ किताबों में ही अच्छी लगती है।”
किसानों से सही दाम न मिलने पर फ्री में देने के लिए बुलाया जब कोई नहीं आया तो ट्रैक्टर से खेत जोत दिया।
फूलगोभी के बाद अब टमाटर कुछ महीने पहले भरथना क्षेत्र के किसानों को गोभी की फसल भी इसी तरह खेत में जोतनी पड़ी थी। अब वही हाल टमाटर का है। किसान मानसिक और आर्थिक दोनों तरह के संकट में हैं। राजवीर कुशवाह ने कहा कि हर सीजन में मेहनत करते हैं, लेकिन सिस्टम हमें हमेशा खेत में ही गिरा हुआ छोड़ देता है।



