घोसरावां आशापुरी मंदिर में नवरात्रि में महिलाओं का प्रवेश वर्जित h3>
घोसरावां आशापुरी मंदिर में नवरात्रि में महिलाओं का प्रवेश वर्जितघोसरावां आशापुरी मंदिर में नवरात्रि में महिलाओं का प्रवेश वर्जितघोसरावां आशापुरी मंदिर में नवरात्रि में महिलाओं का प्रवेश वर्जितघोसरावां…
Newswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफTue, 1 Oct 2024 04:50 PM
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घोसरावां आशापुरी मंदिर में नवरात्रि में महिलाओं का प्रवेश वर्जित तांत्रिक विधि से होती है पूजा अर्चना, सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम फोटो : मां आशापुरी : घोसरावां स्थित मां आशापुरी मंदिर। पावापुरी, निज संवाददाता। नालंदा जिले के घोसरावा स्थित आशापुरी मंदिर में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार नवरात्रि के दौरान महिलाओं का प्रवेश वर्जित रहेगा। इस मंदिर में विशेष रूप से तांत्रिक विधि से माता देवी की पूजा की जाएगी। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। नवरात्रि के समय जब देशभर में देवी की पूजा और आराधना जोरों पर होती है। तब इस मंदिर में तांत्रिक अनुष्ठानों का विशेष महत्त्व होता है। लेकिन, इसमें महिलाओं की उपस्थिति वर्जित है। पुजारी पुरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि आशापुरी मंदिर को तांत्रिक पूजा के लिए जाना जाता है। यहां की पूजा पद्धति सामान्य मंदिरों से अलग है। यहां मंत्र, यंत्र और तंत्र की विशेष साधनाएं की जाती है। मंदिर के पुजारियों और तांत्रिक साधकों का मानना है कि तांत्रिक अनुष्ठानों के दौरान अत्यधिक उग्र और तीव्र ऊर्जा का संचार होता है। इसे संभालना साधारण लोगों के लिए संभव नहीं होता, खासकर महिलाओं के लिए। तांत्रिक पूजा की इस प्रक्रिया में शक्ति का आह्वान किया जाता है, जो बेहद संवेदनशील और गूढ़ होती है। नवरात्रि के दौरान होगा विशेष अनुष्ठान : नवरात्रि के पावन अवसर पर मां आशापुरी मंदिर में तांत्रिक साधक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इनका उद्देश्य देवी मां की कृपा प्राप्त करना होता है। इन अनुष्ठानों के दौरान मंदिर के भीतर प्रवेश और पूजा केवल प्रशिक्षित तांत्रिक साधकों द्वारा ही की जाती है। महिलाओं के प्रवेश पर इस दौरान कड़ी पाबंदी होती है। क्योंकि तांत्रिक साधनाओं के प्रभाव से महिलाएं प्रभावित हो सकती हैं, ऐसा माना जाता है। महिलाओं का प्रवेश क्यों है वर्जित : पुजारियों और ग्रामीणों की मानें तो तांत्रिक परंपराओं के अनुसार इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान वर्जित है। क्योंकि इस समय साधनाएं अधिक शक्तिशाली और संवेदनशील होती हैं। यह मान्यता है कि तांत्रिक क्रियाओं के दौरान उत्पन्न ऊर्जा और शक्तियां महिलाओं पर विपरीत प्रभाव डाल सकती हैं। इसके अलावा मंदिर की पूजा पद्धति और तांत्रिक साधनाएं विशेष रूप से पुरुष साधकों के लिए निर्धारित की गयी है। यह सदियों से चली आ रही परंपरा आज भी बदस्तुर जारी है। सदियों पुरानी परंपरा अब भी जारी : मां आशापुरी मंदिर की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज भी बिना किसी बदलाव के निरंतर जारी है। स्थानीय लोग और मंदिर के अनुयायी इस प्रथा को देवी मां की इच्छा मानते हैं। इसे पूरी आस्था और श्रद्धा से निभाते हैं। उनका मानना है कि इस परंपरा का पालन करने से गांव और क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है। मंदिर प्रशासन भी इस नियम को देवी की पूजा की आवश्यक प्रक्रिया का हिस्सा मानता है। चर्चा और विवाद : आधुनिक समय में महिलाओं के अधिकारों और समानता के संदर्भ में यह परंपरा विवादों का विषय भी रही है। कई बार इसे लेकर सामाजिक और कानूनी बहसें भी उठी हैं। लेकिन, स्थानीय समुदाय और मंदिर प्रबंधन ने इसे धार्मिक परंपरा और आस्था का सवाल बताते हुए इसका पालन जारी रखा है। उनका कहना है कि यह मंदिर की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का एक अभिन्न हिस्सा है, इसे बदलना संभव नहीं है। घोसरावां की आशापुरी मंदिर भारतीय तांत्रिक परंपराओं का एक अद्वितीय स्थल है, जहां तांत्रिक साधनाएं और पूजा पद्धतियां सदियों से उसी आस्था और विश्वास के साथ निभाई जा रही है। नवरात्रि के दौरान महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी इस मंदिर की विशिष्टता को और बढ़ाती है। यहां परंपरा और आस्था का मेल आज भी अपने ऐतिहासिक रूप में पूरी तरह से जीवंत है।
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घोसरावां आशापुरी मंदिर में नवरात्रि में महिलाओं का प्रवेश वर्जित तांत्रिक विधि से होती है पूजा अर्चना, सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम फोटो : मां आशापुरी : घोसरावां स्थित मां आशापुरी मंदिर। पावापुरी, निज संवाददाता। नालंदा जिले के घोसरावा स्थित आशापुरी मंदिर में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार नवरात्रि के दौरान महिलाओं का प्रवेश वर्जित रहेगा। इस मंदिर में विशेष रूप से तांत्रिक विधि से माता देवी की पूजा की जाएगी। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। नवरात्रि के समय जब देशभर में देवी की पूजा और आराधना जोरों पर होती है। तब इस मंदिर में तांत्रिक अनुष्ठानों का विशेष महत्त्व होता है। लेकिन, इसमें महिलाओं की उपस्थिति वर्जित है। पुजारी पुरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि आशापुरी मंदिर को तांत्रिक पूजा के लिए जाना जाता है। यहां की पूजा पद्धति सामान्य मंदिरों से अलग है। यहां मंत्र, यंत्र और तंत्र की विशेष साधनाएं की जाती है। मंदिर के पुजारियों और तांत्रिक साधकों का मानना है कि तांत्रिक अनुष्ठानों के दौरान अत्यधिक उग्र और तीव्र ऊर्जा का संचार होता है। इसे संभालना साधारण लोगों के लिए संभव नहीं होता, खासकर महिलाओं के लिए। तांत्रिक पूजा की इस प्रक्रिया में शक्ति का आह्वान किया जाता है, जो बेहद संवेदनशील और गूढ़ होती है। नवरात्रि के दौरान होगा विशेष अनुष्ठान : नवरात्रि के पावन अवसर पर मां आशापुरी मंदिर में तांत्रिक साधक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इनका उद्देश्य देवी मां की कृपा प्राप्त करना होता है। इन अनुष्ठानों के दौरान मंदिर के भीतर प्रवेश और पूजा केवल प्रशिक्षित तांत्रिक साधकों द्वारा ही की जाती है। महिलाओं के प्रवेश पर इस दौरान कड़ी पाबंदी होती है। क्योंकि तांत्रिक साधनाओं के प्रभाव से महिलाएं प्रभावित हो सकती हैं, ऐसा माना जाता है। महिलाओं का प्रवेश क्यों है वर्जित : पुजारियों और ग्रामीणों की मानें तो तांत्रिक परंपराओं के अनुसार इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान वर्जित है। क्योंकि इस समय साधनाएं अधिक शक्तिशाली और संवेदनशील होती हैं। यह मान्यता है कि तांत्रिक क्रियाओं के दौरान उत्पन्न ऊर्जा और शक्तियां महिलाओं पर विपरीत प्रभाव डाल सकती हैं। इसके अलावा मंदिर की पूजा पद्धति और तांत्रिक साधनाएं विशेष रूप से पुरुष साधकों के लिए निर्धारित की गयी है। यह सदियों से चली आ रही परंपरा आज भी बदस्तुर जारी है। सदियों पुरानी परंपरा अब भी जारी : मां आशापुरी मंदिर की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज भी बिना किसी बदलाव के निरंतर जारी है। स्थानीय लोग और मंदिर के अनुयायी इस प्रथा को देवी मां की इच्छा मानते हैं। इसे पूरी आस्था और श्रद्धा से निभाते हैं। उनका मानना है कि इस परंपरा का पालन करने से गांव और क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है। मंदिर प्रशासन भी इस नियम को देवी की पूजा की आवश्यक प्रक्रिया का हिस्सा मानता है। चर्चा और विवाद : आधुनिक समय में महिलाओं के अधिकारों और समानता के संदर्भ में यह परंपरा विवादों का विषय भी रही है। कई बार इसे लेकर सामाजिक और कानूनी बहसें भी उठी हैं। लेकिन, स्थानीय समुदाय और मंदिर प्रबंधन ने इसे धार्मिक परंपरा और आस्था का सवाल बताते हुए इसका पालन जारी रखा है। उनका कहना है कि यह मंदिर की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का एक अभिन्न हिस्सा है, इसे बदलना संभव नहीं है। घोसरावां की आशापुरी मंदिर भारतीय तांत्रिक परंपराओं का एक अद्वितीय स्थल है, जहां तांत्रिक साधनाएं और पूजा पद्धतियां सदियों से उसी आस्था और विश्वास के साथ निभाई जा रही है। नवरात्रि के दौरान महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी इस मंदिर की विशिष्टता को और बढ़ाती है। यहां परंपरा और आस्था का मेल आज भी अपने ऐतिहासिक रूप में पूरी तरह से जीवंत है।




