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मधुमेह व रक्तचाप के रोगी रहें अलर्ट, आ सकते हैं ह्रदय रोग की चपेट में

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मधुमेह व रक्तचाप के रोगी रहें अलर्ट, आ सकते हैं ह्रदय रोग की चपेट में

मधुमेह व रक्तचाप के रोगी रहें अलर्ट, आ सकते हैं ह्रदय रोग की चपेट में

मधुमेह व रक्तचाप के रोगी रहें अलर्ट, आ सकते हैं ह्रदय रोग की चपेट मेंमधुमेह व रक्तचाप के रोगी रहें अलर्ट, आ सकते हैं ह्रदय रोग की चपेट मेंमधुमेह व रक्तचाप के रोगी रहें अलर्ट, आ सकते हैं ह्रदय रोग की…

Newswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफMon, 30 Sep 2024 04:19 PM
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मधुमेह व रक्तचाप के रोगी रहें अलर्ट, आ सकते हैं ह्रदय रोग की चपेट में 15 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में दिल की परेशानी से हैं परेशान मोटापा सबसे बड़ा खतरा, वजन रखें नियंत्रित 30 के बाद हर 6 माह पर कराते रहें रक्तचाप व मधुमेह की जांच परिवारिक इतिहास वाले युवा 20 के बाद से ही कराएं नियमित जांच सदर अस्पताल में शिविर में 128 रोगियों की हुई जांच 19 लोग मिले खैनी, सिगरेट व तंबाकू खाने वाले फोटो : सीएस हर्ट : सदर अस्पताल में सोमवार को शिविर में रक्तचाप की जांच कराते सीएस डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह व अन्य। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। मधुमेह व रक्तचाप के रोगी अलर्ट रहें। ऐस ेलोग कभी भी ह्रदय रोग की चपेट में आ सकते हैं। 15 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में दिल की परेशानी से परेशान हैं। इसके लिए मोटापा सबसे बड़ा खतरा है। इसलिए शुरू से ही अपने वजन को नियंत्रित रखें। 30 साल की उम्र के बाद हर छह माह पर रक्तचाप व मधुमेह की जांच कराते रहें। इस बीमारी के परिवारिक इतिहास वाले युवा 20 की उम्र के बाद से ही इसकी नियमित जांच कराएं। विश्व ह्रदय दिवस पर सदर अस्पताल में सोमवार को शिविर लगाकर 128 रोगियों की जांच की गयी। इनमें से 19 लोग खैनी, सिगरेट व तंबाकू खाने वाले मिले। शिविर में सीएस डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह ने भी अपनी जांच करवाई। सीएस ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण आज युवावर्ग भी दिल की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। पहले यह आमतौर पर 40 साल के बाद ही इस तरह की परेशानी होती थी। अब उम्र की कोई सीमा नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण मोटापा है। गैर संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. राममोहन सहाय ने कहा कि ह्रदय रोग होने के पहले शरीर कई तरह के संकेत देता है। इसे समझना चाहिए। आज की बदलती जीवनशैली और खानपान ही लोगों को बीमार बना रही है। ऐसे में हमें खानपान के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। शिविर में रोगियों की जांच नर्सिंग स्टाफ गीता कुमारी, ममता कुमारी, मंजुला कुमारी, अंतरा कुमारी व अन्य ने किया। मौके पर डीपीएम श्याम कुमार निर्मल, एसीएमओ डॉ. कुमकुम प्रसाद, डॉ. प्रिया, आशीष कुमार, रिंकी कुमारी व अन्य मौजूद थे। मेटाबोलिक सिंड्रोम से बढ़ रहा ह्रदय रोग का जोखिम : जेनरल फिजिसियन सह ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि मोटाबोलिक सिंड्रोम का मतलब है ह्रदय संबंधी बीमारी के लिए विशिष्ट जोखिम कारकों का समूह होना। मधुमेह, रक्तचाप, स्ट्रोक व अन्य कारक ह्रदय रोग होने के जोखिम को काफी बढ़ा देते हैं। पेट का मोटापा इसका सबसे बड़ा कारण है। एक स्वस्थ महिला की कमर की परिधि 35 इंच व पुरुष के कमर की परिधि 40 इंच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। मेटाबोलिक सिंड्रोम को हिंदी में चयापचय से जुड़ा सिंड्रोम (रोग के अनेक लक्षण) कहते हैं। दरअसल यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें ह्रदय रोग के लिए कई जोखिम कारक एक साथ मौजूद होते हैं। इसमें पेट का मोटापा, उच्च रक्तचाप, खराब सर्करा स्तर, कम कॉलेस्ट्रॉल, उच्च ट्राइग्लिसराइड स्तर जैसे लक्षण आते हैं। इससे बचने के लिए वजन को नियंत्रित रखें, स्वस्थ व पौष्टिक आहार लें, सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन न करें, शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। डेड फूड बिगाड़ रहा लोगों की सेहत, बढ़ रही मोटापा की शिकायत : डॉ. सहाय ने कहा कि डेड फूड (मरा हुआ भोजन) लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है। लोग फ्रीज में चार से पांच दिनों तक रखी हरी सब्जियों का भी इस्तेमाल करते हैं। वह भले ही फ्रीज से निकलने का बाद ताजा दिखती हो, लेकिन उसकी पोषण तत्व खत्म या काफी कम हो जाते हैं। इतना ही नहीं लोग पीज्जा, बर्गर, कुरकुरे जैसे फास्ट फूड व रेडी टू युज भोजन का भी पूरा उपयोग कर रहे हैं। शहरों में तो इसका प्रचलन चल चुका है। इन्हें स्वादिष्ट बनाने के लिए कई तरह के रसायनों के साथ ही अधिक नमक व मिर्च का उपयोग किया जाता है। जो सेहत के लिए काफी खतरनाक है। वहीं डॉ. रंजन ने बताया कि मेटाबोलिक सिंड्रोम के कारण बाद में लोगों को फैटी लीवर, ब्रेन स्ट्रोक, दिल की समस्या, किडनी की समस्या से परेशान होना पड़ता है। इससे बचने के लिए ताजा व संतुलित आहार लें। रोजाना शारीरिक श्रम करें।

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