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Bihar Land Survey: गैरमजरुआ आम व खास के साथ भूदान की जमीन का भी सर्वे, ACS ने सभी जिलों से मांगा ब्योगा

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Bihar Land Survey: गैरमजरुआ आम व खास के साथ भूदान की जमीन का भी सर्वे, ACS ने सभी जिलों से मांगा ब्योगा

Bihar Land Survey: गैरमजरुआ आम व खास के साथ भूदान की जमीन का भी सर्वे, ACS ने सभी जिलों से मांगा ब्योगा

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी डीएम को पत्र लिखा है। उन्होंने सभी जिलों को प्रारूप भेजते हुए अपने यहां की ऐसी जमीनों का ब्योरा देने को कहा है। सभी सरकारी कार्यालयों और विभाग को अपनी जमीन का ब्योरा सर्वे के लिए उपलब्ध कराना है।

विशेष भूमि सर्वेक्षण के तहत राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सामान्य रैयतों के अलावा कई किस्म की जमीन का भी सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी सरकारी विभाग व कार्यालयों की जमीन के अलावा, गैरमजरुआ आम व गैरमजरुआ खास, कैसरे हिंद, बंदोबस्ती की जमीन के साथ-साथ अधिग्रहित और भूदान से मिली जमीन का भी सर्वे किया जाएगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इसके लिए सभी जिलों के डीएम से रिपोर्ट की मांग की है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी डीएम को पत्र लिखा है। उन्होंने सभी जिलों को प्रारूप भेजते हुए अपने यहां की ऐसी जमीनों का ब्योरा देने को कहा है। सभी सरकारी कार्यालयों और विभाग को अपनी जमीन का ब्योरा सर्वे के लिए उपलब्ध कराना है। वहीं गैरमजरुआ आम व खास की जमीन का ब्योरा उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी संबंधित सीओ को दी जाएगी। इसके अलावा, बंदोबस्त की गई जमीन का ब्योरा भी संबंधित अंचलाधिकारी उपलब्ध कराएंगे। इन सबके अलावा, भूदान में मिली जमीन का ब्योरा संबंधित अपर समाहर्ता द्वारा प्राप्त किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने जिला प्रशासन को नौ प्रकार की रिपोर्ट का प्रारूप उपलब्ध कराया है। इसे अंचलाधिकारी, अपर समाहर्ता, डीसीएलआर और भू-अर्जन पदाधिकारी भरकर जमा करेंगे।

ये भी पढ़े:जमीन सर्वे वाले फॉर्म में ज्यादातर लोग कर रहे यह 2 बड़ी गलतियां, यहां समझ लें

अपर मुख्य सचिव ने अपने पत्र में कहा है कि इस रिपोर्ट की एक प्रति विभाग को भेजी जाएगी, वहीं दूसरी प्रति जिले के बंदोबस्त पदाधिकारी को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि श्रेणियों की जमीन का भी सर्वेक्षण संभव हो सके। जिले में करीब 750 दस्तावेजों की चल रही जांच जिले में भूदान से प्राप्त जमीन की खोज अभी जारी है। करीब 750 दानपत्रों की संपुष्टि के लिए जांच चल रही है। दोनों डीसीएलआर को भूदान कार्यालय से संपुष्टि के लिए दानपात्र दिए गए है, लेकिन इसमें बड़ी संख्या में दानपात्र गलत निकले हैं। इसकी जांच की जा रही है।

विशेष भूमि सर्वेक्षण के तहत राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सामान्य रैयतों के अलावा कई किस्म की जमीन का भी सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी सरकारी विभाग व कार्यालयों की जमीन के अलावा, गैरमजरुआ आम व गैरमजरुआ खास, कैसरे हिंद, बंदोबस्ती की जमीन के साथ-साथ अधिग्रहित और भूदान से मिली जमीन का भी सर्वे किया जाएगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इसके लिए सभी जिलों के डीएम से रिपोर्ट की मांग की है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी डीएम को पत्र लिखा है। उन्होंने सभी जिलों को प्रारूप भेजते हुए अपने यहां की ऐसी जमीनों का ब्योरा देने को कहा है। सभी सरकारी कार्यालयों और विभाग को अपनी जमीन का ब्योरा सर्वे के लिए उपलब्ध कराना है। वहीं गैरमजरुआ आम व खास की जमीन का ब्योरा उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी संबंधित सीओ को दी जाएगी। इसके अलावा, बंदोबस्त की गई जमीन का ब्योरा भी संबंधित अंचलाधिकारी उपलब्ध कराएंगे। इन सबके अलावा, भूदान में मिली जमीन का ब्योरा संबंधित अपर समाहर्ता द्वारा प्राप्त किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने जिला प्रशासन को नौ प्रकार की रिपोर्ट का प्रारूप उपलब्ध कराया है। इसे अंचलाधिकारी, अपर समाहर्ता, डीसीएलआर और भू-अर्जन पदाधिकारी भरकर जमा करेंगे।

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अपर मुख्य सचिव ने अपने पत्र में कहा है कि इस रिपोर्ट की एक प्रति विभाग को भेजी जाएगी, वहीं दूसरी प्रति जिले के बंदोबस्त पदाधिकारी को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि श्रेणियों की जमीन का भी सर्वेक्षण संभव हो सके। जिले में करीब 750 दस्तावेजों की चल रही जांच जिले में भूदान से प्राप्त जमीन की खोज अभी जारी है। करीब 750 दानपत्रों की संपुष्टि के लिए जांच चल रही है। दोनों डीसीएलआर को भूदान कार्यालय से संपुष्टि के लिए दानपात्र दिए गए है, लेकिन इसमें बड़ी संख्या में दानपात्र गलत निकले हैं। इसकी जांच की जा रही है।

भूदान की जमीन बड़ी संख्या में गायब, संपुष्टि नहीं

राज्य के कई जिलों में भूदान में मिली जमीन का आंकड़ा ही नहीं मिल रहा है। भूदान की गई जमीन की संपुष्टि के लिए जब डीसीएलआर स्तर पर जांच की गई तो बड़ी संख्या में ऐसे दस्तावेज मिले, जिनके पास जमीन थी ही नहीं लेकिन उन्होंने दानपत्र बना दिया। इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में ऐसे भी जमीन के दस्तावेज मिले, जिसमें दानदाता ने तो दान दिया पर उनके वंशजों ने उस जमीन को या तो अपने कब्जे में ले लिया या फिर दूसरे के नाम से उसे निबंधित कर दिया। इस स्थिति में राज्य में सैकड़ों एकड़ भूदान की जमीन की संपुष्टि नहीं हो पायी। ऐसे में विशेष भूमि सर्वेक्षण में इसे शामिल करने के लिए उपलब्ध दानपत्र और जमीन की संपुष्टि आवश्यक होगी, जिसमें काफी समय लग सकता है।

राज्य के कई जिलों में भूदान में मिली जमीन का आंकड़ा ही नहीं मिल रहा है। भूदान की गई जमीन की संपुष्टि के लिए जब डीसीएलआर स्तर पर जांच की गई तो बड़ी संख्या में ऐसे दस्तावेज मिले, जिनके पास जमीन थी ही नहीं लेकिन उन्होंने दानपत्र बना दिया। इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में ऐसे भी जमीन के दस्तावेज मिले, जिसमें दानदाता ने तो दान दिया पर उनके वंशजों ने उस जमीन को या तो अपने कब्जे में ले लिया या फिर दूसरे के नाम से उसे निबंधित कर दिया। इस स्थिति में राज्य में सैकड़ों एकड़ भूदान की जमीन की संपुष्टि नहीं हो पायी। ऐसे में विशेष भूमि सर्वेक्षण में इसे शामिल करने के लिए उपलब्ध दानपत्र और जमीन की संपुष्टि आवश्यक होगी, जिसमें काफी समय लग सकता है।

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