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Emergency 1975: कौन गिरफ्तार हुआ था इमरजेंसी में और किसका घर टूटा था?

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Emergency 1975: कौन गिरफ्तार हुआ था इमरजेंसी में और किसका घर टूटा था?

Emergency 1975: कौन गिरफ्तार हुआ था इमरजेंसी में और किसका घर टूटा था?

नई दिल्लीः 25 जून 1975 को राजधानी के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की विशाल रैली हुई। देश में तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ माहौल बना हुआ था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें चुनावी गड़बड़ियों के लिए दोषी ठहराया था। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में उन्हें सत्ता से बेदखल करने के लिए आंदोलन चलाया जा रहा था। रैली के बाद सरकार ने 25 जून की रात को देश में इमरजेंसी लागू कर दी। कई शिखर राष्ट्रीय नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। उसी रात को अरुण जेटली को पुलिस गिरफ्तार करने उनके नारायणा वाले घर पहुंची। देर रात पुलिस वालों ने उनके घर का दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खोला गया। पुलिसवाले अरुण जेटली के पिताजी से बात कर रहे थे। अरुण जेटली यह सब सुन रहे थे। वह तब ही घर के पिछले भाग से फरार हो गए। इमरजेंसी लगने के कारण दिल्ली के कई नेताओं जैसे विजय गोयल, विजय कुमार मल्होत्रा, मदन लाल खुराना, समाजवादी नेता राजकुमार जैन वगैरह को गिरफ्तार कर लिया गया था।Sanjay Gandhi के लिए कैसा रहा इमरजेंसी से ठीक बाद वाला चुनाव? अमेठी से पहली बार हारा था कोई कांग्रेसी

किसका घर टूटा था इमरजेंसी में?

देश में 1975 में इमरजेंसी लगने के दौरान कनॉट प्लेस में लंबे समय से चल रहे इंडियन कॉफी हाउस को ध्वस्त कर दिया गया। यह राजधानी के राजनीतिक कार्यकर्ताओं, लेखकों, रंगकर्मियों, ट्रेड यूनियन से जुड़े लोगों वगैरह के बैठने का अड्डा था। इसे तोड़े जाने की खबर जब तिहाड़ जेल में पहुंची तो वहां बंद राजनीतिक कार्यकर्ताओं में उदासी छा गई। समाजवादी नेता राजकुमार जैन भी राजनीतिक बंदी थे। आजकल ईस्ट दिल्ली में रह रहे जैन साहब कहते हैं कि जब हमें मालूम चला कि हमारा प्रिय कॉफी हाउस टूट गया है तो लगा कि जैसे कि किसी ने हमारा घर ही तोड़ दिया हो। बहरहाल, कॉफी हाउस की जगह पर पालिका बाजार बना। हालांकि इसके बनने से बहुत से लोग नाखुश थे, क्योंकि कनॉट प्लेस में पहले से ही जनपथ, मोहन सिंह प्लेस, शंकर मार्केट और सुपर बाजार थे। पालिका बाजार को एनडीएमसी ने बनवाया था। यहां पर सबसे पहले पंचकुइयां रोड के उन दुकानदारों को जगह दी गई, जिनकी दुकानें कनॉट प्लेस से सुचेता कृपलानी अस्पताल के बीच में थीं।

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इमरजेंसी में डीडीए का ड्रॉ

जब देश में इमरजेंसी लगी हुई थी, उस दौर में डीडीए ने मुनिरका के फ्लैट्स का ड्रॉ निकाला था। डीडीए ने मुनिरका में फ्लैट बेहद शानदार तरीके से बनाए थे। यह फ्लैट डीडीए के वाइस चेयरमैन जगमोहन की सीधी निगरानी में बने थे। यह डीडीए की शुरुआती कॉलोनियों में से एक थी। अब भी इधर फ्लैट लेने के लिए तमाम लोग कोशिश करते हैं। कहते हैं कि जिन्हें तब मुनिरका का डीडीए फ्लैट मिला था, उनसे डीडीए के अफसर कहते थे कि आपकी लॉटरी निकल गई। मुनिरका के डीडीए फ्लैट्स में हजारों लोग आते-जाते रहे। इनकी असल कीमत 45 हजार रुपये रखी गई थी। जिन्हें यह घर मिले थे, उन्हें आधी राशि पहले जमा करवानी थी और बाकी किस्तों में देनी थी। हालांकि तब एक साथ 20-25 हजार रुपये निकालना कोई आसान बात नहीं थी।

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