Delhi Pollution: दशहरे के बाद 6 साल में सबसे साफ रही दिल्ली की हवा लेकिन बढ़ गया शोर h3>
राजधानी में दशहरे से करीब 15 दिन पूर्व ही पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। ऐसे में लोगों को पटाखे नहीं मिले। रावण दहन आयोजन समितियों ने भी दहन के समय आतिशबाजी का इस्तेमाल नहीं किया। अधिकारियों के अनुसार, इस बार दशहरा जल्दी आया है। वहीं पटाखे भी सामान्य से 80 प्रतिशत तक कम जले हैं। 2021 में इतने पटाखे जले थे कि लग रहा था दिवाली आ गई है।
| साल | दशहरे पर | दशहरे के अगले दिन |
| 2022 | 211 | 79 (5 और 6 अक्टूबर) |
| 2021 | 198 | 284 (15 और 16 अक्टूबर) |
| 2020 | 349 | 353 (25 और 26 अक्टूबर) |
| 2019 | 112 | 173 (8 और 9 अक्टूबर) |
| 2018 | 276 | 326 (19 और 20 अक्टूबर) |
| 2017 | 198 | 196 (30 सितंबर और एक अक्टूबर) |
| 2016 | 283 | 223 (11 और 12 अक्टूबर) |
| 2015 | – | 292 (23 अक्टूबर) |
…लेकिन ध्वनि प्रदूषण बढ़ा
आतिशबाजी काफी कम होने और तेज हवाएं चलने से हवा में प्रदूषण भले न रहा हो लेकिन दशहरे की रात ध्वनि प्रदूषण काफी अधिक रहा। अधिकारियों के अनुसार, दहन में आतिशबाजी की जगह साउंड इफेक्ट का इस्तेमाल, मेलों के आयोजनों की वजह से दशहरे की रात शोर काफी अधिक बढ़ गया है।
डीपीसीसी के रियल टाइम मॉनिटरिंग डेटा के अनुसार, चांदनी चौक के सबसे पास वाले स्टेशन कश्मीरी गेट में शाम 6 से रात 10 बजे तक शोर का स्तर 66.9 डेसिबल, द्वारका सेक्टर-8 में यह शाम 4 से रात 11 बजे तक 70 डेसिबल से अधिक रहा। पटपड़गंज में भी ध्वनि प्रदूषण शाम 6 से 8 बजे तक तय मानकों से कहीं अधिक रहा।
ध्वनि प्रदूषण का अधिकतम स्तर (डेसिबल में)
- कश्मीरी गेट – 66.5 (रात 8 बजे)
- सेक्टर-8 द्वारका – 76.4 (रात 9 बजे)
- पटपड़गंज – 80.8 (रात 8 बजे)
- अशोक विहार – 65.2 (रात 8 बजे)
- शाहदरा – 67.9 (शाम 5 बजे)
नोट – रिहायशी इलाकों में शोर का सामान्य स्तर 55 डेसिबल है।




