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बेटी नानी के घर से लौट रही थी, रास्ते में TMC समर्थकों ने गैंगरेप किया, पुलिस बोली- दूसरी बेटी को देखो, उसका भी रेप हो सकता है

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बेटी नानी के घर से लौट रही थी, रास्ते में TMC समर्थकों ने गैंगरेप किया, पुलिस बोली- दूसरी बेटी को देखो, उसका भी रेप हो सकता है


बेटी नानी के घर से लौट रही थी, रास्ते में TMC समर्थकों ने गैंगरेप किया, पुलिस बोली- दूसरी बेटी को देखो, उसका भी रेप हो सकता है

हाइलाइट्स:

  • फैक्ट फाइंडिंग टीम ने बंगाल हिंसा को लेकर केंद्र को सौंपी रिपोर्ट
  • टीम ने केंद्रीय एजेंसियों से लेकर SC तक से की है हस्तक्षेप की मांग
  • रिपोर्ट में बंगाल में हिंसा के शिकार तमाम परिवारों की दर्दनाक आपबीती

नई दिल्ली
‘मेरी बेटी नानी के घर से लौट रही थी। रास्ते में अगवा कर टीएमसी समर्थकों ने गैंगरेप किया। नौ मई की घटना की दस मई को पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। मेडिकल जांच के बाद बेटी को पुलिस ने शेल्टर होम भेज दिया। पुलिस ने यह कहकर रेप पीड़ित बेटी से नहीं मिलने दिया कि जाओ दूसरी बेटी को देखो, उसके साथ भी रेप हो सकता है।’

कुछ ऐसी ही दर्दभरी आपबीती सुनाई हैं पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा के शिकार पीड़ित परिवारों ने। ग्रुप ऑफ इंटलेक्‍चुअल्‍स एंड एकेडमीशियन्स (जीआईए) नाम की टीम ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के शिकार परिवारों से मुलाकात कर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी को सौंपी है। इस रिपोर्ट में बंगाल में हिंसा के शिकार तमाम परिवारों की दर्दनाक दास्‍तानें हैं।

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सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट मोनिका अरोड़ा, दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर सोनाली, डॉ. श्रुति मिश्रा, प्रोफेसर विजिता सिंह अग्रवाल आदि की टीम ने यह फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट तैयार की है।

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128 पन्‍नों की रिपोर्ट
‘खेला इन बंगाल’ नाम के शीर्षक से पेश इस 128 पेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बंगाल में जमकर हिंसा की गई। कई लोगों की हत्या की गई। बम से हमले किए गए। महिलाओं के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाएं हुईं।

सुप्रीम कोर्ट से हस्‍तक्षेप की मांग
पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में सबसे ज्यादा गरीब अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग प्रभावित हुए। फैक्ट फाइंडिंग टीम ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज के नेतृत्व में हिंसा की जांच के लिए एसआईटी गठन की सिफारिश की है। फैक्ट फाइंडिंग टीम ने केंद्रीय एजेंसियों से लेकर सभी आयोगों और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग भी की है।



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