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kerala model against corona: क्योंकि हर एक डोज जरूरी है… छा गया केरल का वैक्सीनेशन मॉडल, वेस्टेज वैक्सीन का भी कर लिया इस्तेमाल

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kerala model against corona: क्योंकि हर एक डोज जरूरी है… छा गया केरल का वैक्सीनेशन मॉडल, वेस्टेज वैक्सीन का भी कर लिया इस्तेमाल


kerala model against corona: क्योंकि हर एक डोज जरूरी है… छा गया केरल का वैक्सीनेशन मॉडल, वेस्टेज वैक्सीन का भी कर लिया इस्तेमाल

हाइलाइट्स:

  • केन्द्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक केरल और आंध्र प्रदेश सिर्फ दो ऐसे राज्य हैं जिन्होंने केन्द्र से मिली वैक्सीन का बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया है
  • इन राज्यों को केन्द्र से जितनी डोज मिले उनसे ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई गई।
  • इन राज्यों ने केन्द्र की तरफ से संभावित वेस्टेज के रूप में मिली वैक्सीन के डोज का भी समुचित तरीके से इस्तेमाल करते हुए टीकाकरण किया।
  • राज्य अपने प्रशिक्षित हेल्थ वर्कर्स की फौज और जनता के सहयोगात्मक रवैये से राज्य यह उपलब्धि हासिल कर पाया।


कोच्चि

एक मई को जारी केन्द्र सरकार के आंकड़ों बताते हैं कि केरल और आंध्र प्रदेश सिर्फ दो ऐसे राज्य हैं जिन्होंने केन्द्र से मिली वैक्सीन की एक-एक बूंद का बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया है । इन राज्यों को केन्द्र से जितनी डोज मिले उनसे ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई गई। इन राज्यों ने केन्द्र की तरफ से संभावित वेस्टेज के रूप में मिली वैक्सीन के डोज का भी समुचित तरीके से इस्तेमाल करते टीकाकरण अभियान में किया।

केरल में वैक्सीन का जीरो वेस्टेज इसलिए हुआ क्योंकि राज्य में वैक्सीन के स्टोरेज के लिए बेहतर तरीके से प्रोटोकॉल का पालन किया गया। राज्य अपने प्रशिक्षित हेल्थ वर्कर्स की फौज और जनता के सहयोगात्मक रवैये से राज्य यह उपलब्धि हासिल कर पाया।

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केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने मंगलवार को ट्वीट कर जानकारी दी कि केरल को केंद्र सरकार से 73 लाख 38 हजार 806 वैक्सीन की डोज़ मिली हैं, जबकि हमने 74 लाख 26 हजार 164 डोज का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि हमने हर वायल में वेस्टेज के हिसाब से मिली अतिरिक्त डोज का भी सही इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि हमारे स्वास्थ्यकर्मी खासकर नर्सें पूरी तरह कुशल हैं और इसके लिए वे बधाई की पात्र हैं।

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केरल के सोशल सिक्योरिटी मिशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉक्टर मोहम्मद अशील ने कहा, ” हमारी नर्सें अपने काम में माहिर हैं। हमने उनसे वैक्सीन के जीरो वेस्टेज के लिए कहा था। राज्य की नर्सों ने यह लक्ष्य हासिल कर लिया।”

पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी बुधवार को केरल मॉडल की तारीफ करते हुए ट्वीट किया था। उन्होंने ट्वीट में राज्य के स्वास्थ्य कर्मियों की तारीफ की थी।

आमतौर पर वैक्सीन वेस्टेज तीन स्तरों पर होती है। पहला वैक्सीन को लाने-लेजाने पर, दूसरा कोल्ड चेन और तीसरा जहां वैक्सीन लगाई जाती है। केरल सरकार ने इन सभी बिन्दुओं पर कड़ाई से प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जीरो वेस्टेज की रणनीति अपनाई और यह लक्ष्य हासिल हो गया।

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केन्द्र की तरफ से जारी वैक्सीन वेस्टेज की जारी सूची में तेलंगाना सबसे ऊपर था, जहां 17.6 फीसदी वैक्सीन बर्बाद हुईं, जबकि 11.6 फीसदी के साथ दूसरी स्थान पर है। जबकि वेस्टेज का पूरे देश का औसत 6.5 फीसदी है।

केरल के पास डॉक्‍टर और नर्सों की बड़ी खेप तैयार करने की अपेक्षाकृत ज्‍यादा क्षमता है। 2016 तक राज्‍य में 20 ऑक्‍सीलरी नर्सिंग और मिडवाइफरी ट्रेनिंग इंस्‍टीट्यूट थे। इनमें से 9 सरकारी थे। 204 जनरल नर्सिंग और मिडवाइफरी ट्रेनिंग इंस्‍टीट्यूट थे। इनमें से 16 सरकारी थे। बीएससी (नर्सिंग) इंस्‍टीट्यूट की संख्‍या 133, एमएससी (नर्सिंग) की डिग्री देने वाले संस्‍थानों की संख्‍या 68 थी। नर्सों की ट्रेनिंग के मामले में केरल देश में अव्‍वल है।



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