कोई भी काल रहा हो मानव के इतिहास में राजा का पद बहुत महत्वपूर्ण रहा है. अगर हम भारत के इतिहास की बात करें, तो हमारे इतिहास में भी वैदिक काल से ही राजा का वर्णन मिलना शुरू हो जाता है. लेकिन यह जानना रोचक है कि यदि हम भारत के इतिहास की बात करें, तो किसे हम भारत का पहला सम्राट मानेंगें.
महाजनपद काल जो की उत्तरवैदिक काल के बाद शुरू होता है. महाजनपद काल में हमें राजा शब्द मिल जाता है. लेकिन उन राजाओं का क्षेत्र इतना बड़ा नहीं हो पाया कि जिस पर शासन करने वाले राजा को हम भारत के सम्राट के रूप में मान्यता दे पाएं. लेकिन बिहार में स्थित मगध साम्राज्य पर राज करने वाले और भारत के महान् शासकों की श्रेणी में स्थान रखने वाले चंद्रगुप्त मौर्य को भारत का पहला सम्राट माना जाता है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि भारत के इतने बड़े क्षेत्र पर राज करने का शौभाग्य चंद्रगुप्त मौर्य से पहले किसी भी शासक को प्राप्त नहीं हुआ था.
भारत का पहला सम्राट तक के सफर में चंद्रगुप्त मौर्य को बहुत संघर्ष करना पड़ा. जिसका हर कदम पर चाणक्य नामक उनके गुरू ने मार्गदर्शन किया. चंद्रगुप्त के सम्राट बनने से पहले मगध के क्षेत्र पर नंद वंश के शासक धनानंद शासन करता था.
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बताया जाता है कि यह शासक बहुत ही विलासिता पूर्ण जीवन व्यतीत करता था. धनानंद जनता पर बहुत अत्याचार करता था. चंद्रगुप्त ने धनानंद को पराजित करते हुए मगध के राज्य पर अधिकार कर लिया और मौर्य वंश की स्थापना की. इसके साथ ही नंद वंश का भी अंत हो जाता है. अपने कौशल और चाणक्य के मार्गदर्शन में चंद्रगुप्त मौर्य़ ने भारत के पहले सम्राट होने का गौरव हासिल किया.

















