3 करोड़ की रिश्वत: IPS अधिकारी की गिरफ़्तारी पर कोर्ट ने CBI की जांच पर उठाए गंभीर सवाल
नकली दवाओं के एक रैकेट से जुड़े 3 करोड़ रुपये के कथित रिश्वत मामले में हरियाणा काडर के IPS अधिकारी दीपक गहलावत की गिरफ़्तारी पर दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्यप्रण
नकली दवाओं के एक रैकेट से जुड़े 3 करोड़ रुपये के कथित रिश्वत मामले में हरियाणा काडर के IPS अधिकारी दीपक गहलावत की गिरफ़्तारी पर दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने जांच के तरीके पर नाराज़गी जताते हुए दीपक गहलावत को सिर्फ़ एक दिन की CBI हिरासत में भेजा, जबकि एजेंसी ने पांच दिनों की हिरासत की मांग की थी।
कोर्ट ने इस बात पर असंतोष व्यक्त किया कि CBI यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि उसे लेन-देन के किस हिस्से की जांच करनी बाकी है। अदालत ने कहा कि जब जांच अधिकारी खुद मान रहे हैं कि 1 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि बरामद हो चुकी है और इसमें से कोई भी रकम गहलावत को नहीं दी गई, तो फिर 'बड़ी साज़िश' की दलील पुलिस हिरासत का आधार नहीं बन सकती।
जांच अधिकारी के रवैये पर कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने जांच अधिकारी (IO) के रवैये को 'समझ से परे' बताया। कोर्ट ने पाया कि IO से पूछे गए सवालों से यह ज़ाहिर हुआ कि उन्होंने यह पता लगाने की कोई कोशिश नहीं की कि आरोपी ने किसी व्यक्ति से संपर्क किया था या नहीं, या ऐसा कोई व्यक्ति मौजूद भी था।
इस मामले में CBI का आरोप है कि अपराध के समय नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) में क्षेत्रीय निदेशक के पद पर तैनात दीपक गहलावत ने एक व्यवसायी को भरोसा दिलाया था कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर नकली दवा रैकेट की जांच को उसके पक्ष में मोड़ देंगे।
दोनों पक्षों की दलीलें
सुनवाई के दौरान CBI ने दलील दी कि गहलावत ने डेढ़ करोड़ रुपये मांगे थे, तो कोई 50 हज़ार रुपये एडवांस क्यों लेगा? वहीं, IPS अधिकारी के वकील ने हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल चार बार पूछताछ में शामिल हो चुके हैं और उन्होंने हमेशा जांच में सहयोग किया है। वकील ने यह भी दावा किया कि 50 हज़ार रुपये की जिस राशि का ज़िक्र हो रहा है, वह उन्होंने अपनी पुरानी कार बेचने के लिए बतौर एडवांस ली थी और कोई भी अधिकारी रिश्वत की रक़म अपने निजी खाते में क्यों लेगा।
IANS के मुताबिक, इस मामले में जांच एजेंसी ने लवकुश मिश्रा से 1,425,000 रुपये, अनुकल्प मिश्र से 1,682,046 रुपये, अविनाश शुक्ला से 20,39,220 रुपये और 1,121 डॉलर, करुणेश पांडेय से 1,807,063 रुपये, रमाशंकर मिश्रा से 7,32,170 रुपये और रामशंकर यादव टुन्नू से एक लाख रुपये बरामद किए हैं।
इनपुट: IANS



