सहमति से रिश्ते पर सवाल: 15-16 साल की लड़की शादी क्यों नहीं कर सकती - मौलाना साजिद रशीदी
मौलाना साजिद रशीदी ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर 15-16 साल की लड़की का किसी के साथ रिश्ते में रहना वैध माना जा सकता है, तो फिर उसकी अपनी इच्छा से की गई शादी (निकाह)…
मौलाना साजिद रशीदी ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर 15-16 साल की लड़की का किसी के साथ रिश्ते में रहना वैध माना जा सकता है, तो फिर उसकी अपनी इच्छा से की गई शादी (निकाह) को अवैध क्यों ठहराया जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS से नई दिल्ली में बातचीत के दौरान उन्होंने इस कानूनी विरोधाभास पर आपत्ति जताई।
रशीदी ने तर्क दिया कि एक तरफ देश में समान-लिंग (लड़की-लड़की या लड़के-लड़के) के बीच विवाह को जायज माना जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर एक लड़की अपनी मर्जी से निकाह करे तो उसे अवैध करार दिया जा रहा है। उन्होंने इसे देश का 'दुर्भाग्य' बताया।
कानूनी फैसले और संस्कृति पर टिप्पणी
हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए मौलाना रशीदी ने कहा कि न्यायपालिका में बैठे कुछ लोग देश की सभ्यता और संस्कृति को समझने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया, "देश पर यूरोपीय संस्कृति थोपने की कोशिश की जा रही है।" उनका कहना था कि जब एक 16 साल की लड़की अपनी इच्छा से शादी करना चाहती है, तो अदालत को उसकी शादी को अवैध ठहराने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला
एक अन्य विषय पर बात करते हुए रशीदी ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में हुई कार्रवाई पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में मुख्य अभियुक्तों को ही सरकारी गवाह बना लिया गया है, जो उन्हें बचाने की एक साजिश है।
उन्होंने चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें बचाने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई गई है। रशीदी के अनुसार, "यह एक बहुत बड़ा षड्यंत्र होता है कि किसी को भी, जिसको बचाना हो, उसको सरकारी गवाह बना लिया जाए और फिर वह सेफ हो जाता है।" उन्होंने चेतावनी दी कि जनता सब देख रही है और इसका असर 2027 के उत्तर प्रदेश चुनावों में देखने को मिलेगा।
इनपुट: IANS



