SEBI के नए नियम: अब धोखाधड़ी वाले मामलों में निवेशकों का पैसा जल्दी वापस मिलेगा
भारतीय शेयर बाजार के नियामक SEBI ने अपने निपटान नियमों (settlement regulations) में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। इस कदम का सबसे बड़ा फायदा उन निवेशकों को मिलने की उम्मीद है, जिनका पैसा कंपनियों…
भारतीय शेयर बाजार के नियामक SEBI ने अपने निपटान नियमों (settlement regulations) में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। इस कदम का सबसे बड़ा फायदा उन निवेशकों को मिलने की उम्मीद है, जिनका पैसा कंपनियों में हेराफेरी या गबन की वजह से फंसा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन नए नियमों से ऐसे मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा और गलत तरीके से निकाले गए धन की वसूली की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
नियामक का मानना है कि इससे शेयरधारकों की सुरक्षा भी पहले से ज्यादा मजबूत होगी। सेबी ने पिछले हफ्ते हुई अपनी बोर्ड बैठक में 'सेबी (प्रशासनिक और दीवानी कार्यवाही का निपटान) विनियम, 2026' को हरी झंडी दिखाई है। हालांकि, इन नियमों को अभी आधिकारिक तौर पर अधिसूचित किया जाना बाकी है, जिसके 30 दिन बाद ये लागू हो जाएंगे।
क्या है इन नियमों का मकसद?
सेबी का उद्देश्य लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से बचते हुए मामलों को तेजी से सुलझाना है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया कि धन के गबन से जुड़े मामलों में निवेशकों की सुरक्षा सिर्फ निपटान राशि (settlement amount) तक ही सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा, "शेयरधारकों के हितों की सुरक्षा कई तरीकों से की जा सकती है। निश्चित तरीकों में से एक यह है कि यदि धन की हेराफेरी हुई है, तो वह सबसे पहले वापस आना चाहिए। इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।"
इसका मतलब है कि जहां भी लागू होगा, अवैध तरीके से कमाए गए लाभ की वापसी और अन्य सुधारात्मक शर्तें भी निपटान प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा होंगी। पांडे के मुताबिक, निपटान को सिर्फ एक रकम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
नए नियमों के तहत, निपटान राशि तय करने के लिए एक निर्धारित फॉर्मूला होगा। चेयरमैन ने बताया कि यह राशि "जुर्माने की कुछ गुना" होगी। इसके अलावा, कुछ मामलों में फास्ट-ट्रैक निपटान का विकल्प भी दिया जाएगा ताकि प्रक्रिया और तेज हो सके।
एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब सेबी किसी कंपनी को 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी करने से पहले एक 'निपटान नोटिस' भेजेगा। यह नोटिस मिलने के बाद संबंधित कंपनी या व्यक्ति के पास निपटान के लिए आवेदन करने को 60 दिनों का समय होगा। निपटान का यह मतलब नहीं होता कि गलती स्वीकार कर ली गई है, लेकिन इससे मामले का जल्दी समाधान हो जाता है।
कंपनियों की जानकारी देने की जिम्मेदारी पर असर
इस नई व्यवस्था का असर सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा जानकारी साझा करने के नियमों पर भी पड़ सकता है। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने बताया कि मौजूदा नियमों के तहत कंपनियों को 'कारण बताओ नोटिस' मिलने पर इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। लेकिन, 'निपटान नोटिस' के मामले में शायद ऐसा करना जरूरी न हो, क्योंकि यह अंतिम 'कारण बताओ नोटिस' नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा, "हम इस पहलू की जांच करेंगे।"
इनपुट: IANS



