सीटों पर चिपक गई थीं 19 लाशें: आग लगते ही गैंस चैंबर बन गई थी बस, एक्सपर्ट बोले- जिंदा जलने से पहले दम घुटा – Rajasthan News h3>
जैसलमेर में हुए स्लीपर बस अग्निकांड में 21 लोगों की मौत कार्बन मोनो ऑक्साइड से दम घुटने के चलते हुई थी। बस में सबसे पहले घुसकर साक्ष्य जुटाने वाली फोरेंसिक एक्सपर्ट टीम इतनी मौतों के पीछे प्रथम दृष्टया यही कारण मान रही है। हालांकि असली वजह सभी पहलुओं
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एक्सपर्ट का कहना है कि अंदर से पैक AC बस में लगे प्लास्टिक, रेग्जिन और पर्दों के जलने से कई गैसों का मिश्रण बना। इससे बस गैस के ऐसे चैंबर में तब्दील हो गई कि स्लीपर में सो रही सवारियों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। संभवत: उनका पहले दम घुटा। इसके बाद तेज हुई आग में शरीर जल गए।
हादसे के 12 घंटे बाद तक बस धधक रही थी। उसे ठंडा करने के बाद जब एफएसएल टीम अंदर घुसी तो कई लाशें कंकाल बन गई थी। उनकी चमड़ी सीटों से चिपकी हुई थी। कुछ के शरीर मांस के लोथड़े में बदल चुके थे। उनकी DNA पहचान के लिए टीम को सैंपल जुटाना तक मुश्किल हो गया था।
NEWS4SOCIALटीम जोधपुर की उस फॉरेंसिक लेबोरेटरी में पहुंची जहां DNA सैंपल की जांच की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में मौजूद रहे कुछ एक्सपर्ट से बात कर इस हादसे के प्राथमिक कारणों को जाना। पढ़िए ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट…
यह बस के अंदर का वो डरावना दृश्य है जिसे देखकर हर कोई सहम गया था। जले हुए शव बस की सीटों से चिपके हुए थे।
बस बनी मौत की गैस का चैंबर, 10 मिनट में घुटा दम, बचने के लिए भागे तो गैलरी में फंसे
फोरेंसिक एक्सपर्ट ने बताया कि बस में से कुल 19 शव निकाले गए थे। उनके DNA सैंपल जोधपुर की लैब में लाए गए हैं। वहां इनकी सैंपलिंग कर रहे DNA एक्सपर्ट ने बताया कि अभी जांच चल रही है और सभी सैंपल्स का रिजल्ट आना बाकी है। फिलहाल एसी बस में आग लगने के कारणों और मौत के संभावित वजहों पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
प्रथम दृष्टया बताया जा रहा है कि एसी में शॉर्ट सर्किट से बस में आग लगी। एसी में फ्रेऑन या प्रोपेन गैस होती है। इसकी ज्वलनशीलता बहुत कम है। ऐसे में शुरुआती तौर पर यही माना जा रहा है कि बस में पहले AC में शॉर्ट सर्किट से आग लगी। फिर अंदर सीटों में लगे प्लास्टिक, सीट कवर, पर्दे, फाइबर और दूसरी ज्वलनशील चीजों ने आग पकड़ी।
बस में कुल 57 लोगों के बैठने के लिए स्लीपर सीटें बनी हुई थी। आग लगने के बाद सीटें भी पूरी तरह राख में बदल चुकी थी।
इससे कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रो कार्बन जैसी गैस बनीं और बस अंदर से ऐसे गैस चैंबर जैसी बन गई जिसने उसमें सवार लोगों को जलने से पहले ही दम घोंट दिया। क्योंकि बहुत तंग जगह में 57 लोग मौजूद थे। अधिकतर लोग सोने के लिए बने स्लीपर केबिन में भी थे, जिन्हें संभवतः वहां से बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका और वहीं उनका दम घुट गया।
एक्सपर्ट के अनुसार कार्बन मोनो ऑक्साइड 5 से 20 मिनट में किसी व्यक्ति की जान ले लेती है। ये सांस की नली में जाकर फेफड़ों पर अटैक करती है जिससे हीमोग्लोबिन में मौजूद ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। जरूरी अंग काम करना बंद कर देते हैं। श्वास नली में जहरीला धुआं भर जाने से सांस नहीं आती और दम घुटने से व्यक्ति की मौत हो जाती है।
आग लगने के चंद मिनट बाद मौके पर पहुंचे प्रत्यक्षदर्शियों ने भी बताया था कि जब उन्होंने पास जाकर देखा तो अंदर से कोई हलचल नहीं थी। यानी जलने से पहले ही अधिकतर लोग दम घुटने से या तो मर चुके थे या बेहोश हो गए थे।
सीटों पर चिपके शवों के टुकड़े, भयावहता ऐसी की सैंपल लेना भी मुश्किल हुआ
जैसलमेर और जोधपुर की स्पेशल FSL एवं DNA एक्सपर्ट टीमें मंगलवार की रात करीब 12 बजे मौके पर पहुंची थी। टीम में शामिल FSL एक्सपर्ट ने बताया कि घटना के 8 से 9 घंटे बाद भी बस की बॉडी इतनी तप रही थी कि उसके अंदर घुसकर सैंपल लाना मुश्किल था। कई घंटों तक बस का तापमान कम होने का इंतजार किया गया। इसके बाद रात को करीब 2-2.30 बजे टीम उस बस के अंदर घुस पाई।
सैंपल जुटाने वाली टीम ने बताया कि अंदर का दृश्य झकझोर देने वाला था। शवों की हालत ऐसी थी कि उनकी चमड़ी सीटों से चिपकी हुई थी। जल चुकी सीटों पर केवल कंकाल ही नजर आ रहे थे। आग की तरफ कुछ सीटों पर लोग ऐसे जले कि उनका केवल मांस का लोथड़ा ही बचा था।
जली हुई बस में शव इस तरह से चिपके थे कि उन्हें वहां से हटाकर नमूने जुटाना तक मुश्किल था।
उनके सैंपल लेना मुश्किल हो रहा था। क्योंकि सीट कवर, रेग्जिन और मटेरियल स्किन के साथ चिपक गए थे। जिन्हें अलग किए बिना DNA सैंपल से मिलान करना आसान नहीं होता। रात में सैंपल जुटाने के बाद टीम ने सुबह दोबारा बस की सैंपलिंग की और महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। एक लापता यात्री के शव की खोजबीन के लिए भी बस का दोबारा मुआयना किया गया। इसके बाद इन सैंपलों को इकट्ठा कर जोधपुर की फोरेंसिक लेबोरेटरी में
यह डेड जली हुई डेड बॉडी में से बचा हुआ हिस्सा है। बाकी पूरी जली हुई बॉडी सीट के साथ इस तरह से चिपकी हुई थी।
NEWS4SOCIALपहुंचा DNA लैब में, पोटलियों में आए शवों के टुकड़े
जोधपुर के मंडोर स्थित जिस FSL लैब में शवों के DNA सैंपल की जांच की जा रही थी, NEWS4SOCIALटीम भी वहां पहुंची। शवों के अवशेष और सैंपल को प्लास्टिक की थैलियों में रखे हुए थे। 9 मृतकों के परिजन भी वहां मौजूद थे, जिनके सैंपल लेकर यह मिलान किया जा रहा था कि थैलियों में पैक शवों के टुकड़े किसके हैं। विशेषज्ञों की कई टीमें टुकड़ों को खरौंचकर उनमें से सैंपल लेकर उसकी जांच में जुटे थे। ये सैंपल कांच के एक जार में रखे गए हैं, जिनके ऊपर लेबल चिपकाए गए हैं। उनके ऊपर जार नंबर- 1,2,3 लिखा गया है। सैंपलों का मिलान होने के बाद उनके परिजनों को शव सुपुर्द किए जाएंगे।
लैब में इस तरह जार पर लेबल लगाकर नंबरिंग की गई है, ये जार नंबर-4 है यानी डेड बॉडी नंबर-4 से लिया गया सैंपल है।
20 डेड बॉडी के DNA सैंपल जुटाने पहुंची 25 एक्सपर्ट की टीम
राजस्थान FSL निदेशक डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि DNA मिलान की चुनौतियों और कैजुअल्टी को ध्यान में रखते हुए वो खुद 4 एक्सपर्ट्स के साथ जोधपुर से कमान संभाल रहे हैं। DNA रिजल्ट में तेजी लाने के लिए स्पेशल टीम बुधवार सुबह 9 बजे जोधपुर पहुंच गई।
तीन एंगल पर अलग-अलग टीमें जांच कर रही हैं। जैसलमेर की टीम मैकेनिकल पहलुओं, फिजिक्स और आर्सेनल (पटाखे वगैरह) की जांच कर रही है। जोधपुर की टीम DNA सैंपल और परिजनों के सैंपल पर काम कर रही है। सैंपल मिलान के लिए मरने वालों के परिजनों के सैंपल जुटाए हैं। हमने सिर्फ DNA सैंपलिंग और मिलान के लिए 25 से ज्यादा एक्सपर्ट्स की टीम तैनात की है ताकि 24 घंटे के अंदर परिजनों को उनके सदस्यों के अवशेष सौंपे जा सकें। अगर कैजुअल्टी बढ़ती है तो हमने अजमेर और बीकानेर FSL की टीम को भी स्टैंडबाई पर रखा हुआ है। इसके अलावा 4 एक्सपर्ट्स जयपुर से भी आए हैं।
सैंपल की जांच करते हुए फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम।
डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि इस हादसे की जांच में हमारा फोक इन 4 पहलुओं पर रहेगा
1. मेकेनिकल फॉल्ट ढूंढना की आग लगने की शुरुआत कहां से हुई?
2. आग लगने का मुख्य कारण क्या रहा?
3. बस में कोई ज्वलनशील चीज तो नहीं थी, जैसे- पटाखे और अन्य सामग्री
4. DNA सैंपल की जांच में जल्द से जल्द मिलान करके देना
जोधपुर स्थित फॉरेंसिंक लैब में फिलहाल 25 डीएनए एक्सपर्ट की टीम शवों की पहचान में जुटी है।
राजस्थान FSL निदेशक डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि सैंपल की अधिकता को देखते हुए मैं खुद अभी जोधपुर ही रहूंगा और जरूरत पड़ी तो जैसलमेर भी जाऊंगा। एक DNA सैंपल के मिलान में 7 से 8 घंटे का समय लगता है।
FTA कार्ड से हम एक साथ 26 सैंपल की जांच करेंगे। इसमें 13 सैंपल शवों के और 13 सैंपल परिजनों के होंगे। जिसका भी DNA मैच होता जाएगा उसकी सूची बनाकर पूरी कानूनी प्रक्रिया के साथ परिजनों को सौंपने का काम किया जाएगा।
फिलहाल महात्मा गांधी अस्पताल में DNA सैंपल देने के लिए आए परिजनों के सैंपल लिए जा रहे हैं और जैसलमेर टीम के लिए हुए शवों के सैंपल लगातार मंडोर रोड स्थित FSL लैब भिजवाए जा रहे हैं।
अब तक 21 लोगों की हो चुकी मौत
मंगलवार दोपहर 3.30 बजे जैसलमेर से जोधपुर जा रही एसी स्लीपर बस में आग लग गई थी। हादसे में मंगलवार को 20 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 19 मौत बस के अंदर और एक मौत जोधपुर के हॉस्पिटल में हुई थी। अग्निकांड में बुधवार को मृतकों की संख्या 21 हो गई है। 20 डेड बॉडी बस के अंदर से निकाली गई थी। हादसे में झुलसे 10 साल के यूनुस ने बुधवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अनुसार अब भी 4 मरीज वेंटिलेटर पर हैं।
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