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सरकारी स्कूलों के 500 बच्चों की कला से गूंजेगा: भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज करेंगे ‘अनुगूंज’ का शुभारंभ – Bhopal News

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सरकारी स्कूलों के 500 बच्चों की कला से गूंजेगा:  भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज करेंगे ‘अनुगूंज’ का शुभारंभ – Bhopal News

सरकारी स्कूलों के 500 बच्चों की कला से गूंजेगा: भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज करेंगे ‘अनुगूंज’ का शुभारंभ – Bhopal News

भोपाल के सरकारी स्कूलों के लगभग 500 विद्यार्थियों की प्रतिभा मंगलवार शाम रंगमंच पर रंग बिखेरेगी। स्कूल शिक्षा विभाग की पहल पर आयोजित होने वाले इस अनोखे सांस्कृतिक कार्यक्रम अनुगूंज का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। यह आयोजन शाम 7 बजे शिवाज

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कार्यक्रम का पहला भाग “धनक” कार्यक्रम का पहला भाग “धनक” शीर्षक से होगा। जिसमें छात्र पारंपरिक वाद्य संगीत के साथ भारत के चार प्रमुख शास्त्रीय नृत्य ओडिसी, भरतनाट्यम, कथक और मणिपुरी की प्रस्तुतियां देंगे। वहीं, दूसरे भाग “रंगकार” में विद्यार्थियों द्वारा ताना-बाना टूट न जाए नामक नाटक का मंचन किया जाएगा। जो सामाजिक समरसता और एकता का संदेश देगा।

नामचीन कलाकार-रंगकर्मी बतौर मेंटॉर जुड़े अनुगूंज में शामिल विद्यार्थियों ने पिछले एक महीने में अथक अभ्यास कर अपनी प्रस्तुतियों को निखारा है। यह आयोजन विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, अनुशासन और टीमवर्क को प्रदर्शित करने का मंच बनेगा। इस कार्यक्रम के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने देश के नामचीन कलाकारों और रंगकर्मियों को बतौर मेंटर्स जोड़ा है।

इनमें सुप्रसिद्ध संगीतकार मॉरिस, ओडिसी नृत्य की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नृत्यगुरु बिंदु जुनेजा, भरतनाट्यम की शीर्षस्थ नृत्यांगना भारती होम्बल, प्रसिद्ध कथक नृत्यगुरु पद्मजा रघुवंशी, मणिपुरी नृत्य के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आचार्य एम.के. होजाइनगम्बा सिंह, रंग निदेशक सादात भारती और मंच संचालक विनय उपाध्याय शामिल हैं।

मंच का निर्माण महाकाल लोक के मॉडल पर कार्यक्रम का तकनीकी और रचनात्मक निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी कमल जैन ने किया है। अनुगूंज का मंच एक भारत श्रेष्ठ भारत की अवधारणा पर आधारित है। इस मंच का निर्माण उज्जैन के महाकाल लोक के मॉडल पर किया गया है, ताकि दर्शकों को सांस्कृतिक समरसता के साथ एकता का भी अनुभव हो।

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कार्यक्रम से बढ़ेगा बच्चों का आत्मविश्वास सस्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अनुगूंज केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक रचनात्मक प्रयास है। इससे सरकारी स्कूलों के छात्रों को अपनी कला और व्यक्तित्व को निखारने का अवसर मिलेगा, साथ ही मंच पर आत्मविश्वास के साथ अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने की प्रेरणा भी।

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