‘शराब की 34 पेटियां कहां गईं, किसके आदेश से नष्ट की गईं?’, 6 साल बाद भी अधूरे हैं ये सवाल h3>
- जिस गाड़ी से हादसा हुआ, उसका इंश्योरेंस हो रखा था या नहीं?
- हादसे में जख्मी होने वाला व्यक्ति कहां और किस स्थिति में है?
- एक्सिडेंट में शामिल गाड़ी को उस वक्त जो ड्राइवर चला रहा था, उससे पूछताछ क्यों नहीं हुई?
- गाड़ी से मिली शराब की 34 पेटियां कहां गईं, उन्हें नष्ट किया गया तो किसके आदेश पर?
- जांच में पुलिस अधिकारियों की ओर से ‘घोर लापरवाही’ का पता लगने के बाद भी सीनियर अधिकारियों ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की ?
- नरेला थाने के एसएचओ नोटिस मिलने के बाद भी ट्राइब्यूनल के सामने पेश होने से क्यों बच रहे हैं?
संबंधित एमएसीटी के प्रीसाइडिंग ऑफिसर विनोद यादव ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला बहुत ही दयनीय स्थिति को दर्शाता है। मोटर एक्सिडेंट के मामलों में, पुलिस को घायलों और मृत व्यक्तियों के परिवार वालों के प्रति अत्यंत संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होती है, लेकिन जांच अधिकारी (अधिकारियों) के साथ-साथ सुपरविजन करने वाले अधिकारी (अधिकारियों) का आचरण इस मामले में अत्यधिक निंदनीय है।
ट्रिब्यूनल ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को अपना आदेश भिजवाते हुए उनसे अनुरोध किया कि वह इसकी जांच कराएं और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करें। दिल्ली के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी को 31 अक्टूबर को मामले में अगली सुनवाई तक या उससे पहले इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट ट्राब्यूनल को देनी है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सिडेंट में शामिल गाड़ी जिसके नाम पर रजिस्टर्ड थी, उस महिला की मौत हो चुकी है। इस गाड़ी से मिली शराब की पेटियों को 4 मई 2018 में नष्ट कर दिया गया था।

