बिजली महंगी हुई, तो बंद हो जाएगा मेट्रो सेवा: स्मार्ट प्रीपेड मीटर वालों को बिल में 5% की छूट मिले, पूर्वांचल-दक्षिणांचल का निजीकरण निरस्त हो – Uttar Pradesh News

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बिजली महंगी हुई, तो बंद हो जाएगा मेट्रो सेवा:  स्मार्ट प्रीपेड मीटर वालों को बिल में 5% की छूट मिले, पूर्वांचल-दक्षिणांचल का निजीकरण निरस्त हो – Uttar Pradesh News

बिजली महंगी हुई, तो बंद हो जाएगा मेट्रो सेवा: स्मार्ट प्रीपेड मीटर वालों को बिल में 5% की छूट मिले, पूर्वांचल-दक्षिणांचल का निजीकरण निरस्त हो – Uttar Pradesh News

नियामक आयोग में हुई राज्य सलाहकार समिति की बैठक, बिजली की दरों का विरोध।

ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी संवैधानिक कमेटी राज्य सलाहकार समिति की शुक्रवार को हुई अहम बैठक में उपभोक्ताओं ने खुलकर निजीकरण और बिजली दरों में बढ़ोतरी का विरोध किया। मेट्रो कॉरपोरेशन के एमडी सुशील कुमार ने तो यहां तक कह दिया–“हमें कोई सब्सिडी नहीं मिलत

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उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाने वालों को बिल में 2 की बजाय 5% की छूट दी जाए। इस बैठक में तीन बिंदुओं का एक निजी प्रस्ताव भी पेश किया गया।

राज्य सलाहकार समिति की इस अहम बैठक में बिजली की दरों के भारी विरोध के चलते तय माना जा रहा है कि राज्य नियामक आयोग बिजली की दरों को बहुत अधिक बढ़ोत्तरी नहीं करेगी।

राज्य सलाहकार समित की बैठक में निजीकरण का भी मुद्दा उठा।

पहले पढ़ते हैं कि राज्य सलाहकार समिति में किस तरह के मसले उठे

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि निजी क्षेत्र की नोएडा पावर कंपनी (एनपीसीएल) ने 1993 से आज तक भारी मुनाफा कमाया। वहां के लोग महंगी बिजली की दर से परेशान हैं। सरकार खुद सुप्रीम कोर्ट में लाइसेंस रद्द कराने की कोशिश कर रही है।

ऐसे में पूर्वांचल-दक्षिणांचल का निजीकरण का कदम क्या जनविरोधी नहीं कहा जाएगा। जब निजी क्षेत्र की नोएडा पावर कंपनी का मॉडल फेल हो चुका है, तो फिर प्रदेश की जनता पर निजीकरण का बोझ क्यों डाला जा रहा है। उन्होंने नोएडा पावर कंपनी में लागू 10% बिजली दरों में कमी के प्रस्ताव को आगे भी जारी रखने की मांग रखी।

पांच साल से दरें नहीं बढ़ीं, इसलिए अब बढ़ाई जाएं : एमडी

पावर कॉरपोरेशन के एमडी पंकज कुमार ने बैठक में कहा कि प्रदेश में पिछले 5 सालों से बिजली दरें नहीं बढ़ी हैं। अब दो ही रास्ते हैं या तो सरकार सब्सिडी दे या दरें बढ़ें। उन्होंने स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर होने वाले 9 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च का मुद्दा भी रखा।

इस पर उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष वर्मा ने पलटवार करते हुए कहा–”जब उपभोक्ताओं का 33,122 करोड़ रुपए बिजली कंपनियों पर सरप्लस है, तो दरें कैसे बढ़ सकती हैं? पांच साल से दर नहीं बढ़ी क्योंकि उपभोक्ता पहले ही ज्यादा दे चुके हैं। ये नरेटिव बंद करें।”

पावर कॉरपोरेशन ने भारत सरकार व नियामक आयोग द्वारा पारित आदेश के खिलाफ जाकर स्मार्ट मीटर का 18,885 करोड़ का टेंडर 27342 करोड़ में दिया। उस समय क्यों नहीं सोचा कि यह पैसा कहां से आएगा?

उपभोक्ता परिषद ने इसका उस समय भी विरोध किया था कि ये 9000 करोड़ कौन देगा। महंगे दरों पर टेंडर कर उसका भार जनता पर डालना कहां तक उचित होगा।

बिजली की दरें बढ़ी तो प्रदेश में औद्योगिक संभावनाएं खत्म हो जाएंगी

मेट्रो और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने भी इस समिति की बैठक में बिजली की दरें बढ़ाने का विरोध किया। बैठक में उपस्थित मेट्रो कॉरपोरेशन के एमडी सुशील कुमार ने कहा–“हमें कोई सब्सिडी नहीं मिलती। दर बढ़ी तो शहरों में चल रही मेट्रो बंदी के कगार पर पहुंच जाएगी।”

इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधि ने भी साफ कहा कि बिजली दरें पहले से ज्यादा हैं। कोई भी बढ़ोतरी प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं को खत्म कर सकती है।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वालों को मिले राहत।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वालों को बिल में 5% छूट मिले

भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को 5% छूट दी जानी चाहिए, लेकिन प्रदेश में अभी केवल 2% मिल रही है। परिषद की ओर से एमडी पेनल्टी का भी विरोध किया गया। मल्टी स्टोरी भवनों में बिल्डर का अत्याचार भी मुद्दा बना

बैठक में परिषद ने मल्टी स्टोरी अपार्टमेंट्स में रहने वाले उपभोक्ताओं के उत्पीड़न का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। बैठक में बिल्डरों की मनमानी का भी मुद्दा उठा। परिषद ने कहा–सिंगल पॉइंट कनेक्शन का बहाना लेकर बिल्डर मनमानी करते।

बिजली विभाग भी शिकायत पर कार्रवाई से बचता है। इस बार टैरिफ आदेश में स्पष्ट व्यवस्था की जाए कि विभाग सीधे दखल देकर उपभोक्ताओं को राहत दे सके। दुकान चलाने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को मिले राहत

प्रदेश में 15 से 20 लाख ऐसे उपभोक्ता हैं, जो घर में 1 किलोवाट लोड पर दुकान चलाकर गुज़ारा करते हैं। इनके लिए अभी तक कोई श्रेणी तय नहीं है। परिषद की ओर से 1 किलोवाट और 100 यूनिट तक उपयोग को घरेलू श्रेणी में ही शामिल करने की मांग की गई। जिससे ये उपभोक्ता बिजली चोरी में फंसने से बच सकें।

राज्य सलाहकार समिति की बैठक में शामिल सदस्यगण।

तीन बिंदुओं का लिखित प्रस्ताव भी पेश हुआ

राज्य सलाहकार समिति के तीन सदस्यों अवधेश वर्मा, दीपा जैननी और डॉ. भारत राज सिंह ने आयोग के समक्ष तीन बिंदुओं का लिखित प्रस्ताव भी पेश किया। इन प्रस्तावों में बिजली दरों में 33,122 करोड़ के सरप्लस के आधार पर 45% की सीधी कटौती की मांग रखी गई। इसके अलावा पूर्वांचल और दक्षिणांचल का निजीकरण रद्द करने और आरडीएसएस स्कीम में मिले 44,094 करोड़ के फंड से सरकारी कंपनियों को आत्मनिर्भर बनाने की मांग शामिल है।

टैरिफ प्रस्ताव पर उठे तकनीकी सवाल

राज्य सलाहकार समिति की बैठक में टैरिफ प्रस्ताव पर तकनीकी सवाल भी उठे। परिषद की ओर से अवधेश वर्मा ने कहा–टैरिफ प्रस्ताव मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 के तहत आना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। महंगे कंसलटेंट रखने के बाद भी पावर कॉरपोरेशन ने नियमविरुद्ध प्रस्ताव रखा। बीपीएल उपभोक्ताओं की दरें 3 से 4 रुपए प्रति यूनिट करने की बात भाजपा के संकल्प पत्र का उल्लंघन है। परिषद ने आयोग को बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी 2000 करोड़ से अधिक का सरप्लस उपभोक्ताओं का निकलेगा। ऐसे में दरें बढ़ाने की कोई संवैधानिक या आर्थिक मजबूरी नहीं बनती।

नियामक आयोग के चेयरमैन की अध्यक्षता में हुई बैठक

नियामक आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार की अध्यक्षता में राज्य सलाहकार समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नरेंद्र भूषण, पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार, मध्यांचल के एमडी रिया केजरीवाल, मेट्रो कॉर्पोरेशन प्रमुख सुशील कुमार, इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधि और उपभोक्ता परिषद के कई सदस्य मौजूद रहे।

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