निचली अदालतों में हड़ताल से थानों में गाड़ियों का अंबार: 8 दिन से ठप पड़ा है न्यायिक कामकाज, कोर्ट निस्तारण रुका, थानों में जगह नहीं, गाड़ियों की धरपकड़ भी कम – Jaipur News h3>
राजस्थान में न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब सीधे तौर पर थानों में नजर आने लगा है। पिछले आठ दिनों से जारी हड़ताल के चलते कोर्ट में जब्त गाड़ियों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में थानों के बाहर जब्त गाड़ियों की लंबी कतार लग गई है। हालात य
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शहर के थानों के बाहर थार, स्कॉर्पियो, एक्टिवा, बुलेट समेत बड़ी और छोटी गाड़ियों की लंबी लाइन खड़ी है। इनमें से कई गाड़ियां ड्रिंक एंड ड्राइव, बिना नंबर प्लेट या रजिस्ट्रेशन, गलत पार्किंग, बिना लाइसेंस समेत कई मामलों में जब्त की गई हैं। लेकिन कोर्ट से निस्तारण नहीं होने की वजह से ये गाड़ियां थानों में ही खड़ी रह गई हैं।
पहले रोज 10 गाड़ियां होती थी जब्त, अब 2-3 पर सिमटा काम
शिप्रापथ थाने के एसएचओ राजेंद्र गोदारा ने बताया कि पहले एक दिन में 8 से 10 गाड़ियों को जब्त कर उनका चालान किया जाता था, लेकिन अब इस संख्या को घटाकर 2 से 3 कर दिया गया है। थाने में जब्त गाड़ियों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, इसलिए अब केवल गंभीर मामलों वाली गाड़ियों को ही जब्त किया जा रहा है। बाकी मामलों में चेतावनी देकर छोड़ा जा रहा है या कार्रवाई टाल दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि कोर्ट में पेश नहीं होने की वजह से पुराने मामलों में भी निस्तारण अटका हुआ है। थानों में लंबित गाड़ियां बढ़ती जा रही हैं और निस्तारण के बिना उन्हें छोड़ा भी नहीं जा सकता।
18 जुलाई से हड़ताल पर हैं न्यायिक कर्मचारी
राजस्थान न्यायिक कर्मचारी संघ के बैनर तले राज्यभर के न्यायिक कर्मचारी 18 जुलाई से सामूहिक अवकाश पर हैं। ये कर्मचारी न्यायिक कैडर के पुनर्गठन की मांग को लेकर हड़ताल पर बैठे हैं। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेन्द्र नारायण जोशी ने बताया कि हाईकोर्ट की फुल बेंच ने 6 मई 2023 को राज्य सरकार को कैडर पुनर्गठन का प्रस्ताव भेज दिया था, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने बताया कि न्यायिक सेवा के कर्मचारियों को लंबे समय से प्रमोशन नहीं मिल पा रहा और आर्थिक रूप से भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जोशी ने कहा कि राज्य के अन्य विभागों में कैडर पुनर्गठन तुरंत कर दिया गया, लेकिन न्यायिक कर्मचारियों के साथ सरकार भेदभाव कर रही है।
जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, काम पर नहीं लौटेंगे
संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, वे काम पर नहीं लौटेंगे। कोर्ट के ठप पड़े कामकाज से अब न सिर्फ गाड़ियों के निस्तारण पर असर पड़ा है, बल्कि बेल, समन, तारीख़, पेशी समेत सभी प्रक्रियाएं भी अटकी हुई हैं। इससे कोर्ट आने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है और पुलिस को भी कार्रवाई करने में मुश्किलें बढ़ी हैं।
