पीलीभीत में बैकफुट पर नजर आए डॉक्टर चरित्र बोरा: परिजनों से समझौता किया, लाश का इलाज करने का आरोप लगा था – Pilibhit News h3>
पीलीभीत12 मिनट पहले
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पीलीभीत जिले में चार्ट फिरोजपुर गांव के 25 वर्षीय विष्णु की संदिग्ध मौत के मामले ने स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते शनिवार को विष्णु अपनी गर्भवती पत्नी और रिश्तेदार के साथ ससुराल जाते समय सड़क हादसे में घायल हो गया था। जिला अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद उसे गंभीर हालत में एक निजी न्यूरो केयर एवं सर्जिकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां 8 जुलाई को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतक के परिजनों ने अस्पताल पर लाश का इलाज करने का सनसनीखेज आरोप लगाया। परिजनों का कहना था कि डॉक्टरों ने उन्हें मरीज से मिलने तक नहीं दिया और जब उन्होंने मरीज को देखने की जिद की तो आनन-फानन में हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। इस दौरान एंबुलेंस चालक ने मरीज को मृत बताते हुए ले जाने से इंकार कर दिया, जिसके बाद अस्पताल स्टाफ मौके से फरार हो गया।
घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के बाहर शव रखकर कई घंटे तक प्रदर्शन किया। पुलिस को तहरीर देकर मृतक के परिजनों ने डॉक्टर चरित बोरा पर लाश का इलाज करने का आरोप लगाया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी।
वहीं डॉक्टर चरित बोरा ने दबाव बढ़ता देख बैकफुट पर आते हुए परिजनों को मोटी रकम देकर समझौता कर लिया। शनिवार को घंटों बंद कमरे में वार्ता चली, नोटरी वकील बुलाकर स्टांप पेपर पर लिखित समझौता कराया गया। मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर ही आगे की कार्रवाई होगी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डॉक्टर खुद को निर्दोष बता रहे थे तो फिर उन्हें समझौता करने की जरूरत क्यों पड़ी? समझौते के दौरान पुलिस की मौजूदगी पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, लाश के इलाज जैसे गंभीर आरोप लगने के बावजूद पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई, जिससे पूरे मामले को लेकर बचाव की पटकथा पहले से ही तैयार करने के आरोप लग रहे हैं।
थाना सुनगढ़ी अध्यक्ष पवन पांडे ने बताया कि अब दोनों पक्षों में समझौता हो चुका है, ऐसे में पुलिस कोई लीगल एक्शन नहीं ले सकती। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर ही आगे की कार्रवाई होगी। सीएमओ आलोक कुमार ने कहा कि समझौते के बावजूद जांच जारी रहेगी और रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी।
डॉक्टर चरित बोरा ने कहा कि परिजनों से मानवता के आधार पर समझौता किया गया है। लेकिन पीड़ित परिवार को चुप कराने के इस ‘मानवता समझौते’ ने पूरे स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
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पीलीभीत जिले में चार्ट फिरोजपुर गांव के 25 वर्षीय विष्णु की संदिग्ध मौत के मामले ने स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते शनिवार को विष्णु अपनी गर्भवती पत्नी और रिश्तेदार के साथ ससुराल जाते समय सड़क हादसे में घायल हो गया था। जिला अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद उसे गंभीर हालत में एक निजी न्यूरो केयर एवं सर्जिकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां 8 जुलाई को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतक के परिजनों ने अस्पताल पर लाश का इलाज करने का सनसनीखेज आरोप लगाया। परिजनों का कहना था कि डॉक्टरों ने उन्हें मरीज से मिलने तक नहीं दिया और जब उन्होंने मरीज को देखने की जिद की तो आनन-फानन में हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। इस दौरान एंबुलेंस चालक ने मरीज को मृत बताते हुए ले जाने से इंकार कर दिया, जिसके बाद अस्पताल स्टाफ मौके से फरार हो गया।
घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के बाहर शव रखकर कई घंटे तक प्रदर्शन किया। पुलिस को तहरीर देकर मृतक के परिजनों ने डॉक्टर चरित बोरा पर लाश का इलाज करने का आरोप लगाया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी।
वहीं डॉक्टर चरित बोरा ने दबाव बढ़ता देख बैकफुट पर आते हुए परिजनों को मोटी रकम देकर समझौता कर लिया। शनिवार को घंटों बंद कमरे में वार्ता चली, नोटरी वकील बुलाकर स्टांप पेपर पर लिखित समझौता कराया गया। मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर ही आगे की कार्रवाई होगी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डॉक्टर खुद को निर्दोष बता रहे थे तो फिर उन्हें समझौता करने की जरूरत क्यों पड़ी? समझौते के दौरान पुलिस की मौजूदगी पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, लाश के इलाज जैसे गंभीर आरोप लगने के बावजूद पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई, जिससे पूरे मामले को लेकर बचाव की पटकथा पहले से ही तैयार करने के आरोप लग रहे हैं।
थाना सुनगढ़ी अध्यक्ष पवन पांडे ने बताया कि अब दोनों पक्षों में समझौता हो चुका है, ऐसे में पुलिस कोई लीगल एक्शन नहीं ले सकती। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर ही आगे की कार्रवाई होगी। सीएमओ आलोक कुमार ने कहा कि समझौते के बावजूद जांच जारी रहेगी और रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी।
डॉक्टर चरित बोरा ने कहा कि परिजनों से मानवता के आधार पर समझौता किया गया है। लेकिन पीड़ित परिवार को चुप कराने के इस ‘मानवता समझौते’ ने पूरे स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
