पाली में 03 साल में डेंगू-मेलरिया 529 मरीज आए सामने: चिकित्सा विभाग का दावा, मौत भी नहीं, आंकड़े नहीं बताने के मुद्दे पर हुई थी पत्रकार-प्रभारी मंत्री में तकरार – Pali (Marwar) News

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पाली में 03 साल में डेंगू-मेलरिया 529 मरीज आए सामने:  चिकित्सा विभाग का दावा, मौत भी नहीं, आंकड़े नहीं बताने के मुद्दे पर हुई थी पत्रकार-प्रभारी मंत्री में तकरार – Pali (Marwar) News

पाली में 03 साल में डेंगू-मेलरिया 529 मरीज आए सामने: चिकित्सा विभाग का दावा, मौत भी नहीं, आंकड़े नहीं बताने के मुद्दे पर हुई थी पत्रकार-प्रभारी मंत्री में तकरार – Pali (Marwar) News


11 जून को सर्किट हाऊस में प्रेस कांफ्रेस के दौरान पाली जिले में डेंगू-मलेरिया के आंकड़े चिकित्सा विभाग की ओर से नहीं बताने और जिले में मानसून के दौरान डेंगू-मलेरिया फैलने का सवाल पत्रकार ने मंत्री झाबरसिंह खर्रा से किया था। इस मुद्दें को लेकर दोनों में तीखी तकरार तक हो गई। मंत्री ने इतना कह दिया कि आप मुझे मरीज बताओ में अपना कार्यक्रम निरस्त करके साथ चलूंगा। तकरार इतनी बढ़ गई कि मंत्री ने यहां तक कह दिया कि पाली में सकारात्मक कम नकारात्मक लोग ज्यादा है। इसलिए पाली में ऐसी स्थिति है। मंत्री की यह बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
इस तकरार को लेकर हमने भी पाली में डेंगू, मलेरिया की स्थिति पिछले तीन सालों में क्या रही इसको जाना तो कुछ यह आंकड़े सामने आए। तीन सालों में डेंगू-मलेरिया के 529 मरीज आए सामने, मौत एक भी नहीं
मामले में सीएमएचओ पाली ने बताया कि पाली में साल 2023 से साल 2025 तक डेंगू के 439 और मलेरिया के 90 मरीज सामने आने की बात कही है। वही डेंगू और मलेरिया से जिले में एक भी मौत नहीं होना बताया है। इसके साथ पिछले तीन सालों में जिले में चिकनगुनिया के 9 मरीज सामने आने की बात कही है। खर्रा के बयान पर सोशल मीडिया पर कांग्रेस-भाजपा के कई नेताओं बयान प्रभारी मंत्री के खिलाफ
पाली में लोग सकारात्मक कम नकारात्मक ज्यादा। जिले के प्रभारी मंत्री झाबरसिंह खर्रा का यह बयान सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है। पाली के कई कांग्रेस और भाजपा नेताओं ने भी खर्रा के इस बयान पर कटास किया।
भाजपा नेता राधेश्याम चौहान ने अधिकारियों के साथ बैठे मंत्री की फोटो शेयर करते हुए कटाक्ष किया कि “पाली के सभी नेताओं के साथ मंत्री जी।”
भाजपा के पूर्व जिला मंत्री निशांत दवे ने लिखा कि “इनको अब कार्यकर्ता नहीं चाहिए, ये सिर्फ इसमें उलझे हैं कि कौन किसका आदमी है।” •
भाजपा नेता रमेश परिहार ने मंत्री के दौरों पर सवाल उठाते हुए लिखा कि “पूरे जिले में कार्यक्रम होते हैं और कुर्सियां खाली रहती हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं को सूचना तक नहीं दी जाती।” इस विवाद में कांग्रेस ने मंत्री के बयान को पूरे जिले का अपमान बताया है। कांग्रेस के पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ ने तंज कसते हुए पूछा, “यदि पाली के लोग नकारात्मक हैं, तो आपकी पार्टी ने पाली वाले को ही प्रदेशाध्यक्ष बना रखा है, क्या वो भी नकारात्मक हैं?” वहीं, कांग्रेस नेता महावीरसिंह सुकरलाई ने कहा कि मंत्री जी समस्याएं हल करने के बजाय जनता पर दोष मढ़कर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।
कांग्रेस नेता प्रेमसिंह राठौड़ ने मंत्री के बयान को अहंकारपूर्ण बताते हुए कहा- जनता यदि सीवरेज, जल निकासी, अतिक्रमण और पेयजल जैसी समस्याओं पर सवाल पूछती है, तो यह उसकी जागरूकता है, न कि नकारात्मकता। जनता का अपमान करने वाले ऐसे बयानों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से समय आने पर अवश्य दिया जाएगा।
मंत्री के इस बयान का वीडियो वायरल होते ही भाजपा कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए। सोशल मीडिया पर भाजपा नेता किशोर सोमनानी ने लिखा, “पाली महाराणा प्रताप के ननिहाल और बाबोसा भैरोंसिंह शेखावत की कर्मभूमि रही है।
इसी पाली ने ओम माथुर जैसा संगठनकर्ता और मदन राठौड़ जैसा नेतृत्व (प्रदेशाध्यक्ष) पार्टी को दिया है। यदि विकास के लिए सवाल पूछना नकारात्मकता है, तो पाली का हर व्यक्ति नकारात्मक है। युवा मोर्चा के पूर्व जिला महामंत्री कांतिलाल वैष्णव ने मुख्यमंत्री से मंत्री को तुरंत हटाने की मांग करते हुए लिखा, पाली के लोगों ने वर्षों से भाजपा का अभेद्य किला बनाए रखा, क्या यही हमारी नकारात्मकता है? पूर्व पार्षद मुकेश गोस्वामी ने अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता की कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

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