पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग: हापुड़ में अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार कर डीएम को सौंपा ज्ञापन – Hapur News h3>
दानिश, हापुड़2 मिनट पहले
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हापुड़ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने सोमवार को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। हापुड़ बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने उपनिबंधक कार्यालय में भी काम रोक दिया। इससे वादकारियों को काफी परेशानी हुई।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने जिला मुख्यालय पर नारेबाजी की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय को सौंपा। अधिवक्ताओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के लिए हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग दोहराई। यह मांग वे पिछले 50 वर्षों से उठाते आ रहे हैं।
22 जिलों का क्षेत्राधिकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास
हापुड़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय कंसल और सचिव वीरेंद्र सैनी ने ज्ञापन में बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रयागराज में है। इसकी एक बेंच लखनऊ में है जो 15 आसपास के जिलों को कवर करती है। इसके विपरीत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों का क्षेत्राधिकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास है। यह सहारनपुर से 850 किलोमीटर से अधिक दूर है। यह दूरी वादकारियों और अधिवक्ताओं के लिए समय, धन और संसाधनों की बर्बादी का कारण बनती है।
लोग सस्ता और सुगम न्याय पाने से वंचित
ज्ञापन में तुलना दी गई कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मात्र 1.64 लाख की आबादी के लिए चौथी हाईकोर्ट बेंच स्थापित की गई है। जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 7 करोड़ से अधिक आबादी को अभी तक कोई बेंच नहीं मिली। अधिवक्ताओं ने इसे अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संविधान में “न्याय का अधिकार” प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग सस्ता और सुगम न्याय पाने से वंचित हैं।
हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर हापुड़ बार एसोसिएशन ने कार्य ठप रखा। अधिवक्ताओं ने मांग की कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए तत्काल कदम उठाएं। इससे वादकारियों को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय मिल सकेगा।
इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में हापुड़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय कंसल, सचिव वीरेंद्र सैनी, विकास त्यागी, भोपाल शिशोदिया, जितेंद्र चौधरी, संजय चौधरी, सुधीर त्यागी, मुकुल चौधरी, पीयूष शर्मा, मोनिका सिद्धू, उज्जवल कंसल, सुधांश दत्त शर्मा, नवाजिश, उज्जवल चौधरी, और अन्य अधिवक्ता शामिल थे।
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दानिश, हापुड़2 मिनट पहले
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हापुड़ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने सोमवार को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। हापुड़ बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने उपनिबंधक कार्यालय में भी काम रोक दिया। इससे वादकारियों को काफी परेशानी हुई।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने जिला मुख्यालय पर नारेबाजी की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय को सौंपा। अधिवक्ताओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के लिए हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग दोहराई। यह मांग वे पिछले 50 वर्षों से उठाते आ रहे हैं।
22 जिलों का क्षेत्राधिकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास
हापुड़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय कंसल और सचिव वीरेंद्र सैनी ने ज्ञापन में बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रयागराज में है। इसकी एक बेंच लखनऊ में है जो 15 आसपास के जिलों को कवर करती है। इसके विपरीत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों का क्षेत्राधिकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास है। यह सहारनपुर से 850 किलोमीटर से अधिक दूर है। यह दूरी वादकारियों और अधिवक्ताओं के लिए समय, धन और संसाधनों की बर्बादी का कारण बनती है।
लोग सस्ता और सुगम न्याय पाने से वंचित
ज्ञापन में तुलना दी गई कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मात्र 1.64 लाख की आबादी के लिए चौथी हाईकोर्ट बेंच स्थापित की गई है। जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 7 करोड़ से अधिक आबादी को अभी तक कोई बेंच नहीं मिली। अधिवक्ताओं ने इसे अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संविधान में “न्याय का अधिकार” प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग सस्ता और सुगम न्याय पाने से वंचित हैं।
हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर हापुड़ बार एसोसिएशन ने कार्य ठप रखा। अधिवक्ताओं ने मांग की कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए तत्काल कदम उठाएं। इससे वादकारियों को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय मिल सकेगा।
इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में हापुड़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय कंसल, सचिव वीरेंद्र सैनी, विकास त्यागी, भोपाल शिशोदिया, जितेंद्र चौधरी, संजय चौधरी, सुधीर त्यागी, मुकुल चौधरी, पीयूष शर्मा, मोनिका सिद्धू, उज्जवल कंसल, सुधांश दत्त शर्मा, नवाजिश, उज्जवल चौधरी, और अन्य अधिवक्ता शामिल थे।
