ट्रांसमिशन कंपनी की 6,279 करोड़ राजस्व मांग पर आपत्ति: 6.23 करोड़ किलोवाट क्षमता, 8.17 करोड़ किलोवाट मांग, कैसे मिलेगी 24 घंटे बिजली – Uttar Pradesh News

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ट्रांसमिशन कंपनी की 6,279 करोड़ राजस्व मांग पर आपत्ति:  6.23 करोड़ किलोवाट क्षमता, 8.17 करोड़ किलोवाट मांग, कैसे मिलेगी 24 घंटे बिजली – Uttar Pradesh News

ट्रांसमिशन कंपनी की 6,279 करोड़ राजस्व मांग पर आपत्ति: 6.23 करोड़ किलोवाट क्षमता, 8.17 करोड़ किलोवाट मांग, कैसे मिलेगी 24 घंटे बिजली – Uttar Pradesh News

नियामक आयोग की बैठक में ट्रांसमिशन कंपनी की याचिका पर हुई सुनवाई।

उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन और यूपीएसएलडीसी की बिजली दरों व वार्षिक राजस्व आवश्यकता पर मंगलवार को विद्युत नियामक आयोग में सुनवाई हुई। ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के 6,279 करोड़ रुपए की वार्षिक राजस्व आवश्यकता बताई है। ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ने इसके

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विद्युत नियामक आयोग के सभागार में आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की मौजूदगी में सुबह 11 बजे से सुनवाई शुरू हुई, जो दोपहर 1 बजे तक चली। सबसे पहले पावर ट्रांसमिशन ने अपना लेखा–जोखा पेश किया।

नियामक आयोग के समक्ष दर्ज कराई गई आपत्ति

आम उपभोक्ताओं के साथ–साथ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन की इस मांग का विरोध किया। कहा कि ट्रांसमिशन कंपनी को पहले अपना सिस्टम ठीक करना चाहिए। निजीकरण के नाम पर टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग (टीबीसीबी) व्यवस्था पर भी परिषद ने तत्काल रोक लगाने की मांग की।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने जताई आपत्ति।

जरूरत से कम है ट्रांसमिशन की क्षमता, कैसे मिलेगी 24 घंटे बिजली?

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के 132 केवी सब-स्टेशनों की कुल क्षमता 69,232 एमवीए यानी 6.23 करोड़ किलोवाट है। जबकि प्रदेश के 3.61 करोड़ उपभोक्ताओं का स्वीकृत भार 8.17 करोड़ किलोवाट है।

गर्मी के पीक आवर्स में डायवर्सिटी फैक्टर 1:1 होने पर सिस्टम दबाव में आ जाता है। ऊपर से बिजली चोरी का बोझ भी सिस्टम पर पड़ता है। ऐसे में 24 घंटे निर्बाध बिजली सप्लाई संभव ही नहीं है।

निजीकरण से पहले ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन 25% सस्ता था

परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि जहां ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन 25% सस्ते में काम करता था। वहीं निजी कंपनियां 25% से ज्यादा महंगी दरों पर काम कर रही हैं। परिषद ने यूपीएसएलडीसी को स्वतंत्र करने की मांग उठाई।

वर्मा ने कहा कि ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन, उत्पादन निगम और यूपीएसएलडीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एक ही हैं, जो गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही व्यक्ति के अधीन होने से कोई अपने खिलाफ कैसे कार्रवाई करेगा?

परिषद ने मांग रखी कि यूपीएसएलडीसी भारत सरकार के नियमों के तहत 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करे और उत्पादन इकाइयों को रिजर्व शटडाउन की अनुमति न दे।

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