जबलपुर के बुजुर्ग से 76 लाख की ठगी: ठग ने SC का खाता बताकर जमा कराए 76 लाख,ह्यूमन ट्रैफिकिंग का दिखाया डर; आरोपी रिमांड पर – Jabalpur News h3>
आरोपी अजय शर्मा और वेदप्रकाश वर्मा।
आईपीएस अधिकारी बनकर और सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेज दिखाकर 72 वर्षीय बुजुर्ग के साथ साइबर ठगी करने वाले दो आरोपियों को जबलपुर क्राइम ब्रांच की टीम ने उत्तरप्रदेश के लखनऊ से गिरफ्तार किया है। गिरफ्त में आए ये वो लोग हैं, जिन्होंने लालच में आकर ठगों को कि
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पुलिस के मुताबिक जल्द ही इनकी कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए मास्टरमाइंड तक पहुंचकर उसे पकड़ लिया जाएगा। साइबर ठगों ने 24 नवंबर 2025 को संजीवनी नगर निवासी अनिल कुमार नन्हौरया को ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में फंसने का झांसा देकर 76 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए। गिरफ्त में आए आरोपियों के नाम अजय वर्मा और वेदप्रकाश वर्मा हैं।
76 लाख की ठगी मामले में क्राइम ब्रांच ने लखनऊ से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
ऐसे हुई थी ठगी
22 नवंबर 2025 को अनिल कुमार अपने घर पर बैठे थे। सुबह करीब 10:30 बजे उनके मोबाइल पर काॅल आया। आरोपी ने अपने आपको डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम का कर्मचारी बताया। अनिल कुमार को उसने बताया कि आपके नाम से एक मोबाइल सिम जारी हुई है, जिसका उपयोग लोगों को डराने, धमकाने में किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट दिल्ली थाने में दर्ज हुई है, जहां जाकर स्टेटमेंट दर्ज कराने होंगे। बुजुर्ग ने प्रार्थना की तो उनसे कहा गया कि ऑनलाइन बयान दर्ज कराने के लिए दिल्ली थाने में इस मोबाइल नंबर 9573352514 पर बात कर लो।
मैं आईपीएस विजय कुमार बोल रहा हूं
बुजुर्ग अनिल कुमार ने दिए गए नंबर पर सुबह करीब 11:21 बजे काॅल किया, तो सामने से आवाज आई कि किससे बात करनी है, मैं आईपीएस विजय कुमार बोल रहा हूं, इतना बोलने के बाद ही फोन कट गया। 2 मिनट के बाद बुजुर्ग के मोबाइल पर वीडियो काॅल आया। सामने एक शख्स दिखाई दे रहा था, जो कि अपने आपको आईपीएस अधिकारी बता रहा था। उसने बुजुर्ग के मोबाइल नंबर पर केस नंबर 430/2025 भेजा और कहा कि दिल्ली पुलिस के माध्यम से यह प्राप्त हुआ है।
बुजुर्ग को डराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का भेजा फर्जी दस्तावेज।
22 नवंबर की दोपहर 1:23 बजे फिर से आईपीएस अधिकारी बनकर विजय कुमार नाम के व्यक्ति ने वीडियो काॅल किया। उसने अनिल कुमार से कहा कि सीबीआई में दर्ज सदाकत खान ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में संदिग्ध है, उसके पास से आपके नाम का एटीएम कार्ड मिला है, जो केनरा बैंक मुंबई का है।
आईपीएस बनकर काॅल पर बात कर रहे अधिकारी ने अनिल कुमार से कहा कि पूछताछ के दौरान सदाकत खान ने आपका नाम लिया है। सुप्रीम कोर्ट से एक पत्र भी आपके नाम पर जारी हुआ है, जो कि वॉट्सऐप पर भेजा जा रहा है। विजय कुमार बनकर बात कर रहे शख्स ने बुजुर्ग से कहा कि यह एक सीक्रेट मिशन है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के हिसाब से किया जा रहा है। इसकी जानकारी अगर जनता के बीच जाती है, तो ना सिर्फ 3 साल की सजा है, बल्कि 5 लाख तक का जुर्माना है। इतना सुनते ही बुजुर्ग के होश उड़ गए।
अनिल कुमार के नाम पर दिल्ली क्राइम ब्रांच में बताई गई एफआईआर।
हर 3 घंटे मे देना होगा लोकेशन
क्राइम ब्रांच का आईपीएस अधिकारी विजय कुमार बनकर बात कर रहे ठग ने डराते हुए अनिल कुमार से हर तीन घंटे की लोकेशन और एक्टिविटी मांगी, साथ ही कहा कि यह सब सीक्रेट रखना है। डरकर जैसा ठग बोलते गए, वैसा बुजुर्ग करते गए। 23 नवंबर 2025 को फिर से कथित आईपीएस अधिकारी विजय कुमार ने वॉट्सऐप काॅल किया और कहा कि आपके नाम अरेस्ट वारंट जारी हुआ है, जब्ती की कार्रवाई भी होगी। सीबीआई अधिकारी कीर्ति सान्याल के माध्यम से अनुमति प्राप्त करना होगा।
24 नवंबर 2025 को अनिल कुमार के मोबाइल पर 8712821335 नंबर से वॉट्सऐप काॅल आता है, जिसमें कहा जाता है कि आपके खिलाफ कार्रवाई की प्रायोरिटी इन्वेस्टिगेशन के लिए अनुमति मिल गई है। आपको अगर कार्रवाई से बचना है तो सभी एफडी तुड़वाकर फंड सुप्रीम कोर्ट के खाते में आज ही जमा करना होगा। जो वेरिफाइड करने के बाद आपको वापस कर दिया जाएगा।
ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस से डरे बुजुर्ग ने आईपीएस अधिकारी बनकर बात कर रहे शख्स की हर बात मान ली और फिर कीर्ति सान्याल के द्वारा दिए गए सुप्रीम कोर्ट के खाता क्रमांक 730905000678 आईसीआईसीआई बैंक में अनिल कुमार ने एक बार में ही आरटीजीएस के माध्यम से राशि जमा कर दी।
बुजुर्ग के मोबाइल पर वॉट्सऐप के माध्यम से भेजे गए सुप्रीम कोर्ट और क्राइम ब्रांच के सभी दस्तावेज फर्जी निकले। जब तक अनिल कुमार को कुछ समझ में आता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परेशान होकर अनिल कुमार ने साइबर पुलिस और क्राइम ब्रांच से शिकायत की।
दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद तीन दिन की ली गई है रिमांड।
खाताधारक और उसका सहयोगी गिरफ्तार
अनिल कुमार की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने जब जांच की तो पता चला कि जिस खाते में उन्होंने 76 लाख रुपए जमा किए थे, वह लखनऊ में रहने वाले अजय वर्मा का था। लोकेशन के आधार पर जबलपुर क्राइम ब्रांच की टीम यूपी लखनऊ पहुंची, जहां से खाताधारक और उसके सहयोगी वेदप्रकाश वर्मा को गिरफ्तार करने के बाद सोमवार को जबलपुर लेकर पहुंची।
क्राइम ब्रांच निरीक्षक जितेंद्र पाटकर ने बताया कि पूछताछ के दौरान अजय वर्मा ने बताया कि उसके खाते में रुपए आए थे, पर यह नहीं पता कि किसने भेजा था। आरोपी ने बताया कि उसके 24 नवंबर को उसके मोबाइल पर काॅल आया था कि आपके खाते में 76 लाख रुपए आए हैं, उसका एक प्रतिशत 76 हजार रुपए रखकर बाकी का पैसा दिए गए खाते में जमा कर दीजिए। अजय वर्मा ने वैसा ही किया, इस दौरान पूरे अपराध में वेदप्रकाश वर्मा ने भी सहयोग किया।
वेदप्रकाश ने मिलवाया था फ्राड करने वाले से
निरीक्षक जीतेंद्र पाटकर ने बताया कि खाताधारक अजय वर्मा है, जिसे वेदप्रकाश ने लखनऊ के एक होटल में फ्राड करने वाले से मिलवाया था। इसके लिए उसे भी ठगों ने कमीशन दिया था। इंस्पेक्टर के मुताबिक ठगों की यह चैन बहुत लंबी है, जिसमें एक, दो नहीं बल्कि कई लोग शामिल हैं। क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी सामने आया है कि 24 नवंबर 2025 को अलग-अलग खातों से करीब 3 करोड़ रुपए साइबर ठग के खाते में गए हैं।
