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‘कुलदीप सेंगर हमें 5 हजार किमी दूर से मरवा देगा’: रेप विक्टिम बोली- उसकी बेटी CBI अफसर से मिली, बृजभूषण ने सस्पेंड कराई सजा

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‘कुलदीप सेंगर हमें 5 हजार किमी दूर से मरवा देगा’:  रेप विक्टिम बोली- उसकी बेटी CBI अफसर से मिली, बृजभूषण ने सस्पेंड कराई सजा

‘कुलदीप सेंगर हमें 5 हजार किमी दूर से मरवा देगा’: रेप विक्टिम बोली- उसकी बेटी CBI अफसर से मिली, बृजभूषण ने सस्पेंड कराई सजा

‘5 किमी क्या, 5 हजार किमी भी उसके लिए कुछ नहीं है। वो हमें कहीं भी मरवा सकता है। मेरे लिए जिंदगी भर का खतरा है। उसके मरने के बाद भी खतरा रहेगा, क्योंकि उसके लोगों को मेरा चेहरा याद रहेगा कि इसी लड़की ने हमारे विधायक को जेल भिजवाया था।’

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उन्नाव रेप केस की विक्टिम ये बात कहते हुए भावुक हो जाती हैं। 23 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस केस में BJP के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा सस्पेंड कर दी। सेंगर को उम्रकैद की सजा मिली है। कोर्ट ने जमानत देते हुए ये शर्त रखी कि कुलदीप सेंगर को विक्टिम से 5 किमी दूर रहना होगा। विक्टिम का कहना है कि इस फैसले ने हमारी उम्मीदें तोड़ दी हैं।

कोर्ट के फैसले के बाद दैनिक NEWS4SOCIALने विक्टिम और उनकी मां से बात की। उन्होंने CBI और BJP नेता बृजभूषण शरण सिंह पर सेंगर की मदद करने का आरोप लगाया। हमने विक्टिम के वकील और कानून के जानकारों से भी समझा कि कुलदीप सेंगर की सजा सस्पेंड होने के क्या मायने हैं।

हालांकि, सजा सस्पेंड होने के बावजूद कुलदीप सेंगर को जेल में रहना होगा क्योंकि 2020 में विक्टिम के पिता की हत्या में 10 साल की सजा मिली हुई है। इस फैसले के खिलाफ भी कुलदीप सेंगर ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की है।

‘लोग धमकी देकर जाते हैं कि ज्यादा दिन दुनिया में नहीं रहोगी’ विक्टिम के साथ 4 जून, 2017 को रेप हुआ था। आरोप विधायक कुलदीप सेंगर पर था, इसलिए मामला सुर्खियों में आ गया। विक्टिम ने पुलिस स्टेशन में सुनवाई न होने पर मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश की थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के दखल के बाद कुलदीप सेंगर को 13 अप्रैल 2018 में गिरफ्तार किया गया।

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विक्टिम और उनका परिवार दिल्ली में रह रहा है। उनकी सिक्योरिटी में CRPF के 9 जवान तैनात रहते हैं। विक्टिम कहती हैं, ‘कोर्ट के फैसले से बहन-बेटियों की हिम्मत कमजोर हो गई है। मेरे साथ अन्याय हो रहा है। जज मुझसे बोलते थे कि आप कुछ नहीं बोल सकतीं। आपके वकील बोलेंगे। मेरा ही केस, मेरे साथ रेप हुआ और मुझे ही बोलने से रोका गया।’

विक्टिम का दावा है कि उन्हें आज भी धमकियां मिलती हैं। वे कहती हैं, ‘लोग बगल से निकलते हुए बोलते हैं कि ज्यादा दिन तक दुनिया में रह नहीं पाओगी। ऐसे बोलते हैं कि CRPF वाले भी नहीं समझ पाते। पता नहीं, कब मुझे मार दिया जाएगा।’

‘CBI ठीक से बहस करती तो जमानत नहीं मिलती’ कोर्ट के फैसले के बाद विक्टिम ने अपनी मां और महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया था। इस पर वे कहती हैं, ‘मैं धरना देने गई थी। मुझे बोला गया कि इसकी परमिशन नहीं है। तो क्या रेप करने की परमिशन है, क्या बहन-बेटियों को छेड़ने की परमिशन है।’

कुलदीप सेंगर की सजा सस्पेंड होने के बाद विक्टिम और उनकी मां ने इंडिया गेट पर प्रोटेस्ट किया था। हालांकि, पुलिस ने उन्हें यहां से हटा दिया।

‘सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि कुत्तों को सड़कों से हटाया जाए। कुत्तों को न हटाकर रेप के दोषियों को हटाया जाए, ताकि बहन-बेटियों को इंसाफ मिल सके। कुत्ते रहेंगे तो कम से कम लड़कियों को बाहर निकलने पर सुरक्षा मिलेगी। इस फैसले को देखते हुए लगता है कि महिलाओं को इंसाफ मिलना मुश्किल है।’

विक्टिम आरोप लगाती हैं कि कुलदीप सेंगर को जमानत दिलाने में BJP नेता बृजभूषण शरण सिंह का हाथ है। सरकार उनसे डरती है। उन्होंने भी पहलवान लड़कियों के साथ गलत किया था।

CBI पर सवाल उठाते हुए कहती हैं, ‘अगर CBI अच्छे से बहस करती, तो उसे जमानत नहीं मिलती। कुलदीप सेंगर की बेटी बहस के दौरान कोर्ट आती थी। वो पीछे से आकर CBI के जांच अधिकारी से मिलती थी। मैंने ये कोर्ट में देखा है।’

मां बोलीं- जिसे फांसी होनी चाहिए, उसे जमानत मिल गई विक्टिम की मां भी उनके साथ हैं। वे कहती हैं, ‘कोर्ट ने अच्छा नहीं किया। कुलदीप सेंगर को जमानत मिलना गलत है। उसे तो फांसी की सजा होनी चाहिए। हमने आठ साल लड़ाई लड़ी है। मेरे पति को उन्नाव में पीट-पीटकर मार दिया गया। बच्चों को अनाथ कर दिया।’

‘सरकार कुलदीप सेंगर की जमानत कैंसिल कराए। जब तक ऐसा नहीं होगा, हम धरना-प्रदर्शन करना बंद नहीं करेंगे। मेरे बच्चे भटक रहे हैं। ये कैसा न्याय है। मेरे परिवार की सुरक्षा कम कर दी है। उन्नाव में गवाह हैं, उनकी सुरक्षा हटा दी है। निचली अदालत के जज ने कहा था कि इन्हें सुरक्षा की जरूरत है। कुलदीप सेंगर को बड़े नेता बचा रहे हैं।’

किस आधार पर कुलदीप सेंगर की सजा सस्पेंड हुई सजा सस्पेंड करना भी जमानत की तरह ही है। सजा पाए व्यक्ति के पास सजा के खिलाफ अपील करने का अधिकार होता है। हाई कोर्ट के पास अधिकार है कि वह सजा सस्पेंड कर जमानत दे दे। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन की बेंच ने कुलदीप सेंगर की सजा सस्पेंड की है। कोर्ट ने विधायक को ‘पब्लिक सर्वेंट’ नहीं मानने का तर्क स्वीकार करते हुए ये फैसला सुनाया। ये निलंबन अपील पर सुनवाई पूरी होने तक रहेगा।

रेप केस में दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट ने IPC और POCSO की धाराओं के तहत कुलदीप सेंगर को दोषी पाया था। 20 दिसंबर 2019 को निचली अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सेंगर के वकीलों ने 2020 में इसे दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी।

POCSO की धारा-5 में गंभीर यौन हिंसा के मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। धारा-5(C) बच्चियों के साथ पब्लिक सर्वेंट द्वारा की गई गंभीर यौन हिंसा के बारे में है। इसी तरह IPC की धारा 376 (2) में भी पब्लिक सर्वेंट द्वारा किए गए रेप पर सजा का प्रावधान है। हाई कोर्ट में विधायक को पब्लिक सर्वेंट नहीं मानने की अपील की गई थी। कोर्ट के सामने सवाल यही था कि कुलदीप सेंगर को पब्लिक सर्वेंट माना जाए या नहीं।

सेंगर के वकीलों ने दलील दी थी कि ट्रायल कोर्ट ने 1997 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के आधार पर दोषी को पब्लिक सर्वेंट माना था। उस केस में भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत आरोपी विधायक को पब्लिक सर्वेंट माना गया था। POCSO की धारा-2 (2) में पब्लिक सर्वेंट की परिभाषा IPC की धारा-21 से लाई गई है। इसके तहत विधायक को पब्लिक सर्वेंट नहीं माना जाता है।

‘सुप्रीम कोर्ट ने विधायक–सांसद को पब्लिक सर्वेंट माना, हाईकोर्ट ने नहीं’ ये सवाल हमने सीनियर वकील और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत दवे से पूछा। वे कहते हैं कि एक विधायक को पब्लिक सर्वेंट नहीं कहना, दुर्भाग्य की बात है। विधायक संविधान के तहत शपथ लेता है। विधानसभा का सदस्य बनता है और जनता के काम करने के लिए चुना जाता है। विधायकों को भत्ते मिलते हैं, तो इन्हें पब्लिक सर्वेंट नहीं कहना हैरान करने वाली बात है।

प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विधायक और सांसद पब्लिक सर्वेंट हैं, POCSO तो और कड़ा कानून है। इसमें हाई कोर्ट का विधायकों का पब्लिक सर्वेंट नहीं मानना ज्यादती है।

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दवे आगे कहते हैं, ‘POCSO नाबालिग बच्चों खासकर लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराध को रोकने के लिए लाया गया था। हाई कोर्ट को इस कानून की व्याख्या उदार तरीके से करनी चाहिए थी। इसकी व्याख्या ऐसी होनी चाहिए कि उसका फायदा पीड़िता को मिलना चाहिए, न कि दोषी को।’

‘कोर्ट कानून की धारा-4 को भी देख सकती थी, जिसमें आम लोगों को उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है। पीड़िता के साथ रेप किया गया, उसके पिता को मारा गया, उसके वकील की मौत हो गई। ये सारी बातें हाई कोर्ट को देखनी चाहिए थीं। सिर्फ पब्लिक सर्वेंट के तकनीकी पक्ष को देखकर फैसला देना गैर-जिम्मेदाराना है। कानून के पीछे मकसद क्या है, इसे देखकर बेल नहीं देनी चाहिए थी।’

दवे हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल करते हैं कि जजों ने ट्रायल कोर्ट की फाइंडिंग्स को सही से नहीं पढ़ा है। उसे सही तरीके से जांचा नहीं गया। वो दोषी व्यक्ति है। ये कोई पेंडिंग ट्रायल नहीं था।

वकील बोले- हाई कोर्ट ने दोषी पर दया की, हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे पीड़िता के वकील महमूद प्राचा कहते हैं, ‘अदालत ने कुलदीप सेंगर को दया का पात्र पाया, पीड़ित बच्ची को नहीं। कोर्ट को थोड़ी और गहराई में जाने की जरूरत थी। निलंबन के मामलों में हाइपर टेक्निकल चीजों में जाना मना हैं। ये सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा है।’

प्राचा कहते हैं कि जो आधार बताए गए हैं, उस पर सजा का निलंबन नहीं होना चाहिए। उसी आधार पर हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले हैं। वे CBI पर भी आरोप लगाते हैं कि जांच एजेंसी पहले दिन से कोशिश करती रही कि कुलदीप सेंगर की मदद की जाए और उसे बरी कराया जाए। हालांकि, सेंगर के खिलाफ सबूत इतने थे कि निचली अदालत ने उन्हें सजा सुनाई थी।

………………………….. उन्नाव रेप केस से जुड़ी ये रिपोर्ट भी पढ़िए

सेंगर को जमानत के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर प्रदर्शन

उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा सस्पेंड होने के फैसले के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है। 26 दिसंबर को पीड़ित परिवार के साथ महिलाओं ने दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि सेंगर को किसी भी हालत में राहत नहीं मिलनी चाहिए। न्याय के लिए वे सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगी। पढ़ें पूरी खबर…