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कचरे का नया कानून…: 900 से ज्यादा बड़ी कॉलोनियों को खुद या थर्ड पार्टी के जरिए करना होगा कचरे का निपटारा – Bhopal News

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कचरे का नया कानून…:  900 से ज्यादा बड़ी कॉलोनियों को खुद या थर्ड पार्टी के जरिए करना होगा कचरे का निपटारा – Bhopal News

कचरे का नया कानून…: 900 से ज्यादा बड़ी कॉलोनियों को खुद या थर्ड पार्टी के जरिए करना होगा कचरे का निपटारा – Bhopal News

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भोपाल8 मिनट पहलेलेखक: अनूप दुबे

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भोपाल में 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए केंद्र सरकार के नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों ने शहर के एक बड़े हिस्से की नींद उड़ा दी है।

इस नए नियम का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला असर भोपाल की 900 से अधिक कॉलोनियों, सोसायटियों और बड़े संस्थानों पर पड़ने जा रहा है, जो केवल अपने यहां होने वाली पानी की खपत के कारण सीधे ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ (बड़ा कचरा उत्पादक) के कड़े कानून के दायरे में आ गए हैं। यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। दिलचस्प बात यह भी है कि इस नियम के दायरे में खुद नगर निगम का तुलसी नगर स्थित नया मुख्यालय भी शामिल हो गया है।

नए नियमों के मुताबिक, जिस भी परिसर में रोजाना 40,000 लीटर या उससे अधिक पानी की खपत होती है, उसे अब अपना कचरा खुद ठिकाने लगाना होगा। इस एक शर्त ने भोपाल के करीब 900 से ज्यादा रिहायशी और व्यावसायिक परिसरों को सीधे इस कड़े कानून के दायरे में ला खड़ा किया है। नगर निगम के पास इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए 18 महीने (डेढ़ साल) का समय है। इस दौरान शहर की पूरी सूरत बदलने वाली है।

हर घर का हिसाब

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नगर निगम को हैंडओवर हो चुकीं शहर की 1273 कॉलोनियों में अब आगामी डेढ़ साल के भीतर 4-डस्टबिन मॉडल लागू करना अनिवार्य होगा। आम जनता को अब केवल गीला और सूखा नहीं, बल्कि कुल चार अलग-अलग श्रेणियों में कचरे को छांटकर रखना होगा।

अवैध और निजी कॉलोनियों के लिए निजी कॉलोनियों को बल्क वेस्ट जनरेटर के रूप में पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। वहीं, अवैध कॉलोनियों में आने वाले समय में RWA (रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) के माध्यम से कचरा कलेक्शन होगा, जिसके नियम अलग से तय किए जाएंगे।

नया कानून 1 अप्रैल से लागू, भोपाल में इसे चरणबद्ध तरीके से डेढ़ साल में अमल में लाएंगे

बल्क वेस्ट के नियम और सोसायटियों के पास कचरा निपटान के विकल्प कोई भी परिसर नीचे की 4 शर्तों में से किसी एक को भी पूरा करता है, तो उसे बल्क वेस्ट जनरेटर माना जाएगा

आवासीय: 5 एकड़ (20,000 वर्ग मीटर) या उससे अधिक फ्लोर एरिया वाली सोसायटी।

व्यावसायिक: 5,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले होटल, मॉल या बाजार इसके दायरे में।

कचरे की मात्रा: रोजाना 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकालने वाले संस्थान।

पानी की खपत: रोजाना 40,000 लीटर या अधिक पानी की खपत (जिसके दायरे में भोपाल के 900 संस्थान हैं)।

सोसायटियों के पास 3 विकल्प

विकल्प 1: वे अपने कैंपस के अंदर ही प्रोसेसिंग प्लांट लगाएं और खुद कचरे का निपटारा करें।

विकल्प 2: वे पीसीबी के पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को यह काम सौंपें।

विकल्प 3: निगम को दे सकते हैं, लगेगा प्रति टन चार्ज। यदि संस्थान खुद कचरा प्रोसेस नहीं करते और उसे नगर निगम के ग्लोबल ट्रांसफर स्टेशन (GTS) भेजते हैं, तो दरें इस प्रकार होंगी:

आवासीय सोसायटियां (RWA) ~2,100 सरकारी विभाग, स्कूल, कॉलेज ~2,400 मॉल, होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन ~₹2,700 विशेष छूट: जो कचरा पूरी तरह से अलग-अलग (पृथक) करके देंगे, उन्हें सिर्फ ₹ 922 देना होगा। जुर्माना: मिक्स कचरा देने पर लागू दरों का 150% जुर्माना

लेकिन निगम के सामने बड़ी चुनौती कड़े नियम को जमीन पर लागू करना निगम के लिए अग्निपरीक्षा है। निगम बीते साल कचरा कलेक्शन फीस के रूप में 104 करोड़ रु. वसूलने का लक्ष्य लेकर चल रहा था, लेकिन हकीकत में वह इसका महज 36% यानी सिर्फ 38.43 करोड़ रु. ही वसूल पाया। सामान्य फीस की रिकवरी ही इतनी लचर है, तो 900 से ज्यादा बड़े संस्थानों पर कड़े नियम लागू करना व उनसे नए कमर्शियल चार्ज वसूलना निगम के लिए चुनौती होगा।

दावा… कचरे की करेंगे 100 प्रतिशत ट्रैकिंग दावा किया जा रहा है कि अब शहर में मनमर्जी से कचरा फेंकना नामुमकिन होगा। हर सोसायटी का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होगा। सोसायटियां सिर्फ उसी एजेंसी को कचरा दे सकेंगी जो केंद्रीय पोर्टल पर रजिस्टर्ड होगी और उस एजेंसी को भी सरकार को यह हिसाब देना होगा कि उसने कचरे से बनी खाद या बायोगैस किसे बेची।

खुद निपटारा करने पर टैक्स में मिलेगी राहत जो बड़ी कॉलोनियां बल्क वेस्ट के तहत अपने कैंपस में ही कचरे का पूरी तरह निपटारा (निष्पादन) करेंगी, उनका सालाना कचरा कलेक्शन चार्ज कम किया जाएगा। हालांकि, उनसे कुछ प्रशासनिक चार्ज फिर भी लिया जाएगा। दरों का अंतिम निर्धारण नगर निगम परिषद करेगी। – संस्कृति जैन, निगम कमिश्नर

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