सोमवार, 13 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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लॉर्ड्स पर शतक: यास्तिका भाटिया ने रचा इतिहास, चोट से वापसी की दर्दभरी कहानी भी सुनाई

इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में शतक जड़कर यास्तिका भाटिया ने क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर इतिहास रच दिया है। रविवार को 113 रनों की शानदार पारी खेलकर वे इस ऐतिहासिक मैदान

लॉर्ड्स पर शतक: यास्तिका भाटिया ने रचा इतिहास, चोट से वापसी की दर्दभरी कहानी भी सुनाई
(फोटो: IANS)

इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में शतक जड़कर यास्तिका भाटिया ने क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर इतिहास रच दिया है। रविवार को 113 रनों की शानदार पारी खेलकर वे इस ऐतिहासिक मैदान पर टेस्ट शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बन गईं, और उनका नाम लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज हो गया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस उपलब्धि के बाद यास्तिका ने इसे एक सपने के सच होने जैसा बताया और अपने संघर्ष के दिनों को याद किया।

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बाएं हाथ की इस बल्लेबाज के लिए यह शतक सिर्फ एक पारी नहीं, बल्कि चोट से जूझते हुए की गई एक साल की कड़ी मेहनत का इनाम है। चोट के कारण उन्हें लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था। इस दौरान उन्हें घरेलू वनडे वर्ल्ड कप और महिला प्रीमियर लीग (WPL) जैसे बड़े टूर्नामेंट छोड़ने पड़े, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए एक मुश्किल दौर होता है।

चोट और संघर्ष का मुश्किल दौर

बीसीसीआई द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में यास्तिका ने अपने उस मुश्किल समय के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "यह बहुत मुश्किल था। उस एक साल में मैं किसी भी बड़े टूर्नामेंट जैसे घरेलू वर्ल्ड कप और डब्ल्यूपीएल में नहीं खेल पाई।" उन्होंने माना कि अगर छह महीने पहले कोई उनसे इस उपलब्धि के बारे में पूछता तो उन्हें खुद यकीन नहीं होता। यास्तिका ने कहा, "मैं कहती, 'आप क्या बात कर रहे हैं?' यह सपने जैसा लगता है।"

परिवार और टीम का मिला पूरा साथ

इस संघर्ष भरे दौर से उबरने में उन्हें अपने परिवार और टीम से मिले समर्थन ने बड़ी मदद की। उन्होंने बताया, "बहुत से लोगों ने मेरा साथ दिया। टीम का साथ मिला और उस समय मेरे परिवार का सपोर्ट बहुत बड़ा था।" वे इस मदद के लिए सभी की आभारी हैं।

शतक के बाद भावुक पल

यास्तिका ने शतक पूरा करने के बाद के पलों को याद करते हुए कहा कि वह थोड़ी भावुक हो गई थीं। उन्होंने कहा, "जब मैंने अपना हेलमेट उतारा... मुझे अपने परिवार के चेहरे याद आ रहे थे, और पिछला एक साल जिससे मैं गुजरी थी, वह सब मेरी आंखों के सामने घूम रहा था।" उन्होंने बताया कि उन्होंने जश्न मनाने की योजना बनाई थी, लेकिन भावनाओं में बह गईं। फिर भी उन्होंने तिरंगे को चूमा, जिसे उन्होंने अपने लिए "बहुत गर्व का पल" बताया। उन्होंने आगे देश के लिए और भी बहुत कुछ करने और वर्ल्ड कप जीतने की इच्छा जताई।

इनपुट: IANS

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News4Social स्पोर्ट्स डेस्क

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