Woman DTC Bus Driver: सड़कों पर हौसले की स्टीयरिंग थामने को तैयार हैं 11 महिलाएं, एक-दो दिन में दिल्ली की सड़कों पर बस चलाती नजर आएंगी h3>
नई दिल्ली: ईस्ट दिल्ली में रहने वाली सीमा पिछले 3 साल से दिल्ली में टैक्सी चला रही थीं। जब उन्हें पता चला कि दिल्ली सरकार महिलाओं को बस चलाने की ट्रेनिंग दे रही है और उसके बाद उन्हें डीटीसी में ड्राइवर के रूप में नौकरी भी मिलेगी, तो सीमा ने बिना देर किए आवेदन कर दिया। हालांकि, शुरुआत में जब उनके परिजनों को इस बारे में पता चला, तो उन्हें थोड़ी हैरानी हुई। सीमा को घर में थोड़े विरोध और नाराजगी का सामना भी करना पड़ा, लेकिन जब सीमा ने घरवालों को इस स्कीम के फायदे बताए, तो घरवालों का रुख नरम पड़ गया। सीमा की मेहनत और लगन ने घरवालों को भी उनका साथ देने पर मजबूर कर दिया।
अब दो महीने की ट्रेनिंग लेने के बाद सीमा को जॉइनिंग लेटर मिल गया है। उनकी नियुक्त पूर्वी दिल्ली के ही वेस्ट विनोद नगर डिपो में हुई है। सीमा का कहना है कि यह मेरे लिए बहुत खुशी का मौका है। मैं चाहती हूं कि जब पहले दिन मैं बस लेकर ड्यूटी पर निकलूं, तो मेरे पति, दोनों बच्चे और सास-ससुर भी उस बस में सवारी करें। यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात होगी।
नीतू और उनके जैसी 11 अन्य महिलाएं अब दिल्ली की सड़कों पर डीटीसी और क्ल्स्टर स्कीम की बसें चलाती नजर आएंगी। मंगलवार को इन सभी महिलाओं को उनके जॉइनिंग लेटर दे दिए गए हैं। इनमें नीतू के अलावा बबीता, कोमल, संतोष, संजू, भारती, नीतू, दीपक, शर्मिला, पूजा, किरण और सीमा शामिल हैं। ज्यादातर महिलाएं हरियाणा की हैं, वहीं कुछ महिलाएं यूपी और राजस्थान से भी हैं। इनमें से कुछ अववाहित युवतियां हैं, तो कुछ शादीशुदा हैं और उनके बच्चे भी हैं। इन सभी महिलाओं को नंद नगरी डिपो में दो महीने ट्रेनिंग दी गई है। कुछ महिलाओं के पास तो पहले से हैवी वीइकल चलाने का लाइसेंस भी था।
भारती बताती हैं कि उन्होंने खुद ही हैवी वीइकल चलाना सीख लिया। वह खेतों ट्रैक्टर चलाया करती थीं। उसके बाद उन्होंने हरियाणा में बस चलाने की ट्रेनिंग भी ली और अब यहां दिल्ली में नए सिरे से ट्रेंड होकर वह डीटीसी बस लेकर सड़कों पर उतरेंगी। भारती का कहना था कि जब एक बस का स्टेयरिंग एक महिला के हाथ में रहेगा और अंदर बैठी सभी महिलाएं खुद को बेहद सुरक्षित महसू करेंगी। यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात है। ट्रेनिंग के अपने अनुभवों को शेयर करते हुए ज्यादातर महिलाओं ने दिल्ली के बेतरतरीब और हैवी ट्रैफिक के बीच सुरक्षित तरीके से बस चलाने को अपनी सबसे बड़ी चुनौती बताया। कोमल और पूजा ने कहा कि शुरुआत में तो हम थोड़ी नर्वस थीं, लेकिन हमारी ट्रेनिंग इतनी अच्छी हुई है कि अब हम इस चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इस फरवरी में दिल्ली सरकार ने महिलाओं को बस ड्राइवर के रूप में भर्ती करने के लिए नियुक्ति के मानदंडों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। सरकार ने न्यूनतम ऊंचाई का मानदंड 159 सेमी से घटाकर 153 सेमी कर दिया था। अनुभव के मानदंड को भी 3 साल से घटाकर एक महीने कर दिया गया था। इस कदम से डीटीसी और डिम्ट्स की लगभग 7,370 बसों में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुल गए। अप्रैल में 180 महिलाओं को भारी वाहन चलाने का लाइसेंस दिलाने के लिए सोसाइटी फॉर ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एसडीटीआई), बुराडी में उन्हें प्रशिक्षित करने की भी शुरुआत हुई।
DTC बस चलाएंगी महिलाएं
गहलोत ने बताया कि दो बैचों में 81 महिलाओं ने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और उनमें 38 ने अपने हैवी मोटर वीइकल लाइसेंस प्राप्त कर लिए हैं, जबकि 10 महिलाएं वर्तमान में नंद नगरी स्थित डीटीसी के प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण ले रही हैं। गहलोत ने कहा कि बस ड्राइविंग को करियर विकल्प के रूप में अपना कर आज ये महिलाएं समाज में रोल मॉडल बन गई हैं और मुझे उम्मीद है कि इसके बाद और अधिक महिलाएं बस चालक बनने के लिए प्रेरित होंगी।
दिल्ली की और खबर देखने के लिए यहाँ क्लिक करे – Delhi News
नीतू और उनके जैसी 11 अन्य महिलाएं अब दिल्ली की सड़कों पर डीटीसी और क्ल्स्टर स्कीम की बसें चलाती नजर आएंगी। मंगलवार को इन सभी महिलाओं को उनके जॉइनिंग लेटर दे दिए गए हैं। इनमें नीतू के अलावा बबीता, कोमल, संतोष, संजू, भारती, नीतू, दीपक, शर्मिला, पूजा, किरण और सीमा शामिल हैं। ज्यादातर महिलाएं हरियाणा की हैं, वहीं कुछ महिलाएं यूपी और राजस्थान से भी हैं। इनमें से कुछ अववाहित युवतियां हैं, तो कुछ शादीशुदा हैं और उनके बच्चे भी हैं। इन सभी महिलाओं को नंद नगरी डिपो में दो महीने ट्रेनिंग दी गई है। कुछ महिलाओं के पास तो पहले से हैवी वीइकल चलाने का लाइसेंस भी था।
भारती बताती हैं कि उन्होंने खुद ही हैवी वीइकल चलाना सीख लिया। वह खेतों ट्रैक्टर चलाया करती थीं। उसके बाद उन्होंने हरियाणा में बस चलाने की ट्रेनिंग भी ली और अब यहां दिल्ली में नए सिरे से ट्रेंड होकर वह डीटीसी बस लेकर सड़कों पर उतरेंगी। भारती का कहना था कि जब एक बस का स्टेयरिंग एक महिला के हाथ में रहेगा और अंदर बैठी सभी महिलाएं खुद को बेहद सुरक्षित महसू करेंगी। यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात है। ट्रेनिंग के अपने अनुभवों को शेयर करते हुए ज्यादातर महिलाओं ने दिल्ली के बेतरतरीब और हैवी ट्रैफिक के बीच सुरक्षित तरीके से बस चलाने को अपनी सबसे बड़ी चुनौती बताया। कोमल और पूजा ने कहा कि शुरुआत में तो हम थोड़ी नर्वस थीं, लेकिन हमारी ट्रेनिंग इतनी अच्छी हुई है कि अब हम इस चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इस फरवरी में दिल्ली सरकार ने महिलाओं को बस ड्राइवर के रूप में भर्ती करने के लिए नियुक्ति के मानदंडों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। सरकार ने न्यूनतम ऊंचाई का मानदंड 159 सेमी से घटाकर 153 सेमी कर दिया था। अनुभव के मानदंड को भी 3 साल से घटाकर एक महीने कर दिया गया था। इस कदम से डीटीसी और डिम्ट्स की लगभग 7,370 बसों में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुल गए। अप्रैल में 180 महिलाओं को भारी वाहन चलाने का लाइसेंस दिलाने के लिए सोसाइटी फॉर ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एसडीटीआई), बुराडी में उन्हें प्रशिक्षित करने की भी शुरुआत हुई।
DTC बस चलाएंगी महिलाएं
गहलोत ने बताया कि दो बैचों में 81 महिलाओं ने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और उनमें 38 ने अपने हैवी मोटर वीइकल लाइसेंस प्राप्त कर लिए हैं, जबकि 10 महिलाएं वर्तमान में नंद नगरी स्थित डीटीसी के प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण ले रही हैं। गहलोत ने कहा कि बस ड्राइविंग को करियर विकल्प के रूप में अपना कर आज ये महिलाएं समाज में रोल मॉडल बन गई हैं और मुझे उम्मीद है कि इसके बाद और अधिक महिलाएं बस चालक बनने के लिए प्रेरित होंगी।


