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भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली क्यों बदली गई थी?

https://youtu.be/deFTqS4Z3Nw अंग्रेज जब भारत पर राज करते थे, तब भारत की राजधानी कोलकाता थी। गरमियों में उनके वायसराय शिमला चले जाते थे।

भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली क्यों बदली गई थी?
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अंग्रेज जब भारत पर राज करते थे, तब भारत की राजधानी कोलकाता थी। गरमियों में उनके वायसराय शिमला चले जाते थे। 1905 में बंगाल विभाजन के बाद वहां अंग्रेजों के विरुद्ध भावनाएं भड़कीं। अब अंग्रेज वहां से दूर कहीं राजधानी बनाकर शासन चलाना चाहते थे। उस समय भारत के वायसराय रहे लॉर्ड हार्डिंग ने शिमला से 1911 में लंदन में सुझाव भेजा कि भारत की राजधानी दिल्ली बनाने की इजाजत दी जाए। इसके पीछे मूल कारण यह भी था कि पुराने जमाने में दिल्ली कई राजाओं की राजधानी रह चुकी थी।

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दिल्ली और शिमला में दूरी भी कम थी।उनकी बात मान ली गई। तब इंग्लैंड के राजा किंग जॉर्ज पंचम ने आज के ही दिन यानी 12 दिसंबर 1911 को दिल्ली में नई राजधानी की नींव रखी। पुरानी दिल्ली के साथ-साथ नई दिल्ली को बनाने में 20 साल लगे और फिर 13 फरवरी 1931 को विधिवत दिल्ली राजधानी बनी और यहां से राज-काज होने लगा।तब इंडिया के शासक किंग जॉर्ज पंचम ने दिल्ली दरबार में इसकी आधारशीला रखी थी।

बाद में ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर हरबर्ट बेकर और सर एडविन लुटियंस ने नए शहर की योजना बनाई थी। इस योजना को पूरा करने में 2 दशक लग गए। इसके बाद 13 फरवरी 1931 को आधिकारिक रूप से दिल्ली देश की राजधानी बनी। नई दिल्ली नाम 1927 में दिया गया था, और नई राजधानी का 13 फरवरी 1931 को उद्घाटन किया गया। चलिए जानते कुछ रोचक पहलू….

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चलो आपको बताते हैं कैसे कलकत्ता की बजाए दिल्ली को राजधानी बनाने का ऐलान किया गया था। ब्रिटिश राज के सबसे बड़े तमाशे में दिल्ली दरबार में पहली बार किंग जॉर्ज पंचम अपनी रानी क्वीन मैरी के साथ मौजूद थे। उन्होंने अस्सी हजार लोगों की मौजूदगी में घोषणा की, हमें इंडिया की जनता को ये बताते हुए बेहद हर्ष होता है कि सरकार और उसके मंत्रियों की सलाह पर देश को बेहतर ढंग से प्रशासित करने के लिए ब्रिटिश सरकार भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करती है। उन्होंने यह ऐलान 12 दिसंबर 1911 को किया था।

इंटरनेट के तथ्यों के मुताबिक जब दिल्ली को राजधानी बनाने का ऐलान किया गया था, जब दिल्ली की माली हालत बहुत खराब थी। अर्थात यह बहुत पिछड़ी हुई थी। बाकी के महानगर जैसे बॉम्बे, कलकत्ता और मद्रास हर बात में दिल्ली से काफी आगे थे। यहां तक कि लखनऊ तथा हैदराबाद भी दिल्ली से बेहतर माने जाते थे। दिल्ली की महज 3 प्रतिशत आबादी अंग्रेजी पढ़ पाती थी।

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यही वजह है कि विदेशी भी बहुत कम आते थे। मेरठ (2161 विदेशी) की तुलना में दिल्ली में महज 992 विदेशी ही आते थे। हालात इतने खराब थे कि कोई बड़ा आदमी वहां पैसा लगाने को तैयार नहीं था, लेकिन भौगोलिक दृष्टि से देश के मध्य में होने की वजह से दिल्ली को राजधानी बनाने का ऐलान हुआ। 2 दशक तक इसे विकसित किया गया।वर्ष 1772 में कोलकाता को ब्रिटिश इंडिया की राजधानी बनाया गया था और भारत के प्रथम गवर्नर जनरल वॉरैन हेस्टिंग्स सभी महत्वपूर्ण कार्यालय मुर्शीदाबाद से कोलकाता ले गए थे। लेकिन फिर सन 1911 में दिल्ली को फिर से राजधानी बनाया गया।

S

Shashwat

शशवत News4Social के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय घटनाक्रम, ताज़ा समाचार और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जटिल जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में पाठकों तक पहुँचाने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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