भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनाव आयोग पर आचार संहिता का पालन कराने के अतिरेक में अमानवीय रवैया अपनाने के आरोप के चलते विवादों में घिर गए है। उनके आरोप को चुनाव आयोग ने नकार कर सवाल खड़े कर दिए है तो कांग्रेस ने शिवराज पर झूठ बोलने का आरोप जड़ दिया है। सवाल उठ रहा है कि, आखिर चौहान ने झूठ क्यों बोला।
चौहान ने बुधवार को संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा था कि, चुनाव आयोग ने कांग्रेस की तुलना में भाजपा से ज्यादा सख्ती की और आचार संहिता के पालन के अतिरेक में कई बार अमानवीयता भी की।
चौहान ने कहा था कि, कांग्रेस हर तरफ संदेह का वातावरण बनने में लगी है, चुनाव के मजाक बनाने की कांग्रेस कोशिश कर रही है, दूसरी तरफ कहूँ तो अधिकारियों और आयोग ने ज्यादा सख्ती की तो भाजपा के साथ की, आचार संहिता का पालन कराने के तरिके में आयोग ने कई बार अमानवीयता की। मेरे मित्र, साथी व कार्यकर्ता रघुवीर दांगी की विदिशा में मृत्यु हुई, अंतिम संस्कार में जाना चाहता था, 27 नवंबर को अनुमति नहीं दी और आयोग ने कहा कि, आप दूसरे विधानसभा क्षेत्र में नहीं जा सकते।
चौहान के इस आरोप के बाद आयोग की ओर से जो सफाई आई है उसमें मुख्यमंत्री पर सवाल उठ रहे है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी एल कांताराव ने कहा कि, उन्हें कोई लिखित में आवदेन ही नहीं मिला, कि चौहान वहां जाना (विदिशा) चाहते थे।
राज्य के कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पांच दिसम्बर को आहुत केबिनेट बैठक के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में चुनाव आयोग को भाजपा के प्रति अमानवीय व प्रताड़ना वाला बताते हुए विदिशा के एक दिवंगत भाजपा कार्यकर्ता की अंत्येष्टि में जाने से रोकने का मामला बताया था लेकिन इस मामले में चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण सामने आने के बाद शिवराज सिंह का झूठ सामने आ गया है।उन्होंने झूठ परोसकर चुनाव आयोग पर अमानवीयता व प्रताड़ना के झूठे आरोप लगाये थे।
कमलनाथ ने कहा कि, विदिशा के जिस दिवंगत भाजपा कार्यकर्ता का उन्होंने नाम लेकर उन्होंने अंत्येष्टि में जाने की इच्छा होने पर चुनाव आयोग द्वारा अनुमति नहीं दिये जाने की बात की थी , उसको लेकर कोई लिखित अनुमति नहीं माँगे जाने के चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद शिवराज का झूठ सामने आ गया है। उन्होंने झूठ परोसकर सहानुभूति लेने की व गुमराह करने की कोशिश की है। यह तो चुनावी कार्य में लगे हज़ारों ईमानदार – निष्पक्ष कर्मचारियों का अपमान तो है ही , साथ ही उस दिवंगत भाजपा कार्यकर्ता का भी अपमान है।जिसको लेकर शिवराज ने झूठ बोला।
हर तरफ से सवाल उठ रहे है कि, शिवराज ने आखिर झूठ क्यों बोला और आयोग पर आरोप क्यों लगाया। इसके राजनीतिक मायने भी खोजे जाने लगे है, कई लोगों के लग रहा है कि, नतीजे चौंकाने वाले आ सकते है, लिहाजा प्रलाप जारी है।

