शनिवार, 27 जून 2026 · नई दिल्ली
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दांत क्षय किसे कहते हैं और इसके बचने के उपाय ?

दांत क्षय बैक्टीरिया की वजह से दांतों का धीरे-धीरे नष्ट होना है। इसे समय पर पहचानकर स्वच्छता, फ्लोराइड उपचार और मौखिक कुल्ला से रोका जा सकता है।

दांत क्षय किसे कहते हैं और इसके बचने के उपाय ?

वर्तमान समय में हमें कई तरह की स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पडता है. जिसके लिए काफी बार हमें सिर्फ इस वजह से जान या माल का नुकसान उठाना पडता है कि हमने उस बीमारी को समझने में देरी कर दी. अगर किसी भी स्वास्थ्य संबंधित समस्या का समय से पता लग जाता है, तो इसका इलाज संभव है. इसके साथ ही हम इससे होने वाले बड़े खतरे से भी बच सकते हैं. यहीं वजह है कि लोगों के मन में स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को लेकर कई तरह के सवाल होते हैं. इसी तरह का एक सवाल जो आमतौर पर पूछा जाता है कि दांत क्षय किसे कहते हैं और इसके बचने के उपाय ? अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है, तो इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

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दांत क्षय

दांत क्षय किसे कहते हैं -

किसी भी बीमारी को अच्छे से समझे में शब्दों के अर्थ भी हमारी बहुत मद्द करते हैं. क्षय शब्द का अर्थ होता है- धीरे धीरे नष्ट होना. इसी वजह से दांत क्षय का शाब्दिक अर्थ हुआ - दांत का धीरे धीरे नष्ट होना. अगर साधारण शब्दों में इसे समझे तो , जब बैक्टिरिया की वजह से हमारे दांत धीरे धीरे नष्ट हो जाते हैं, तो इसे ही दांत क्षय या दंत क्षय रोग कहते हैं. यह बीमारी स्ट्रेप्टोकॉकस म्युटान्स (Streptococcus mutans) और लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) जीवाणुओं की वजह से फैलती है. अगर समय पर इसका इलाज नहीं कराया जाता है , तो इसकी वजह से हमें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. यह एक संक्रमण से फैलने वाली बीमारी है. दांत क्षय वर्तमान समय में बच्चों में होने वाली दुनिया की सबसे आम संक्रमण बीमारी है.

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दांत क्षय

दांत क्षय के कारण-

किसी भी बीमारी के इलाज से पहले हमें उसके कारणों को समझना चाहिएं. अगर दांत क्षय के सबसे पहले कारण की बात करें, हमारे दांतों में कुछ ऐसी बीमारियां या विकृतियां होती हैं. जिनकी वजह से दांत क्षय को बढ़ावा मिलता है. कुछ कारणों से हमारा दंतबल्क या तो कमजोर रह जाता है या फिर अप्रयाप्त मात्रा में निर्मित होता है. इसकी वजह से यह दांतों से गिर सकता है. इन दोनों ही स्थितियों में दांत क्षय का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा दांतों के क्षय में जीवाणुओं की भी अहम भूमिका होती है. वैसे तो हमारे मुंह में कई तरह के जीवाणु होते हैं. लेकिन उनमें से उनकी कुछ ही प्रजातियां दांत क्षय के लिए जिम्मेदार होती है. किसी व्यक्ति के मुंह में उपस्थित जीवाणु ग्लूकोज़, फ्रुक्टोज़ और सबसे आम तौर पर सुक्रोज़ (चीनी) को किण्वन नामक एक ग्लाइकोलिटीक प्रक्रिया के द्वारा लैक्टिक अम्ल आदि जैसे अम्लों में परिवर्तित कर देते हैं, यदि इन अम्लों को दांत के संपर्क में छोड़ दिया जाए, तो वे अखनिजीकरण का कारण बन सकते हैं, जो कि खनिजों के विलयन की प्रक्रिया है. इससे हमारे दांत कमजोर हो जाते हैं. हालांकि हमारे मुंह की लारों के द्वारा अगर इन अम्लों को निष्क्रिय कर दिया जाता है, तो ऐसी स्थिति में इन दोबारा खनिजीकरण भी हो जाता है.

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दांत क्षय से बचाव के उपाय-

अगर आपको दांत क्षय रोग लग गया है तथा इसकी वजह से दांत की जो संरचना नष्ट हो चुकी है. वह पूरी तरह से दोबारा निर्मित नहीं होती है. लेकिन हाँ , अगर हम स्वच्छता का बहुत अधिक ध्यान रखते हैं, तो बिल्कुल छोटे छोटे क्षतिग्रस्त घाव ठीक हो सकते हैं. कभी कभी हम सामयिक फ्लोराइड का इस्तमाल भी करते हैं, ताकि इसकी वजह से छोटे छोटे क्षतिग्रस्त छिद्रों में दोबारा खनिजीकरण की प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया जा सकें. इसके साथ ही अगर आप विशेष मौखिक कुल्ला करते हैं, तो यह क्षय पैदा करने वाले बैक्टीरियां को कम करता है. इसके साथ ही अगर हम कोई चबाने वाली चीज खाते हैं, जिसकी वजह से मुंह में लार ज्यादा आती हैं, तो इसकी वजह से भी दांत के क्षय को कम किया जा सकता है क्योंकि यह अखनिजीकरण से निर्मित उस अम्ल को निष्क्रिय कर देता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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