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जानिए हिन्दू धर्म में क्या है भगवान विश्वकर्मा पूजा का महत्त्व?

हमारे हिन्दू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का निर्माणकर्ता या शिल्पकार माना जाता है. भगवान विश्वकर्मा को ही विश्व का पहला इंजीनियर भी कहा जाता है.

जानिए हिन्दू धर्म में क्या है भगवान विश्वकर्मा पूजा का महत्त्व?

हमारे हिन्दू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का निर्माणकर्ता या शिल्पकार माना जाता है. भगवान विश्वकर्मा को ही विश्व का पहला इंजीनियर भी कहा जाता है. इसके साथ ही साथ विश्वकर्मा जी को यंत्रों का देवता भी माना जाता है. विश्वकर्मा पूजा इस साल 17 सितंबर को मनाई जा रही है। दरअसल इस बार 16 सितंबर को शाम 7 बजकर 23 मिनट पर संक्रांति है, इसलिए विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर को ही मनाई जाएगी.

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यह पूजा खासकर देश के पूर्वी प्रदेशों में मनाई जाती है, जैसे असम, त्रिपुरा, वेस्ट बंगाल, ओड़िशा, बिहार, झारखंड। कहते हैं कि विश्वकर्मा ने ही ब्रह्मा जी की सृष्टि के निर्माण में मदद की थी और पूरे संसार का नक्शा बनाया था. आपको बता दें कि हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा (vishwakarma puja) विशेष रूप से की जाती है.

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शास्त्रों में भगवान विश्वकर्मा को सृजन और निर्माण का देवता माना गया है। माना जाता है भगवान विश्वकर्मा ने कृष्ण की द्वारिकापुरी, पुष्पक विमान, इंद्र का वज्र, शिव का त्रिशूल, पांडवों की इन्द्रपस्थ नगरी का निर्माण किया था। इसलिये किसी निर्माण और सृजन से जुड़े लोग श्रद्धाभाव से भगवान विश्वकर्मा को आराध्य मानकर पूजन-अर्चन करते हैं।विश्वकर्मा के यथाविधि पूजन करने से घर और दुकान में सुख-समृद्धि आती है।

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इस दिन अपने कामकाज में उपयोग में आने वाली मशीनों को साफ करें। फिर स्नान करके भगवान विष्णु के साथ विश्वकर्माजी की प्रतिमा की विधिवत पूजा करनी चाहिए। ऋतुफल, मिष्ठान्न, पंचमेवा, पंचामृत का भोग लगाएं। दीप-धूप आदि जलाकर दोनों देवताओं की आरती उतारें।

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भगवान विश्वकर्मा की पूजा और यज्ञ विशेष -विधान से होता है. इसकी विधि यह है कि यज्ञकर्ता पत्नी सहित पूजा स्थान में बैठे. इसके बाद विष्णु भगवान का ध्यान करें. हाथ में पुष्प, अक्षत लेकर मंत्र पढ़े और चारों ओर अक्षत छिड़के. अपने हाथ में रक्षासूत्र बांधे एवं पत्नी को भी बांधे. पुष्प जलपात्र में छोड़ें.

इसके बाद हृदय में भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें. दीप जलाएं, जल के साथ पुष्प एवं सुपारी लेकर संकल्प करें. शुद्ध भूमि पर अष्टदल बनाए. उस पर जल डालें. इसके बाद पंचपल्लव, सप्त मृन्तिका, सुपारी, दक्षिणा कलश में डालकर कपड़े से कलश की तरफ अक्षत चढ़ाएं. चावल से भरा पात्र समर्पित कर विश्वकर्मा बाबा की मूर्ति स्थापित करें और वरुण देव का आह्वान करें.

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Shashwat

शशवत News4Social के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय घटनाक्रम, ताज़ा समाचार और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जटिल जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में पाठकों तक पहुँचाने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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