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कौन थे बामाखेपा जिनके साथ तारापीठ की तारा माँ खाना खाती थी?

(फोटो: IANS)

ईश्वर और भक्त का रिश्ता काफी अनूठा होता है। जब भक्त सच्चे मन से अपने ईश्वर की आराधना करता है , खुद को पूरी तरह ईश्वर की श्रद्धा , उपसना में समर्पित कर देता है तो ईश्वर भी भक्त के अधीन हो जाता है और हर…

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महायोगी बामा खेपा का पूरा नाम बामा चरण चट्टोपाध्याय था। उनका जन्म पश्चिम बंगाल के तारापीठ के समीप आटला गांव में1838 ई. में हुआ था। लोग प्यार से और सम्मानपूर्वक उनको बामा खेपा बोलते थे। बंगाली में खेपा…

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वामाखेपा बचपन से ही मां तारा की भक्ति में लीन रहते थे। उनके गांव के पास नदी पार मां तारा का एक सिद्ध शक्तिपीठ था जिसे तारापीठ के नाम से विश्वभर में प्रख्यात था। बामा छोटी आयो में ही में ही एक दिन अचान…

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ऐसा माना जाता है की वामाखेपा को माँ तारा के दर्शन होते थे। माता तारा उनके साथ खाना खाती थी। माँ के भांति अपनी गोद में वामाखेपा को सुलाती थी। वामाखेपा और माता तारा एक दूसरे से बात -चित करते और यहाँ तक…

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