आजादी के बाद भारत के इतिहास में इसका बहुत ही ज्यादा महत्व है. दूसरे विश्वयुद्ध ने दुनिया में दो बड़ी शक्तियों को जन्म दिया. जिसमें एक अमेरिका तथा दूसरा सोवियत रूस था. दुनिया के देश मुख्य तौर पर दो हिस…
ऐसे समय कुछ नवनिर्मित देशों ने इन दोनों गुटों से दूरी बनाने का निर्णय लिया. उनका मानना था कि वो नवनिर्मित देश हैं. उनकी प्राथमिकता विकास करना है. अपने देश के लोगों के जीवन में सुधार पर ध्यान देना जरूर…
भारत के लिए यह एक बड़े गर्व की बात थी कि भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन में ना सिर्फ बढ़-चढ कर भाग लिया. बल्कि इसके संस्थापक देशों में भारत का सबसे ज्यादा योगदान रहा. भारत इस आंदोलन के शुरू से लेकर वर्तमा…
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गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला सम्मेलन वर्ष 1961 में बेलग्रेड में आयोजित किया गया जिसमें जवाहरलाल नेहरू, यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति सुकर्णो, मिस्र के राष्ट्रपति कर्नल नासिर, घाना के राष्ट्रपति क्वामे एन्क…
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