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कुंडली में मंगल की शांति के लिए क्या उपाय करना चाहिए?

(फोटो: IANS)

मंगल एक पापी एवं क्रूर ग्रह है। इसमें मंगल की दो रूप में व्याख्या की गई है – नेक और बद अर्थात शुभ और अशुभ। शुभ मंगल का देवता साक्षात श्रीराम भक्त हनुमानजी को माना गया है जिसका हर ज्योतिष शास्त्र में उ…

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नव ग्रहों में मंगल को सेनापति की संज्ञा दी गयी है। शारीरिक तौर पर मंगल से प्रभावित जातक स्वस्थ, और मध्य लंबे कद के होते हैं। कमर पतली छाती चैड़ी, बाल घुंघराले, आंखे लाल होती हैं। उनके चेहरे पर तेज होत…

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शुभ मंगल मंगलकारी और अशुभ मंगल अमंगलकारी कार्य करता है। मंगल शक्ति, साहस, सेनाध्यक्ष, युद्ध, दुर्घटना, क्रोध, षड्यंत्र, बीमारियों, शत्रु, विपक्ष, विवाद, संपŸिा, छोटे भाई नेता, पुलिस, डाक्टर, वैज्ञानिक…

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लाल किताब में अशुभ अर्थात बद मंगल को वीरभद्र की संज्ञा दी गई है और माना गया है कि मंगल जातक का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा और वह स्वभाव से जिद्दी एवं उग्र हो सकता है। चतुर्थ भाव से सुख, संपत्ति, भूमि, भव…

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यदि मंगल सप्तम में हो या उस पर क्रूर दृष्टि डाल रहा हो, तो पारिवारिक व वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं रहेगा, विधुर-विधवा योग भी घटित हो सकते हैं।अष्टम भाव से आयु तथा जीवन में आने वाली बाधाओं का विचार किया जा…

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